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गुरुवार, 11 मार्च 2021

16 घंटे में ही बदमाशों को मिला सबक:मुरैना में लूट का प्रयास करने वालों से पुलिस की मुठभेड़, दोनों तरफ से चली गोलियां, इंटरस्टेट लुटेरे रामप्रीत को लगी गोली, पकड़ा गया

16 घंटे में ही बदमाशों को मिला सबक:मुरैना में लूट का प्रयास करने वालों से पुलिस की मुठभेड़, दोनों तरफ से चली गोलियां, इंटरस्टेट लुटेरे रामप्रीत को लगी गोली, पकड़ा गया

अंबाह के बरेह गांव में सुबह 4.30 बजे हुई मुठभेड़,दो बदमाश भागे, लेकिन पैर में गोली लगने पर 10 हजार का इनामी रामप्रीत पकड़ाया


मुरैना में SP बंगले के पास ATM कैश वैन को लूटने का प्रयास करने वालों को 16 घंटे में ही पुलिस ने सबक सिखा दिया। मंगलवार सुबह 4.30 बजे अंबाह के बरेह व अयोध्यापुरी मोड़ पर लुटेरों से पुलिस की मुठभेड़ हो गई। बदमाशों ने पुलिस पर पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस ने भी पोजिशन लेकर गोलियां चलाईं। इसमें एक गोली इंटरस्टेट लुटेरे रामप्रीत गुर्जर के पैर में लगी और वह वहीं घायल होकर गिर पड़ा। इसके बाद उसके साथी फरार हो गए। पुलिस ने रामप्रीत को तत्काल गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया है। मौके पर उसकी पिस्टल व बाइक भी पड़ी थी।

SP बंगले के 100 कदम दूर लूट की कोशिश:मुरैना में ATM कैश वैन को पिस्टल की नोंक पर लूटने आए बदमाश, जान पर खेल लुटेरों से भिड़ा गार्ड, फायरिंग कर भागे

मुरैना के अंबाह थाना स्थित बरेह गांव व अयोध्यापुरी का मोड़, जहां बदमाशों से पुलिस की मुठभेड़ हुई। - Dainik Bhaskar
मुरैना के अंबाह थाना स्थित बरेह गांव व अयोध्यापुरी का मोड़, जहां बदमाशों से पुलिस की मुठभेड़ हुई।

मंगलवार दोपहर 12.30 बजे मुरैना के एमएस रोड पर SP बंगले के पास बाइक सवार तीन बदमाशों ने ATM कैश वैन को लूटने का प्रयास किया था। जवाब में गार्ड और कैश वैन के स्टाफ ने बदमाशों को पटक लिया था। इस पर बदमाश फायरिंग कर भागे थे। SP बंगले के पास वारदात के दुस्साहस से मुरैना पुलिस अवाक रह गई थी। घटनास्थल से फुटेज मिलने के बाद बदमाशों की तलाश शुरू की।

पुलिस लगातार बाइक सवार लुटेरों की घेराबंदी कर रही थी। इसी बीच SP मुरैना सुनील पांडे को सूचना मिली कि मुरैना में दहशत फैलाने वाले बदमाश अंबाह में छिपे हुए हैं। इस पर तत्काल टीमों को अलर्ट किया गया। एक टीम अंबाह थाना प्रभारी योगेन्द्र सिंह जादौन के नेतृत्व में हाइवे की तरफ निकाली गई। इसी टीम को बरेह गांव और अयोध्यापुरी के मोड़ पर पुलिया के पास बाइक सवार तीन बदमाश दिखे। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो बदमाशों ने पुलिस पर पिस्टल से गोलियां चलानी शुरू कर दिया। पुलिस की टीमों ने भी अपनी पोजिशन लेकर जवाबी कार्रवाई शुरू की। मुठभेड़ में दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में एक बादमाश के पैर में गोली लगी और वह वहीं गिर पड़ा। इसके बाद उसके दो साथी उसे छोड़कर भाग गए।

घटना स्थल से पुलिस ने घायल बदमाश को गिरफ्तार किया है। घायल बदमाश की पहचान इंटरस्टेट लुटेरा रामप्रीत सिंह गुर्जर निवासी भिंड के रूप में हुई है। पुलिस ने घायल बदमाश को तत्काल अस्पताल पहुंचाया है। मौके से उसकी बाइक, पिस्टल मिली है। उसके साथियों की तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं।

मुठभेड़ स्थल, यहां बदमाश को लगी थी गोली और स्पॉट पर पड़ा लुटेरे का खून। - Dainik Bhaskar
मुठभेड़ स्थल, यहां बदमाश को लगी थी गोली और स्पॉट पर पड़ा लुटेरे का खून।

कौन है रामप्रीत?
पकड़ा गया बदमाश रामप्रीत सिंह गुर्जर अपराध की दुनिया का जाना-पहचाना नाम है। उस पर वर्ष 2019 तक 56 अपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 8 हत्या के मामले शामिल हैं। इसके अलावा व्यापारियों की सुपारी लेकर हत्या, लूट करना ही उसका पेशा है। उसे इंटरस्टेट बदमाश यूं ही नहीं कहा जाता है उस पर आगरा में 5, धौलपुर में 3 यूपी के औरेया में 1 मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना, ग्वालियर व शिवपुरी में 45 के लगभग आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह 2018 में शिवपुरी पुलिस के हाथ लगा था तब उस पर 30 हजार का इनाम था। अभी वह जमानत पर छूटने के बाद बाहर था। उस पर अभी 10 हजार रुपए का इनाम था।

गोहद की इस घटना के बाद आया था सुर्खियों में
साल 2010-11 में रामप्रीत ने अपने कुछ साथियों के साथ भिंड के गोहद में एक व्यापारी की चौराहे पर हत्या कर 42 लाख रुपए की लूट को अंजाम दिया था। घटना को उस समय अंजाम दिया गया था जब व्यापारी बैंक से पैसे निकालकर अपने घर जा रहा था। इसके बाद रामप्रीत ने UP के औरेया में 30 लाख की डकैती, मुरैना में पेट्रोल पंप पर 20 लाख की लूट की थी। अभी कुछ दिन पूर्व ही के UP आगरा के पास स्थित वाह तहसील के ग्राम विक्रमपुर में वहां के प्रधान हरेन्द्र यादव की 5 लाख रुपए की सुपारी लेकर गोली मारकर हत्या कर दी थी।

पुलिस से मुठभेड़ में घायल हुए रामप्रीत की पिस्टल और बाइक घटनास्थल पर पड़ी हुई। - Dainik Bhaskar
पुलिस से मुठभेड़ में घायल हुए रामप्रीत की पिस्टल और बाइक घटनास्थल पर पड़ी हुई।

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आलमपुर में शिव प्रतिमा का अनावरण:अंचल की सबसे बड़ी 85 फीट की शिव प्रतिमा का अनावरण कल, अब ऐसी पूरे देश में 11 बनेंगी

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बुधवार, 3 मार्च 2021

कलेक्टोरेट में जनसुनवाई:ओसवालनगर से सूरजश्री कॉलोनी के बीच की स्ट्रीट लाइट छह महीने से बंद

कलेक्टोरेट में जनसुनवाई:ओसवालनगर से सूरजश्री कॉलोनी के बीच की स्ट्रीट लाइट छह महीने से बंद


