बुधवार, 3 मार्च 2021

संक्रमण नहीं अब लापरवाही:सरकारी ऑफिसों में सुबह 10.30 बजे से काम शुरू होना चाहिए, यहां ताले ही खुल रहे, ना अफसर मिल रहे हैं ना ही कर्मचारी


भले कोराेना संक्रमण का डर कम होने लगा है। अनलॉक में सब काम सुचारु हो गए हैं लेकिन सरकारी दफ्तरों में लापरवाही बरकरार है। पहले लॉकडाउन और फिर ठंड का बहाना था। अब तो वह भी नहीं रही। इसके बाद भी कर्मचारी ऑफिस समय पर नहीं पहुंच रहे हैं।

ऑफिसाें में सुबह 10.30 बजे काम शुरू हो जाना चाहिए लेकिन दफ्तर के ताले तक नहीं खुल रहे हैं। अफसर समय पर आ रहे हैं और ना उन्हें यह देखने की फुर्सत है कि स्टाफ समय पर आ रहा है या नहीं। जनता परेशान है और उनके जरूरी काम अटक रहे हैं। मंगलवार को भास्कर ने सरकारी दफ्तरों का जायजा लिया तो यही स्थिति मिली। ना तो अफसर समय पर दफ्तर पहुंचे और ना ही कर्मचारी। सरकारी दफ्तर में सुबह 10.30 से शाम 5.30 बजे तक का समय है।

स्थिति यह है कि अधिकारी निरीक्षण पर निकलते हैं तो कर्मचारी लापरवाह हो जाते हैं और ऑफिस समय पर नहीं पहुंचते। हद यह रही कि भास्कर ने समय को लेकर सवाल किया तो वे बोले कर्मचारियों को छोड़ो और काम बताओ। जबकि आमजन संबंधित अधिकारी को फोन लगाकर बात भी नहीं रख पाता और चक्कर लगाता रह जाता है।

1. ऑफिस शुरू होने के समय प्यून ने खोला विभाग का ताला

जिला शिक्षा केंद्र, सुबह 10.30 बजे
प्यून अशोक कुमार पहुंचा। मेन गेट का ताला खोला। डीपीसी के कक्ष का ताला खोला और लाइट चालू की। सुबह 10.40 बजे तक भी कोई नहीं पहुंचा। प्यून ने बताया साहब फिल्ड में हैं। अन्य कर्मचारी आने वाले हैं। सुबह 10.45 बजे तक कोई नहीं आया। रोज यही स्थिति रहती है। यहां 15 कर्मचारियों का स्टाफ है।
जिम्मेदार-डीपीसी मोहनलाल सांसरी बोले सुबह 10 बजे पहुंच गया था। बाहर से ही निरीक्षण करने पहुंच गया। कर्मचारियों से समय को लेकर बात करेंगे।

अहमियत- 8वीं तक के सभी स्कूल विभाग में आते हैं। आरटीई के एडमिशन हो या भुगतान, स्कूलों निर्माण सभी ये ही करवाता है।

2. गेट पर मिला बाबू, बोला : थोड़ी देर में सभी कर्मचारी आते होंगे

रतलाम विकास प्राधिकरण, सुबह 10.35 बजे
गेट पर विभाग के बाबू राजेश उपाध्याय कुर्सी लगाकर गेट पर बैठे हैं। अन्य कर्मचारी नहीं है। पूछा ईई साहब सहित अन्य कर्मचारी कहां है तो जवाब मिला अभी थोड़ी देर में आने वाले हैं। यहां कर्मचारी सुबह 11 बजे ही पहुंचते हैं। सभी कर्मचारी अपने मनमर्जी से पहुंचते हैं। विभाग में 10 का स्टाफ है।
जिम्मेदार-विभाग के ईई रंजन गर्ग ने बताया मैं फील्ड पर था। इसलिए नहीं आ पाया। अन्य कर्मचारी भी समय पर ही आते हैं। आप तो काम बताइये।

अहमियत- आरडीए ने जो कॉलोनियां काटी है उसकी जानकारी, रजिस्ट्री, आवंटन सहित अन्य कामों के लिए लोग यहां आते हैं।

