हमीदिया अस्पताल में 18 दिनों में तीन महिलाओं के साथ पति द्वारा की गई क्रूरता के मामले आए हैं। इनमें से एक घरेलू हिंसा की शिकार हुई सागर की आरती गौड़ दोबारा पति के साथ रहना चाहती हैं। वहीं बैतूल की कविता वंशकार का कहना था कि उसका पति मनोरोगी है। वह उन्हें सजा नहीं दिलाना चाहती है। दोनों महिलाओं ने परिजनों से पतियों की जमानत कराने की बात की है। दूसरी ओर करोंद निवासी संगीता सिसोदिया ने कहा कि उसके पति को फांसी की सजा हो। उसने जीवन भर का दर्द दिया है उसके लिए यह सजा भी कम है। तीनों पीड़ित महिला की कहानी उनकी जुबानी
मुझे जीवन भर के लिए अपाहिज करने वाले पति को कम से कम फांसी की सजा होना चाहिए। मैं जिस दर्द से गुजर रही हूं। वैसा ही दर्द उसे भी मिले। उसकी क्रूरता वाले चेहरे का स्मरण होते ही डर लगता है। उसने मुझे कभी पत्नी के रूप में मान नहीं दिया। मैं उसकी यातनाओं, छींटाकशी बर्दाश्त करती रही। मुझे तो न जाने किस अदृश्य शक्ति ने पति से बचा लिया। अन्यथा वह मार डालता। (जैसा कि कोलार निवासी संगीता सिसोदिया ने बताया)
पहले अच्छे थे पति, बाहरी हवा लग गई है
मेरी शादी को 26 साल हो गए हैं। दो लड़के, एक लड़की हैं। बड़ा बेटा 21 साल का है। इतने सालों में पति ने कभी ऊंची आवाज में बात नहीं की। डेढ़ साल से उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं हैं। कई बार वे बेकाबू हो जाते हैं। परसों रात को वे कब बाहर चले गए और कुल्हाड़ी लाकर हमला कर दिया। होश में आए तो रोने लगे। मैं उनको सजा नहीं दिलाना चाहती। बच्चे को बाेला है कि जमानत कराओ। मेरा पति देवता जैसा है।
(जैसा कि बैतूल निवासी कविता वंशकर ने बताया।)
प्यार करता है पति, उसी के साथ रहना चाहती हूं
मेरा पति मुझे बहुत प्यार करता है। उसे शक करने की आदत हो गई। जब हम लोग हरियाणा में थे, वह मेरा बहुत ख्याल रखता था। ससुराल वाले भी बहुत अच्छे हैं। मैं ठीक होने के बाद उनके साथ ही रहना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि पुलिस मेरे पति को छोड़ दे। मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है। मैंने ससुर को भी बोला है कि उन्हें जेल से छुड़ाने का इंतजाम करें। समझ में नहीं आता कि पति का स्वभाव कैसे बदल गया।
(जैसा कि सागर निवासी आरती गौड़ ने बताया)
क्या होती है घरेलू हिंसा
महिलाओं के साथ पति, ससुर, जेठ, देवर, भाई और पिता द्वारा मार-पीट करना, अपमानित करना, गालियां देना, चरित्र और आचरण पर आरोप लगाना, लड़का न होने पर प्रताड़ित करना, नौकरी न करने या छोड़ने के लिए मजबूर करना या किसी व्यक्ति विशेष से विवाह के लिए मजबूर करना आदि घरेलू हिंसा में शामिल हैं। आत्महत्या की धमकी देना, महिला को और बच्चे की देखभाल के लिए धन और संसाधन उपलब्ध न कराना आदि।
कहां, कितने घरेलू प्रकरण
- 390 केस महिला आयोग में।
- 358 केस गौरवी सखी वन स्टॉप क्राइसिस में पहुंचे।
- 1625 केस वर्तमान में जिला कोर्ट में लंबित ।
- 228 प्रकरण महिला परियोजनों के माध्यम से दर्ज।
इधर, सरकार लाएगी सख्त कानून; 2005 के अधिनियम, आईपीसी की धाराओं का होगा अध्ययन
घरेलू हिंसा में महिलाओं को हाथ काटने जैसे जघन्य मामलों को बढ़ता देख राज्य सरकार अब महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को इस संबंध में बैठक की। इसमें तय हुआ कि घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 और आईपीसी में शामिल प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा। विधि विभाग एक ठोस प्रारूप बनाएगा, जिसे सीएम दोबारा देखेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि मार्च में महिलाओं के साथ अंग-भंग के जघन्य अपराध से प्रभावित तीनों महिलाओं को चार-चार लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पति या परिवार के निकटतम व्यक्ति द्वारा घर की महिला पर हिंसा करना विश्वास की हत्या जैसा है। जिसे सुरक्षा करनी चाहिए थी, वही अत्याचारी बने। उन्होंने कहा कि ऐसा अत्याचार करने वाले व्यक्ति समझ लें कि सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी रहेगी। कठोरतम सजा के लिए कड़े प्रावधान किए जाएंगे
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