  • जनसुनवाई में 65 शिकायतें, निराकरण के लिए विभागों को भेजीं

कलेक्टोरेट में जनसुनवाई हुई। एडीएम जमुना भिड़े, डिप्टी कलेक्टर शिराली जैन ने समस्या सुनी। 65 आवेदन आए। इनके निराकरण के लिए संबंधित विभागों को भेजा गया। सूरजश्री काॅलोनी निवासी राजेश त्रिवेदी ने शिकायत की कि ओसवाल नगर तथा सूरजश्री कालोनी के बीच स्ट्रीट लाइट के पोल लगे हैं। छह माह से विद्युत प्रदाय बंद है। स्ट्रीट लाइट चालू करवाई जाए। प्रकरण नगर निगम को भेजा है। गवली मोहल्ला निवासी जीवन गवली ने बताया कि प्रार्थी की गुमटी जिस स्थान पर स्थित वह जगह प्रार्थी की है परन्तु गुमटी के पास रहने वाले आए दिन मुझे उक्त जगह से लिए परेशान कर रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

पंचायत मलवासी के ग्राम नाका निवासी वालजी ने आवेदन में बताया पंचायत मलवासी के ग्राम नाका में पानी का संकट है। क्षेत्र में दो हैंडपंप लगे हैं। जिनमें कम मात्रा में पानी आता है। क्षेत्रवासियों के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। प्रकरण पीएचई को भेजा है। बाजना तहसील के रायपाडा निवासी लक्ष्मण पिता नाथू डोडियार ने जनसुनवाई में बताया कि उद्यानिकी विभाग द्वारा नेट हाउस एवं अन्य कार्य के लिए शासन की ओर से 14 लाख 20 हजार रुपए स्वीकृत किए थे। राशि दिलवाने के नाम पर कुछ लोगों द्वारा प्रार्थी से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाकर धोखाधडी करते हुए उद्यानिकी विभाग से 6 लाख रुपए निकाल लिए हैं। मामला उद्यानिकी विभाग को भेजा है ताकि कार्रवाई हो सके।

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असली- नकली का खेल:पुलिस को दबिश में मिली 20 लाख रुपए की 1036 डुप्लीकेट घड़ियां, ब्रांडेड कंपनी का बताकर बेच रहे थे नकली माल - New!

आम लोगों को टीका कल से:सरकारी अस्पताल में मुफ्त तो निजी अस्पताल में लगेगा 250 रुपए, दो लाख का डोज पहुंचा, खुद से कराना होगा वरिष्ठ और बीमार को रजिस्ट्रेशन

कोरोना रिटर्न:6 दिन में 737 केस, होम आइसोलेशन में 473 एक्टिव मरीज, कमिश्नर बोले- अस्पताल 30% बेड रखें रिजर्व

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दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन:18 साल की मेहरून्निशा के लिवर में थी 12 सेमी लंबी डेढ़ किलो वजनी गठान, डाॅक्टरों ने बिना चीर-फाड़ के निकाली

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महंगाई की मार:सब्जी सस्ती लेकिन महंगी दाल और रसोई गैस ने बिगाड़ा जायका, एक थाली पर बढ़ा औसतन 15 रुपए का खर्च

सैंपलिंग घटी, फिर भी चार महीने से नहीं बदले दाम:अन्य राज्यों ने घटाए कोरोना जांच के दाम; ओडिशा में 400, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान में हजार रुपए से कम, लेकिन मप्र में 1200 ही लग रहे

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सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

अिभयान:उमा भारती ने गांव में शराब बंदी का दिलाया संकल्प

अिभयान:उमा भारती ने गांव में शराब बंदी का दिलाया संकल्प


प्रदेश नशा मुक्त हो, इसके लिए पहली बैठक पूर्व सीएम ने अपने गांव में ग्रामीणों के साथ की

प्रदेश को नशा मुक्त करने के लिए पूर्व सीएम उमा भारती ने अपनी माता बेटीबाई की पुण्यतिथि पर गृहग्राम में ग्रामीणों के साथ बैठक कर संकल्प दिलाया। नशा मुक्त प्रदेश बनाने के लिए अपने गांव से शुरूआत की है।

ग्रामीणों के साथ बैठक कर पूर्व सीएम उमा भारती ने कहा कि मैं अपना नाम और गांव का नाम बदनाम नहीं होने दूंगी और तुम्हें भी इस गांव का नाम बदनाम नहीं होने देना है। इसके लिए सभी एक जुटता से नशा मुक्त हो। मुझे अपनी दीदी या बड़े बुजुर्ग की हेसियत से समझकर संकल्प ले कि दीदी ने कहा था कि नशा नहीं करना है। दरअसल रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्व सीएम उमा भारती अपने गृहग्राम डूडा गांव पहुंची।

जहां उन्होंने समाधि स्थल पर एक कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें विधायक राकेश गिरी, खरगापुर विधायक राहुल सिंह शामिल हुए। सभी के साथ उन्होंने अपनी स्वर्गीय मां को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान पूर्व सीएम उमा भारती ने कहा कि 1981 में हमारी माता बेटीबाई का निधन हुआ था। जिसके चलते आज उनकी पुण्यतिथि पर मैं अपने गांव डूडा में आप सभी के बीच आई हूं।

अब मुझे यह सुनने को नहीं मिलना चाहिए कि गांव में किसी ने भी शराब पी है: पूर्व सीएम उमा भारती
पूर्व सीएम उमा भारती ने कहा कि गांव के प्रत्येक व्यक्ति को नशा करना छोड़ना होगा। शराब लोगों के लिए काल बनकर आती है। हालांकि इस गांव में एक भी शराब की दुकान नहीं है। फिर लोग बाहर से शराब लेकर आते हैं और नशा करते हैं। अब मुझे यह सुनने को नहीं मिलना चाहिए कि गांव में किसी ने शराब पी है। इसके लिए हम पहली बैठक कर रहे हैं। सबसे पहले अपने गांव को नशा मुक्त बनाने का प्रयास है। इसके बाद हम धीरे-धीरे अन्य गांव से शराब की दुकानों को बाहर करके नशा मुक्त करेंगे।

हम जैसा बीज डालेंगे वैसा काटेंगे
विधायक राकेश गिरी ने कहा कि हम जीवन में जैसा बीज डालेंगे हम वैसा काटेंगे, माता बेटीबाई ने अपने जीवन में जो बोया है वह आज हमारे सामने हैं। उन्होंने हमेशा धर्म और नीति और न्याय को बोया है। जो हम सभी के सामने हैं। वहीं विधायक राहुल सिंह लोधी ने भ अपने विचार व्यक्त किए। सभी ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

शनिवार, 19 दिसंबर 2020

शाजापुर के युवकों ने किया था हिरण का शिकार, डॉक्टर के दो दोस्त व एक मरीज भी आरोपी बने

शाजापुर के युवकों ने किया था हिरण का शिकार, डॉक्टर के दो दोस्त व एक मरीज भी आरोपी बने

शाजापुर के युवकों ने किया था हिरण का शिकार, डॉक्टर के दो दोस्त व एक मरीज भी आरोपी बने

बीडीएस डॉक्टर के घर से मिले हिरण के मांस के मामले में पुलिस ने शिकारियों का भी पता लगा लिया। डॉक्टर के दो दोस्त व एक परिचित मरीज ने शाजापुर जिले के चिचोड़ीखेड़ा गांव के जंगल में हिरण का शिकार किया था। पुलिस ने सभी की पहचान करते हुए केस में डॉक्टर के अलावा तीन अन्य आरोपी बढ़ाए गए हैं।

