- कबीर उपाश्रय में धर्मसभा के दौरान आचार्य विवेकचंद्र सागर सूरि ने कहा
मनुष्य भव दुर्लभ,परमात्मा की वाणी दुर्लभ, परमात्मा पर श्रद्धा दुर्लभ परंतु मनुष्य को दुर्लभता की अनुभूति नहीं होती है। मनुष्य सांप की तरह टेढ़ा-मेढ़ा चलता है, किंतु बिल में सीधा जाता है। ऐसे ही मोक्ष में सीधा जाता है। ज्ञानी मन को मोहनीय कर्म का राजा मानते हैं जो कि संसारी कर्म के आधार पर 14वां स्वर्गलोग या 7वां नरक तप होता है।
यह बात आचार्य विवेकचंद्र सागर सूरी जी ने कही। कबीर उपाश्रय में धर्मसभा में उन्होंने कहा बालक की भांति सरलता दर्पण जैसी परमात्मा की आज्ञानुसार दिनचर्या व प्रभु के ऊपर श्रद्धा से देवलोक का सीधा रास्ता है। दिन रात्रि धर्म ध्यान सामायिक में समय व्यतीत करने लगे, लोकोक्ति सामायिक श्रावक पुण्या जैसी।
प्रभु आज्ञा का मिश्रण से सत्कार्य, सद्बुद्धि की बुनियाद होगी : मुनि धैर्यचंद्र सागर ने कहा आज मनुष्य अपनी सात पीढ़ी की चिंता में तृष्णा के शिखर पर पहुंचना चाहता है, जबकि ज्ञानी कहते हैं पूत सपूत क्यों धन सचें, पूत कपूत क्यों धन संचे अत: संतोषी सदा सुखी, पड़ोसी सुखी तो दुखी। धर्म ही उत्कृष्ट मंगल है।
आचार्यश्री ने मांगलिक करवाई : आचार्य अशोक सागर सूरि, आचार्य सौम्यचंद्र सागर सूरि, आचार्य विवेकचंद्र सूरि आदि संतों का करमदी तीर्थ से प्रस्थान कर आगम वांचना स्थल कबीर उपाश्रय में ढोल-ढमाकों से मंगलवार सुबह आगमन हुआ। आचार्यश्री ने मांगलिक श्रमण करवाई। बुधवार सुबह 8.30 बजे खैरादीवास से आचार्यद्वय मंगल प्रवेश चल समारोह नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ गुजराती उपाश्रय पहुंचेगा। पारसमल भंडारी ने बताया गुजराती उपाश्रय में आचार्यश्री के प्रवचन होंगे और वहीं स्थिरता रहेंगी।
शिष्टाचार से मनुष्य समाज में अच्छा स्थान पा सकता है, नीमचौक स्थानक में उपाध्याय श्री रवींद्र मुनिजी ने कहा
रतलाम | मनुष्य जैसे-जैसे बढ़ता गया वैसे-वैसे उसके जीवन में परिवर्तन आते गए। इन्हीं परिवर्तनों ने मनुष्य के जीवन में आचार-विचार, व्यवहार और संस्कारों से भरने का अवसर शिष्टाचार के माध्यम से मिलता है। जिसके कारण मनुष्य समाज में अच्छा स्थान प्राप्त कर सकता है। यह बात उपाध्याय श्री रवींद्र मुनिजी ने कही। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक में धर्मसभा में उन्होंने कहा मनुष्य को कुलधर्म का पालन करना चाहिए, उसमें कोई विकृति हो तो उसे बदलने में संकोच नहीं करना चाहिए। धन का अपव्यय नहीं करना चाहिए।
उपदेशों काे आचरण में लाने वाला मनुष्य शाश्वत सुखों को प्राप्त करता है : साध्वी शीलाजी ने धर्मसभा में कहा
रतलाम | भगवान ने जैसा जाना, देखा और उपदेश दिया उसी अनुसार मनुष्य आचरण करता है। यह बात साध्वी शीलाजी ने कही। सज्जन मिल रोड स्थित सुभाष भंडारी के आवास पर हुई धर्मसभा में उन्होंने कहा जीवन में आचरण सबसे महत्वपूर्ण है यदि हम जीवन में भगवान के बताए मार्ग पर चलेंगे तो आत्मविकास के मार्ग को प्रशस्त करेंगे। नौलाईपुरा स्थानक में हुआ मंगल प्रवेश : साध्वी शीलाजी, अनुपम शीलाजी, सुव्रताजी, शीतलप्रभाजी, नेहप्रभाजी, चतुगुर्णाजी, अनंतगुणाजी, महकश्रीजी, प्रतिज्ञाजी, करुणाजी, अनुज्ञाजी, आस्थाजी, प्रणिधिजी ठाणा-13 का मंगलवार को श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल नौलाईपुरा स्थानक पर मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल नौलाईपुरा स्थानक पर पहुंची।

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