3. कर्मचारी-ऑफिस खाली है तो क्या हुआ, आप काम बताइये

सामाजिक सुरक्षा विभाग, सुबह 10.40 बजे
सभी टेबलें खाली। अंदर प्रवेश किया तो बाहर खड़ा कर्मचारी किशोर कुमार आया और बोला क्या काम है। पूछा कर्मचारी कब तक आएंगे तो जवाब मिला आप तो काम बताइये। क्या आपको समग्र आईडी बनवाना है। बनवाना है तो दरवाजे पर लगे ये डॉक्यूमेंट लेकर आना। विभाग में 7 का स्टाफ है।
जिम्मेदार-विभाग का काम आयुषी पालीवाल देखती है। वो दफ्तर में नहीं मिली और मोबाइल भी बंद मिला। उन्हें भास्कर ने अपना सवाल भेज दिया है।

अहमियत- समग्र आईडी बनाई जाती है। स्कूलों में एडमिशन, आयुष्मान कार्ड, छात्रवृत्ति, कॉलेज में एडमिशन में अहम भूमिका।

4. आप रुक जाओ, थोड़ी देर में साहब आ ही जाएंगे

लोक निर्माण विभाग, सुबह 10.45 बजे
मुख्य द्वार पर विभाग का प्यून शैलेंद्रसिंह खड़ा था। अंदर प्रवेश करने पर बोला कहां जा रहे हो ऑफिस में कोई नहीं है। विभाग के ईई दीपेश ओझा के चैंबर का दरवाजा बंद था। लेकिन लाइट और पंखे चालू थे। प्यून बोला थोड़ी देर रूको, साहब आने वाले हैं। यहां के हाल भी अन्य विभागों की तरह रहे। 25 का स्टाफ है।
जिम्मेदार बोले-ईई दीपेश गुप्ता ने बताया ऑफिस खुलने का समय सुबह 10.30 बजे का है। कल से सभी कर्मचारी समय पर आए। व्यवस्था की जाएगी।

अहमियत- सड़क के साथ ही अन्य निर्माण संबंधी काम होते हैं। यह मुख्यालय है। निर्माण संबंधी कोई शिकायत है तो यहां की जा सकती है।

5. चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सफाई करता मिला, बोला- साहब अभी आ रहे हैं

वन विभाग, सुबह 10.30 बजे
डीएफओ का कक्ष बंद था। सामने बने विभागीय कमरे खुले थे। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सफाई कर रहा था। साहब अब तक नहीं आए पूछने पर उसने बताया कि कुछ समय बाद सब आ जाएंगे। विभाग में 40 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत है।

अहमियत- विभागीय कर्मचारी प्रकरणों के निराकरण, आमजन शिकायतों के लिए, पट़्टों के लिए आवेदन यही होते हैं। ​​​​​​​

जिम्मेदार- डीएफओ डीएस डोडवे ना तो कक्ष में मिले और ना ही उन्होंने कॉल रिसीव किया। उन्हें भास्कर ने सवाल भेज दिया है।

6. अफसर नहीं आए... ऑफिस के आधे कक्ष तो खुले तक नहीं

आदिम जाति कल्याण विभाग, सुबह 10.30 बजे

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कैबिन की सफाई करते मिला। बोला कि अभी कोई भी नहीं आया है। सिर्फ जैन साहब बैठे है। कब तक आएंगे पूछा तो कहा कि 10 से 15 मिनट बाद आना शुरू हो जाएंगे। विभाग में 40 कर्मचारी कार्यरत है।

अहमियत - छात्रवृत्ति, छात्रावास, निर्माण कार्य, वेतन भत्ते सहित अन्य काम होते हैं, डेढ़ हजार शिक्षक और 25 हजार स्टूडेंट जुड़े।

जिम्मेदार-विभाग के प्रभारी और ग्रामीण एसडीएम एमएल आर्य ने बताया सुबह 11.30 बजे तक पहुंचा था। मैं कल कार्यालय में पूछताछ करता हूं।​​​​​​​​​​​​​​


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