फ्रीगंज घासमंडी निवासी डॉक्टर परवेज असलम के घर से पुलिस ने 14 दिसंबर को दबिश देकर हिरण का 9 किलो 800 ग्राम मांस जब्त किया था। इस मामले में रिमांड के दौरान पूछताछ में डॉक्टर ने स्वीकारा कि शाजापुर के चिचोड़ीखेड़ा गांव के बरकत खां पिता नेहमतउल्ला, फतेह पिता रहमत खां व गुलशेर खां ने हिरण का शिकार करने के बाद मांस के लिए फोन लगाया था। माधवनगर टीआई दिनेश प्रजापति ने बताया दो आरोपी डॉक्टर के दोस्त व एक मरीज है। तीनों की तलाश की जा रही है।

डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर लगते ही तीनों फरार हो गए हैं, जिनके यहां दबिश दी गई है। गिरफ्तार डॉक्टर ने यह भी स्वीकारा कि वह एक बार पहले भी उक्त युवकों से हिरण का मांस ला चुका था। आरोपी से घटना में प्रयुक्त कार एमपी13 सीसी-5558 जब्त की गई है। चार दिन का रिमांड खत्म होने पर शनिवार को आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

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शाजापुर के युवकों ने किया था हिरण का शिकार, डॉक्टर के दो दोस्त व एक मरीज भी आरोपी बने
फाइल फोटो



बुधवार, 2 दिसंबर 2020

उत्तर प्रदेश से खरीदकर पोरसा सोसाइटी पर बेचने जा रहा 50 क्विंटल बाजरा जब्त

उत्तर प्रदेश से खरीदकर पोरसा सोसाइटी पर बेचने जा रहा 50 क्विंटल बाजरा जब्त

उत्तर प्रदेश से खरीदकर पोरसा सोसाइटी पर बेचने जा रहा 50 क्विंटल बाजरा जब्त

यूपी से 1300 रुपए क्विंटल में बाजरा खरीदकर पोरसा की सोसाइटियों पर बेचने के लिए लाया जा रहा 50 क्विंटल बाजरा से भरे 2 लोडिंग वाहनों को तहसीलदार नरेश शर्मा ने बुधारा चौकी पर मंगलवार को पकड़ा। जब लोडिंग वाहनों के ड्राइवरों से बाजरा से संबंधित दस्तावेज मांगे गए तो वह दिखा नहीं सके। इस पर दोनों वाहनों को थाने में रखवाया गया है। तहसीलदार नरेश शर्मा ने बताया कि यूपी से बाजरा खरीदकर पोरसा की सोसाइटियों पर बेचने की सूचना पर हमने पोरसा-यूपी बॉर्डर पर स्थित बुधारा चेकिंग प्वाइंट पर तैनाती कर रखी थी।

मंगलवार को नायब तहसीलदार राजकुमार नागोरिया व पटवारी सांतेश तोमर, अरविंद तोमर ने 2 लोडिंग वाहन यूपी से आती हुई देखीं। जिन्हें खोलकर देखा गया तो उसमें तकरीबन 50 क्विंटल से अधिक बाजरा भरा हुआ था। लोडिंग वाहन क्रमांक यूपी-75-एटी-3145 और यूपी-75-एम-5394 में भरे बाजरा के संबंध में ड्राइवर से जब सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने यह तो बताया कि बाजरा हम यूपी से भरकर ला रहे हैं पोरसा डिलीवरी देनी थी। बाजरा किसका था और किसने पोरसा भिजवाया था, इस संबंध में ड्राइवर कुछ नहीं बता सके। दोनों वाहनों को पकड़कर पुलिस थाने में रखवाया गया है।



उत्तर प्रदेश से खरीदकर पोरसा सोसाइटी पर बेचने जा रहा 50 क्विंटल बाजरा जब्त
पोरसा में पकड़ी गई बाजरा से भरी लोडिंग, जिसमें यूपी से माल आ रहा था।


बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

750 करोड़ की लागत से 5 लाख वर्ग फीट के काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का निर्माण शुरू

750 करोड़ की लागत से 5 लाख वर्ग फीट के काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का निर्माण शुरू

750 करोड़ की लागत से 5 लाख वर्ग फीट के काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का निर्माण शुरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर ने आकार लेना शुरू कर दिया है। कॉरिडोर में बनने वाले दर्शनार्थी सुविधा केंद्र की पहली झलक बेहद खूबसूरत है। करीब 750 करोड़ की लागत से बन रहे काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के पांच लाख वर्ग फीट के एरिया में कल्चरल सेंटर, वैदिक केंद्र, टूरिस्ट फेसिलिटेशन सेंटर, सिटी म्यूजियम, जप-तप भवन, भोगशाला, मोक्ष भवन और दर्शनार्थी सुविधा केंद्र बनाया जाना है।

काशी विश्वनाथ मंदिर से मणिकर्णिका और ललिता घाट के बीच एक किलोमीटर लंबे और 70 फीट चौड़े, पांच लाख वर्ग फिट के कॉरिडोर ने पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। कॉरिडोर के लिए 200 से अधिक भवनों व मंदिरों को अधिग्रहण पर 300 करोड़ रु. खर्च किए गए हैं। वहीं कॉरिडोर पर 339 करोड़ रु. खर्च हो रहे हैं। इसमें रूद्राक्ष सहित धार्मिक महत्व के पेड़ पौधे लगेंगे।


काशी विश्वनाथ मंदिर से मणिकर्णिका और ललिता घाट के बीच एक किलोमीटर लंबे और 70 फीट चौड़े, पांच लाख वर्ग फिट के कॉरिडोर ने पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है।


बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

हाईकोर्ट ने माना कि अंतिम संस्कार के मामले में परिवार के मनावाधिकारों का हुआ उल्लंघन

हाईकोर्ट ने माना कि अंतिम संस्कार के मामले में परिवार के मनावाधिकारों का हुआ उल्लंघन

हाईकोर्ट ने माना कि अंतिम संस्कार के मामले में परिवार के मनावाधिकारों का हुआ उल्लंघन

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सोमवार को हाथरस घटना में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार बिना परिवार की मर्जी के कराए जाने के मामले में हुई सुनवाई का आदेश मंगलवार को देर शाम को आ गया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि हाथरस के एसपी को निलम्बित किया गया तो डीएम को वहां बनाए क्यों रखा गया है। न्यायालय ने कहा कि हम राज्य सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह इस सम्बंध में एक निष्पक्ष निर्णय लेगी।

हालांकि न्यायालय द्वारा डीएम को निलम्बित न किये जाने का कारण पूछे जाने पर अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश अवस्थी कोई संतोषजनक जवाब न दे सके। न्यायालय ने उनसे यह भी पूछा कि वर्तमान परिस्थितियों में जबकि अंतिम संस्कार के मामले में डीएम का एक रोल था, ऐसे में क्या उन्हें हाथरस में बनाए रखना उचित है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने भरोसा दिलाया कि सरकार मामले के इस पहलू को देखेगी व इस पर निर्णय लेगी।

वहीं न्यायालय ने पीड़िता के परिवार, अपर मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) व हाथरस डीएम प्रवीण कुमार को विस्तारपूर्वक सुनने के बाद अपने आदेश में कहा है कि तथ्यों से प्रतीत होता है कि मृतका का चेहरा दिखाने के परिवार के अनुरोध को प्रशासन ने स्पष्ट रूप से इंकार नहीं किया होगा लेकिन तथ्य यही है कि उनके बार-बार के अनुरोध के बावजूद इसे उनमें से किसी को भी नहीं दिखाया गया। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार का उल्लंघन किया गया और न सिर्फ पीड़ित परिवार बल्कि वहां मौजूद लोगों और रिश्तेदारों की भावनाओं को भी आहत किया गया।

लिहाजा हमारे समक्ष महत्वपूर्ण मुद्दा है कि क्या आधी रात में जल्दबाजी से अंतिम संस्कार करके व बिना परिवार को मृतका का चेहरा दिखाए और आवश्यक धार्मिक क्रियाकलाप की अनुमति न देकर संविधान में प्रदत्त जीवन के अधिकार व धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन किया गया है। यदि ऐसा है तो यह तय करना होगा कि इसका कौन जिम्मेदार है ताकि उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके व पीड़िता के परिवार की क्षतिपूर्ति कैसे की जा सकती है।

न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की है कि आजादी के बाद शासन और प्रशासन का सिद्धांत ‘सेवा’ और ‘सुरक्षा’ होना चाहिए, न कि ‘राज’ और ‘नियंत्रण’ जैसा कि आजादी के पहले था। जिला स्तरीय अधिकारियों को ऐसी परिस्थितियों से डील करने के लिए सरकार की ओर से समुचित प्रक्रिया व दिशानिर्देश मिलना चाहिए। भविष्य में ऐसा विवाद न उत्पन्न हो, इस बावत भी न्यायालय विचार करेगी। न्यायालय ने अपने आदेश में अपर मुख्य सचिव के इस बयान को भी दर्ज किया कि सरकार जिला स्तरीय अधिकारियों के लिए ऐसी परिस्थितियों में अंतिम संस्कार को लेकर दिशानिर्देश जारी करेगी।

न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने सख्ती से यह भी आदेश दिया है कि जो अधिकारी इस मामले की विवेचना से नहीं जुड़े हैं, वे अपराध के बारे में अथवा साक्ष्य संकलन के बारे में बयान न दें क्योंकि यह भ्रम पैदा कर सकता है। न्यायालय व जांच एजेंसियां इस मामले को देख रही हैं लिहाजा गैर जिम्मेदराना बयानबाजी से परहेज किया जाए। न्यायालय ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप न करने की मंशा रखते हुए, हम मीडिया व राजनीतिक दलों से भी अनुरोध करते हैं कि वे ऐसा कोई विचार न व्यक्त करें जिससे सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचे व पीड़िता के परिवार व अभियुक्तों के अधिकारों का उल्लंघन हो। न्यायालय ने कहा कि जिस प्रकार अभियुक्तों को ट्रायल पूर्ण होने से पहले दोषी नहीं ठहराना चाहिए, उसी प्रकार किसी को पीड़िता के चरित्र हनन में भी संलिप्त नहीं होना चाहिए।

मुआवजे की रकम को बैंक में जमा करें

न्यायालय ने कहा कि सरकार ने पीड़िता के परिवार के लिए मुआवजे की घोषणा की है लेकिन सम्भवतः वह उन्हें स्वीकार नहीं है क्योंकि परिवार के एक सदस्य ने कहा कि मुआवजा अब किसी काम का नहीं। फिरभी हम मुआवजे का प्रस्ताव परिवार को जल्द से जल्द दिया जाए और यदि वे लेने से इंकार करते हैं तो जिलाधिकारी किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज मिलने वाले खाते में इसे जमा कर दें, जिसके उपयोग के बारे में हम आगे निर्देश दे सकते हैं।



The High Court admitted that the family's rights violated in the funeral case



सोमवार, 12 अक्टूबर 2020

संबित पात्रा ने यूपी के हाथरस में हुए दुष्कर्म के पीछे चीन और पाकिस्तान को जिम्मेदार बताया? जानिए वायरल मैसेज की सच्चाई

संबित पात्रा ने यूपी के हाथरस में हुए दुष्कर्म के पीछे चीन और पाकिस्तान को जिम्मेदार बताया? जानिए वायरल मैसेज की सच्चाई

संबित पात्रा ने यूपी के हाथरस में हुए दुष्कर्म के पीछे चीन और पाकिस्तान को जिम्मेदार बताया? जानिए वायरल मैसेज की सच्चाई

क्या हो रहा वायरल : सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि भाजपा नेता संबित पात्रा ने हाथरस दुष्कर्म केस के पीछे चीन और पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है।

और सच क्या है ?

  • अलग-अलग की वर्ड सर्च करने से भी इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली जिससे पुष्टि होती हो कि संबित पात्रा ने ऐसा कोई बयान लिया है।
  • पड़ताल के दौरान ही हमें ‘आज तक’ चैनल की एक रिपोर्ट मिली। जिसमें संबित पात्रा से हाथरस केस पर कोई ट्वीट न करने और चुप रहने की वजह पूछी गई है।
  • पत्रकार के सवाल के जवाब में संबित पात्रा ने कहा : बलात्कार जैसे गंभीर विषय पर ट्वीट कर देना या अपनी संवेदना व्यक्त कर देनी ही अंतिम पढ़ाव नहीं होता।
  • इन सबसे स्पष्ट है कि संबित पात्रा ने अपने किसी बयान में हाथरस मामले के पीछे पाकिस्तान और चीन को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।


Fact Check: Sambit Patra said - China and Pakistan's hand behind the Hatharas incident? Know the truth of viral messages



गुरुवार, 10 सितंबर 2020

सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित केस में यूपी टॉप, बिहार दूसरे स्थान पर; राज्यों के हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट

सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित केस में यूपी टॉप, बिहार दूसरे स्थान पर; राज्यों के हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट

सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित केस में यूपी टॉप
देश भर में विधायक और सांसदों के खिलाफ 4442 आपराधिक मामले स्पेशल कोर्ट में लम्बित हैं। राज्यों के हाईकोर्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए ब्योरे से यह बात सामने आई है। ऐसे सबसे ज्यादा मामले यूपी (उत्तरप्रदेश) के हैं। यहां 446 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 1217 मामले लंबित हैं। दूसरे नंबर पर बिहार है। यहां 256 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 531 मामले लंबित हैं।
भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट मित्र सीनियर एडवोकेट विजय हंसारिया ने इस बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की। रिपोर्ट के अनुसार देश के 2556 विधायक आपराधिक मामलों में आरोपी हैं।
इनमें से कई तो एक से ज्यादा आपराधिक केस के अभियुक्त हैं। कानून बनाने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ करीब 413 ऐसे मामले हैं, जिनमें अधिकतम सजा उम्रकैद है। ऐसे 174 मामले अभी वर्तमान एमएलए व सांसदों के खिलाफ लम्बित हैं।
ये है राज्यों का ब्योरा ...
  • उत्तरप्रदेश में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 1217 मामले निचली अदालतों में लम्बित हैं। ये 446 वर्तमान विधायक व पार्षदों के खिलाफ हैं।
  • बिहार में ऐसे 531 लम्बित मामलों में 256 आपराधिक मामले सिटिंग एमएलए व एमएलसी के खिलाफ हैं।
  • तमिलनाडु में 324, महाराष्ट्र में 330 व ओडिसा में 331 आपराधिक मामले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार लम्बित पड़े आपराधिक मामलों में अधिकांश भ्रष्टाचार, मनी लाउंड्रिंग, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने आदि को लेकर दर्ज हुए हैं। इनमें से कई मामलों पर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से रोक भी लगी हुई है।
सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित केस में यूपी टॉप
फाइल फोटो



शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

यूजी-पीजी की परीक्षाएं अब ओपन बुक सिस्टम से होंगी, कल तक भरे जाएंगे फाॅर्म

यूजी-पीजी की परीक्षाएं अब ओपन बुक सिस्टम से होंगी, कल तक भरे जाएंगे फाॅर्म

यूजी-पीजी की परीक्षाएं अब ओपन बुक सिस्टम से होंगी, कल तक भरे जाएंगे फाॅर्म
कोरोना संक्रमण काल में स्नातक (यूजी) एवं स्नातकोत्तर (पीजी) अंतिम वर्ष की मुख्य परीक्षाएं कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने ओपन बुक सिस्टम लागू किया है। नई व्यवस्था में परीक्षार्थी अपनी लॉग इन से प्रश्न- पत्र को ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे तथा कॉपियां घर बैठकर लिख सकेंगे। इसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं को कॉलेज केंद्र पर जमा कराना होगा। इस प्रकार से बदली हुई व्यवस्था में जिले के करीब साढ़े हजार से अधिक छात्र- छात्राएं अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में शामिल हाेंगे।
यहां बता दें एक सितंबर से ओपन बुक सिस्टम से बीए, बीएससी, बीकॉम और एमए, एमकॉम, एमएससी अंतिम वर्ष के छात्र- छात्राएं घर बैठकर परीक्षा देंगे। इस परीक्षा के लिए 22 अगस्त तक आवेदन किए जा सकते हैं। हालांकि 22 अगस्त को अवकाश होने से कार्यालय बंद रहेंगे इसलिए यह महत्वपूर्ण कार्य छात्र- छात्राओं को एक दिन पहले 21 अगस्त को ही निपटा लेना चाहिए।
उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा है कि एक सितंबर से शुरू होने वाली परीक्षाओं के लिए परीक्षार्थी अपने लॉगइन से परीक्षा शुरू होने से 15 मिनट पहले प्रश्न- पत्र डाउन लोड कर सकेंगे। इसके लिए परीक्षा फार्म भरने के साथ ही छात्रों को स्टूडेंट इनफॉर्मेशन सिस्टम (एसआईएस) पर लॉग इन करना होगा। जहां से उन्हें पेपर डाउनलोड करने के लिए आईडी व पासवर्ड प्राप्त होगा।
छात्र- छात्राएं घर पर रहकर ही देंगे तीन घंटे की परीक्षा शासकीय एमजेएस महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनूप श्रीवास्तव के अनुसार ओपन बुक सिस्टम की परीक्षा में छात्र- छात्राएं प्रश्न- पत्र डाउन लोड करने के बाद प्रश्नों के उत्तर ए- 4 साइज पेपर पर घर बैठकर ही लिखेंगे। तीन घंटे की समय सीमा के बाद परीक्षार्थी को अपनी यह उत्तर पुस्तिका संबंधित महाविद्यालय केंद्र पर 30 मिनट की अवधि में जमा कराना होगी। इन कॉपियों को मूल्यांकन के लिए जीवाजी यूनिवर्सिटी भेजा जाएगा। जहां से मूल्यांकन के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा।
मोबाइल पर लिंक भेजी गई है, पंजीयन जल्दी ही करा लें
शासकीय कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य सुधीर दीक्षित के अनुसार जिन बच्चों ने परीक्षा फार्म भरे थे, उन सभी के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर रजिस्ट्रेशन लिंक भेजी गई है। जिससे वे रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। पासवर्ड उन्हें रखना है ताकि परीक्षा वाले रोज प्रश्न- पत्र डाउन लोड कर सकें।
नियमित, प्राइवेट, एटीकेट सभी स्टूडेंट्स को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। परीक्षा प्रभारी प्रो. राजेश भदौरिया ने बताया रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले छात्र- छात्राएं परीक्षा और परिणाम से वंचित हो जाएंगे। छात्र- छात्राएं अपने जन्म दिनांक और नामांकन से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
दस्तावेजों का सत्यापन 21 और 28 तक
सरकारी कॉलेजों में नए शिक्षण सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रथम चरण के प्रवेश के लिए आरक्षित वर्ग के छात्र- यात्राओं को दस्तावेजों के सत्यापन का कार्य चल रहा है। यूजी के लिए 21 अगस्त और पीजी के लिए 28 अगस्त तक दस्तावेजों के सत्यापन होगा। यूजी की प्रवेश सूची 28 अगस्त व पीजी की 4 सितंबर को जारी होने के बाद कॉलेज स्तर की कमेटी एक बार फिर योग्यता, जाति, आय प्रमाण पत्रों का सत्यापन करेंगी। ताकि फर्जी दस्तावेज से कोई प्रवेश न ले सके। आरक्षित वर्ग को शासन से छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है।

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यूजी-पीजी की परीक्षाएं अब ओपन बुक सिस्टम से होंगी, कल तक भरे जाएंगे फाॅर्म
एमजेएस कॉलेज में प्रवेश के लिए दस्तावेज सत्यापन कराते विद्यार्थी।



मंगलवार, 16 जून 2020

अब तीसरी अनामिका बबली यादव गिरफ्तार,अलीगढ़ में नौकरी के लिए 3 लाख दिए थे

अब तीसरी अनामिका बबली यादव गिरफ्तार,अलीगढ़ में नौकरी के लिए 3 लाख दिए थे


उत्तर प्रदेश के चर्चित अनामिका शुक्ला शिक्षक मामले में एक और अनामिका सामने आई है। इसका असली नाम बबली यादव है, जो कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में फर्जी तरीके से नौकरी कर रही थी। उसे अलीगढ़ से पकड़ा गया है।
इस बीच, कई लोगों को केजीबीवी में शिक्षकों के रूप में काम करने के लिए “प्रीति यादव’ नाम और दस्तावेजों का उपयोग करते हुए पाया गया है। अनामिका बनकर नौकरी कर रही बबली गिरफ्तार होने वाली तीसरी महिला है। इस घोटाले में अब तक 25 ऐसी महिलाएं सामने आ चुकी हैं, जिनके नाम अनामिका हैं।
पहली अनामिका के रूप में सुप्रिया को कासगंज से 6 जून को गिरफ्तार किया गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद बबली का खुलासा हुआ। उसके साथ ही सरिता यादव सामने आई, जो प्रयागराज में पदस्थ थी। बबली ने खुलासा किया कि उसने पुष्पेंद्र यादव नाम के शख्स को अलीगढ़ में नौकरी पर लगवाने के लिए तीन लाख रुपए दिए थे।



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेषाधिकार का प्रयोग कर काेमा में पड़े व्यक्ति की पत्नी काे बनाया संपत्ति का संरक्षक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेषाधिकार का प्रयोग कर काेमा में पड़े व्यक्ति की पत्नी काे बनाया संपत्ति का संरक्षक


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए एक महिला को उसके डेढ़ साल से काेमा में पड़े पति का संरक्षक नियुक्त किया है। अभी तक देश में इसके लिए कोई कानून नहीं है और हाईकोर्ट ने अनुच्छेट 226 के तहत अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह फैसला दिया है।
पति सुनील कुमार मित्तल के इलाज के लिए पत्नी उमा मित्तल ने अपने पति के बैंक खातों के संचालन और उनकी संपत्ति बेचने का अधिकार हाईकोर्ट से मांगा था। जस्टिस शशिकांत गुप्ता और एस एस शमशेरी की बेंच ने प्रयागराज की उमा मित्तल व अन्य की याचिका पर कहा है कि उनको अचल संपत्ति बेचने के लिए पहले महानिबंधक से अनुमति लेनी होगी, लेकिन वह मकान खाली कराने या किराये पर उठाने के लिए अधिकृत हैं। साथ ही परिवार हित में खर्च की छूट होगी और उनकाे पति की तरफ से निर्णय लेने और दस्तखत करने का अधिकार होगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट (फाइल फोटो)



शुक्रवार, 8 मई 2020

अध्यापकों को कोविड-19 से बचाव के लिए सुरक्षा संबंधी उपकरण उपलब्ध नहीं करवाए गए, डीईअाे काे साैंपा ज्ञापन

अध्यापकों को कोविड-19 से बचाव के लिए सुरक्षा संबंधी उपकरण उपलब्ध नहीं करवाए गए, डीईअाे काे साैंपा ज्ञापन

अध्यापकों को कोविड-19 से बचाव के लिए सुरक्षा संबंधी उपकरण उपलब्ध नहीं करवाए गए, डीईअाे काे साैंपा ज्ञापन
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी उमा शर्मा काे स्कूल शिक्षा विभाग प्रधान सचिव के नाम ज्ञापन साैंपा। इस दाैरान जिला प्रधान बृजमोहन ने बताया कि कोविड-19 विश्वव्यापी महामारी एवं लाॅकडाउन के चलते हरियाणा के 70-80 हजार अध्यापक पिछले 45 दिनों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकार व विभाग अध्यापकों की सहनशीलता एवं महामारी की आड़ का दुरुपयोग कर रहा है। बार-बार शिक्षा मंत्री व विभाग के उच्च अधिकारियों से आग्रह करने के बावजूद अध्यापकों को सुरक्षा संबंधी उपकरण जैसे कि पीपीई किट, मास्क, सेनिटाइजर, दस्ताने उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं। जिला कोषाध्यक्ष सतनाम सिंह और जिला प्रेस सचिव लाभ सिंह ने कहा कि चाहे अनाज मंडी में अनाज खरीदने की ड्यूटी हो अथवा ऑनलाइन परिवार पहचान पत्र बनाने हों, किसी भी ड्यूटी के लिए सहयोगी व्यक्ति, सामग्री एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध नहीं है।
जिला सचिव अशोक कुमार सैनी ने 1987 पीटीआई की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने, सर्वे में साहा खंड के अध्यापकों की ड्यूटी साहा में ही लगाने, पंजाबी प्राध्यापकों सहित सभी पदोन्नति सूचियां जारी करने, मिड-डे मील वर्कर्स की माह अप्रैल और मई का वेतनमान देने का आदेश तुरंत जारी करने, बीएलओ का मानदेय शीघ्र देने और गेस्ट अध्यापकों के देय एरियर के शीघ्र भुगतान का पत्र जारी करे। अन्यथा संगठन आगामी रणनीति बनाकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। साहा खंड प्रधान ओमप्रकाश और वित्त सचिव साहा जसवंत सिंह शामिल रहे।
सिटी में डीईअाे काे ज्ञापन देते हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के सदस्य।



सोमवार, 23 मार्च 2020

गोरखपुर में बच्ची नाम कोरोना रखा, परिजन बोले- कोरोनावायरस ने हमें अच्छी आदतें अपनाने को मजबूर किया, ये हमें प्रेरित करेगी

गोरखपुर में बच्ची नाम कोरोना रखा, परिजन बोले- कोरोनावायरस ने हमें अच्छी आदतें अपनाने को मजबूर किया, ये हमें प्रेरित करेगी


गोरखपुर.जनता कर्फ्यू के बीच जिला अस्पताल में एक बच्ची ने जन्म लिया है। परिजनों ने उसका नाम ‘कोरोना’ रखा है। कोरोनावायरस का पूरी दुनिया में आतंक है? इस सवाल पर नवजात बच्ची के चाचा ने कहा- इस कोरोनावायरस की वजह से हर व्यक्ति हाथ धोने, सफाई रखनेऔर मास्क लगानेजैसी अच्छी आदतों के लिए मजबूर किया है, लेकिन यह बच्ची हमें हमेशाअच्छी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करती रहेगी।

उन्होंने बताया कि इस वायरस की वजहसेपूरी दुनिया एकजुट भी हुई है। बच्ची का इससे अच्छा कोई और नाम नहीं हो सकता है।दरअसल,कौड़ीराम कस्बे के सोहगौरा गांव के रहने वाले बबलू त्रिपाठी की पत्नी रागिनी त्रिपाठी को रविवार सुबह जनता कर्फ्यू के बीच प्रसव पीड़ा शुरु हुई।

Uuपेशे से इंजीनियर देवर नीतेश राम त्रिपाठी ने भाभी रागिनी को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया।



बच्ची का जन्म रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान हुआ।



शुक्रवार, 20 मार्च 2020

दरिंदों को फांसी की हर अपडेट लेते रहे परिजन; गांव में जश्न का माहौल; लोगों ने जताई खुशी

दरिंदों को फांसी की हर अपडेट लेते रहे परिजन; गांव में जश्न का माहौल; लोगों ने जताई खुशी


बलिया. निर्भया के चारों दरिंदों अक्षय, मुकेश, विनय व पवन को शुक्रवार तड़के 5.30 बजेतिहाड़ जेल में फांसी दी गई। सात सालों से निर्भया के परिजनों के साथ पूरा देश न्याय का इंतजार कर रहा था। फांसी से पहले दैनिक भास्कर निर्भया के गांव मेडौला कलां पहुंचा। ये गांव जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर है। सुबह करीब पांच बजे जब हम निर्भया के गांव पहुंचे तो सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। इक्का-दुक्का लोग ही दिखाई दे रहे हैं। निर्भया के गांव के पास ही दो युवक मोनू और हरिओममिले। हरिओम ने इस दिन का निर्भया के गांव ही नहीं पूरे बलिया और पूरे देश को था।

दिसंबर 2012 के बाद से आसपास के इलाकों में यह गांव निर्भया के गांव के नाम से जाना जाता है। 16 दिसंबर को इस गांव की बेटी निर्भया के साथ दिल्ली में दरिंदगी हुई थी। दरिंदों को फांसी दिए जाने से पूरे गांव में जश्न का माहौल है। निर्भया के गांव के विरेंद्र कहते हैं आज का दिन बहुत खुशी का दिन है। इस फांसी से पूरे गांव को खुशी मिली है।

16-17 साल की थी, तब निर्भया गांव आई थी

निर्भया के चाचा सुरेश सिंह ने बताया कि निर्भया के पिता शादी के बाद ही करीब 25 से 27 साल पहले दिल्ली शिफ्ट हो गए। वहां वह कुकर बनाने की कंपनी में पहले काम करते थे। उनके सभी बच्चे दिल्ली ही रहते हैं। निर्भया आखिरी बार जब 16-17 साल की थी, तब गांव आई थी। निर्भया के मामले में वह कहते हैं कि बिटिया को इंसाफ मिलने में बहुत देरी हुई। कोर्ट के फैसले पर खुशी तो है, लेकिन हैदराबाद में जिस तरह पुलिस ने काम किया, वैसा हो तो ज्यादा खुशी होती। निर्भया के चचेरे दादा शिवमोहन कहते हैं कि न्याय मिलने में देरी हुई है। इसलिए देश में दरिंदो की संख्या बढ़ गई है। तुरंत इंसाफ मिलना चाहिए।


निर्भया के गांव में रात भर फांसी का इंतजार करते रहे ग्रामीण।



पवन के लगाए दाग साफ करना चाहते हैं ग्रामीण, परिवार आज भी मानता है निर्दोष

पवन के लगाए दाग साफ करना चाहते हैं ग्रामीण, परिवार आज भी मानता है निर्दोष


बस्ती(उत्तर प्रदेश). उत्तर प्रदेश के बस्तीजिलेसे 20 किमी दूर जगन्नाथपुर गांव है। साल 2012 के बाद यह गांव उस समय चर्चा में आया जब इस गांव केपवन गुप्ता ने दिल्ली में निर्भया के साथ ज्यादती की। पवन के जीवन के आखिरी रात से पहले इस गांव में सन्नाटा छाया रहा। अल सुबह जब भास्कर इस गांव में दोबारा पहुंचा तो गांव के लोग टीवी देखते नजर आए। कुछ लोग अपने मोबाइल पर फांसी की लाइव कवरेज देख रहे थे।

बस्ती से 20 किमी दूर है गांव

रास्ते में मनोरमा नदी है,जिस पर पुल बन रहा है। यहां से गांव तक डेढ़ किमी पैदल चलना पड़ता है। गांव में करीब 2200 मतदाता हैं। ज्यादातर लोग निषाद व मल्लाह बिरादरी से हैं। अन्य जातियों से भी तालुक रखने वालों का भी गांव में घर है। गांव में दाखिल होने पर एक गली मिलती है, जिसके मोड़ पर छोटी सी दुकान है। जहां कैमरा देखते ही बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं व युवकों की भीड़ लग गई। पवन को भले ही फांसी हो गई हो, लेकिन आज भी उसके संगी साथी उसे निर्दोष मानते हैं। पवन के वकील रहे एपी सिंह का नाम तो हर किसी जुबान पर है। सबने एक स्वर में वकील के प्रयासों की सराहना की। फांसी का मामला खासकर युवतियों व महिलाओं में चर्चा का विषय बना हुआ है।

15 साल पहले दिल्ली जाकर बस गया था परिवार

पवन का परिवार 15 साल पहले अपना घर बेचकर दिल्ली चला गया था। परिवार में माता-पिता, छोटा भाई व दो बहनें हैं। निर्भया कांड के बाद पवन की एक बहन की मौत हो गई थी। पवन के पिता निर्भया कांड से पहले गांव आते रहते थे। उन्होंने महादेवा चौराहे के पास घर बनवाना शुरू किया था। लेकिन, निर्भया कांड के बाद निर्माण ठप हो गया। इसके बाद वे दोबारा लौटकर नहीं आए। गांव में अब पटीदार रहते हैं। पवन के गांव के राम जनम व पड़ोसी उमेश ने कहा- पवन ने कक्षा छह तक लालगंज में द्वारिका प्रसाद चौधरी इंटर कॉलेज में पढ़ाई की थी। वह क्रिकेट खेलने का शौकीन था।

एपी सिंह एक अच्छे वकील, उन्होंने बचाने का पूरा प्रयास किया

गांव के तमाम युवक मोबाइल पर फांसी से जुड़ी जानकारियों को देखते नजर आए। उनसे बातचीत शुरु हुई तो सभी ने एक स्वर ने फांसी की सजा को गलत ठहराया है। कहा- कोर्ट को फांसी की सजा नहीं देना चाहिए था। क्या इसके बाद दुष्कर्म रुक जाएंगे? हम उस बेटी का भी दर्द समझते हैं, लेकिन फांसी नहीं होनी चाहिए थी। वह हमारे गांव का लड़का था। वकील एपी सिंह ने एक अच्छे वकील हैं, जो उन्होंने अब तक बचाए रखा। इसके पीछे कोई चमत्कार भी था।गांव वाले इस आस में भी है कि शायद सुबह कोई चमत्कार हो जाये और फांसी रुक जाए।



गांव में छाया सन्नाटा।


बदायूं के नाबालिग दोषी का अब कोई नामलेवा नहीं; मां बोली- मेरे घर में उसके लिए कोई जगह नहीं

बदायूं के नाबालिग दोषी का अब कोई नामलेवा नहीं; मां बोली- मेरे घर में उसके लिए कोई जगह नहीं

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बदायूं. सात साल पहले दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा निर्भया के साथ हुई हैवानियत ने पूरे देश को झकझोर दिया था। शुक्रवार तड़के निर्भया के चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में उनकी मौत होने जाने तक फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। इस दरिंदगी में उत्तर प्रदेश के बदायूं का रहने वाला एक नाबालिगभी शामिल था। इसलिए कोर्ट ने उसे बाल सुधार गृह भेज दिया था। जहां से वह दिसंबर 2015 में छूटा। लेकिन, गांव नहीं पहुंचा। कहां गया? उसके परिवार ने भी जानने की कोशिश नहीं की। गांव में भी उसका कोई नाम नहीं लेना चाहता है। उसकी मां कहती है- मेरे लिए मर तो उसी दिन गया था, जब उसने यह बुरा काम किया था।
...जब लाठी डंडा लेकर गांव के बाहर बैठ गए थे गांव वाले

बदायूं जिला मुख्यालय के करीब 54 किलोमीटर दूर नाबालिग का गांव है। गांव में घुसते ही मंदिर है। इसके पश्चिम दिशा की ओर गांव के आखिरी छोर पर झोपड़ीनुमा बना कच्चा घर बना है। जब साल 2015 में नाबालिगबाल सुधार गृह से रिहा हुआ तो पता चला कि वह गांव आने वाला है। लोग लाठी-डंडा लेकर गांव के बाहर बैठ गए थे। तब लोगों ने कहा था- उसके कारण बदायूं का नाम पूरे देश में बदनाम हुआ है। यहां के लोगों को समाज में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। लेकिन, नाबालिग दोषी गांव नहीं लौटा। परिस्थितियां आज भी वैसी ही हैं। गांव वाले उसका नाम तक लेना पसंद नहीं करते हैं।

मां ने कहा- अब मेरे घर में उसकी कोई जगह नहीं

नाबालिग दोषी 11 साल का था, जब उसे गांव वाले काम दिलाने के लिए दिल्ली ले गए थे। परिवार में माता-पिता हैं। पिता मानसिक रूप से कमजोर हैं। बड़ी बहन थी, उसकी गांववालों ने मिलकर उसकी शादी करा दी। मां कभी दूसरे के खेतों में काम करती है तो कभी दूसरे के जानवरों का देखभाल। इससे जो भी कमा पाती है, उससे परिवार का भरण पोषण कर रही है। मांकहती है- मैंने उसे इस उम्मीद से भेजा था कि, वह घर की माली हालत को सुधारेगा। लेकिन, बुरी संगत में पड़कर उसने ऐसा काम किया कि हम किसी को मुंह दिखाने के लिए लायक नहीं बचे। उसने जो किया है, उसके बाद मेरे घर में उसके लिए कोई जगह नहीं है।

बाहर वालों के आने से गांव के लोग नाराज, मगर मदद भी करते हैं

दोषी की मां ने कहा- 'जो भी बाहर से आता है, वह सिर्फ बेटे के बारे में पूछता है। बाहरवालों के आने से गांव वाले भी नाराज होते हैं। हमारी और गांव की बेइज्जती होती है। सब लोग हमें हिकारत भरी नजरों से देखते हैं। हालांकि, जरूरत पड़ने पर गांव वाले ही मदद के लिए आगे आते हैं। उन्हीं के खेतों पर काम करके परिवार को पाल रही हूं।'



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रविवार, 9 फ़रवरी 2020

एक दिन परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पाण्डेय के माता-पिता के साथ, मां बोलीं- सपना अधूरा रह गया, काश मनोज के साथ यहां आ पाती

एक दिन परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पाण्डेय के माता-पिता के साथ, मां बोलीं- सपना अधूरा रह गया, काश मनोज के साथ यहां आ पाती

एक दिन परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पाण्डेय के माता-पिता के साथ, मां बोलीं- सपना अधूरा रह गया, काश मनोज के साथ यहां आ पाती
लखनऊ. "मैं इतना इमोशनल तो नहीं हूं, पर मैं आपसे मिलकर बहुत इमोशनल हो गया. ये मेरे लिए बहुत गौरव की बात है कि आपसे इस डिफेंस एक्सपो में मुलाकात हुई।’ अर्नब चटर्जी चौंकते हुए बोले। उनके सामने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पाण्डेय के पिता गोपीचंद पाण्डेय और मां मोहिनी खड़ी थीं। अर्नब कैप्टन मनोज पाण्डेय के प्लाटून के साथी रहे हैं। कैप्टन मनोज पाण्डेय के माता-पिता हमारे साथ डिफेंस एक्सपो की सैर पर थे।






डिफेंस एक्सपो में दाखिल होते ही मिग-21 शान से खड़ा था। लोग उसके अगल-बगल, आगे-पीछे खड़े होकर फोटो खिंचा रहे थे। तब शहीद कैप्टन मनोज पाण्डेय की मां मोहिनी को उनके बीच के दो जवान याद आ गए। मोहिनी कहती हैं- ‘मनोज के दो साथी थे चेतन और मयूर मयंक। दोनों जगुवार से अंबाला से उड़े थे। एक ही जहाज में दोनों थे और वह पहाड़ियों में कहीं क्रैश हो गया था। दोनों ही शहीद हो गए थे। उसमें से एक बच्चा तो कन्नौज का था। दोनों मनोज के जूनियर थे। मयूर को तो बेस्ट पायलट का अवार्ड भी मिला था। अभी 2002 की ही तो बात है।’






थोड़ी दूर चलते ही चीता हेलिकॉप्टर देख कर दोनों रोमांचित हो उठे। बोले- ‘एनडीए के दौरान जब हम मनोज के पास जाते थे तो ऐसे ही वहां भी डेमो वगैरह खड़े रहते थे। हम लोग निशान देख कर समझ जाते हैं कि वह कौन सा हथियार है। पिता गोपीचंद्र ने बताया कि मनोज ने मां को हेलीकाॅप्टर में बिठाया भी था। तोपों को देख कर मां बोलीं कि ‘आपलोगों को लगता होगा कि यह बहुत धीरे चलता है। लेकिन हम लोगों ने देखा है यह बहुत तेज भागता है। इसको इसी तरह से डिजाइन किया गया है। हम लोग अभी 15 जनवरी को सेना दिवस पर दिल्ली गए थे। हमें सेना से बुलावा आया था। वहां हमने इन तोपों को चलते हुए देखा। ये तो पहाड़ियों पर भी चढ़ जाती हैं।’
गोपीचंद्र कहते हैं कि ‘मनोज कभी हम लोगों से आर्मी की बात नहीं करता था। न ही कभी बताता था कि कौन सी गन लेकर चलता है... वहां क्या-क्या करता है... घर पर आकर टीशर्ट और हाफ पेंट में बच्चों में रम जाता था। वह बचपन से ही पढ़ने में होशियार था। सैनिक स्कूल में पहुंचने पर उसके मन में सिर्फ और सिर्फ सेना में जाने का मकसद था, जिसे उसने पूरा किया।’






हम आगे बढ़ रहे थे कि अचानक से एक सूटेड-बूटेड रौबदार व्यक्ति सामने से अपनी फैमिली के साथ आकर हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और अपना परिचय देते हुए बोला- मैं कर्नल आलोक... क्या आप कैप्टन मनोज पाण्डेय के माता-पिता हैं। हां में जवाब सुनते ही वह खुश हो गए और परिवार का हाल-चाल पूछने लगे और जाते हुए पूरा एक्सपो घुमने की ताकीद भी करते गए। इस दौरान मनोज की मां का हाथ अपने हाथों में पकड़े रहे जैसे उनकी अपनी मां हो। आगे बढ़ते ही मां मोहिनी कहती हैं कि ‘मेरा बेटा चला गया लेकिन ये सम्मान कमा कर गया है। हमें उस पर गर्व है।' वह कहने लगती हैं कि ‘मनोज ने अपने ओहदे का कभी फायदा नहीं उठाया। भीड़ की वजह से हमें जैसे अभी बताना पड़ा ना कि हम कैप्टन मनोज पाण्डेय के माता-पिता हैं, लेकिन अगर मनोज होते तो वह यहां से वापस लौट गए होते, लेकिन अपना परिचय नहीं देते। वह नहीं चाहते थे कि उनकी वजह से किसी आम आदमी को तकलीफ हो या उसे किसी हीन भावना से ग्रसित होना पड़े। वह कहते थे कि सेना का कार्ड बड़ी मुश्किल से मिलता है। और उससे भी बड़ी बात यह कि सबको नहीं मिलता है। इसका सम्मान रखना चाहिए।’
ग्राउंड का लंबा चक्कर लगाते हुए हम लोग हॉल नंबर-4 में पहुंचे, जहां सेना की वर्दी पहने एक पुतला खड़ा था। मां मोहिनी उसे एक टक निहारती रहीं, फिर नम आंखों से कहती हैं ‘बेटे को वर्दी में देखने का सपना था जो अब ताउम्र नहीं पूरा हो सकेगा। वह जब घर आता तो कभी वर्दी नहीं पहनता। न ही वहां की बातें ही बताता। अभी कई सपने थे। बच्चे की शादी होनी थी। उसके बच्चे देखने थे। सब ख्वाहिशें अधूरी रह गईं।’






हम उस वक्त सुंदरम इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के स्टाल पर खड़े थे, जहां मनोज के छोटे भाई मनमोहन के कलीग भी खड़े थे। उन्होंने स्टाल के मालिक अर्नब से परिचय कराया तो अर्नब भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वह और मनोज दोनों एक ही प्लाटून के साथ थे। मनोज सीनियर थे। मुझे नहीं मालूम था कि मैं आपसे कभी मिल पाऊंगा। यह मेरे लिए गौरव की बात है। मैं आपके साथ एक पिक्चर लेना चाहता हूं। इस बातचीत के दौरान मनोज के माता-पिता की आंखें भी नम हो रही थीं।






एक स्टॉल पर बंदूक देख गोपीचंद्र कहते हैं कि ‘घर में सिक्यूरिटी रीजन की वजह से बंदूक तो है, पर कभी चलाई नहीं। न ही कभी शौक रहा। दिल्ली के प्रगति मैदान का डिफेंस एक्सपो भी देखा है। सेना के कई कार्यक्रमों में शिरकत की, जहां बड़े-बड़े हथियारों की प्रदर्शनी देखी। पर हर बार सोचता हूं कि मनोज के साथ ऐसी जगहों पर घूमता तो मजा कुछ और होता। बेटा वर्दी में होता और हम उसके बगल में होते। पर दो साल की नौकरी में वह इतना कुछ कर गए कि जब तक सेना रहेगी मनोज का नाम भी रहेगा। बड़े-बड़े अधिकारी बोलते हैं कि मनोज होते तो जनरल की रैंक से रिटायर होते।’







परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पाण्डेय के पिता गोपीचंद पाण्डेय और मां मोहिनी।