मौसम में शुक्रवार शाम जैसे ही बदलाव हुआ। तेज बारिश के साथ ओले गिरे तो किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई। प्याज, तरबूज व अरबी की फसलों पर ओले गिरने से पौधे आड़े हो गए। दोबारा खड़े होना मुश्किल है। सभी किसानों के प्याज का रोपा चौपट हो गया। प्रत्येक किसान ने 50 हजार से 1 लाख रुपए का बीज बोया था। करीब 5 हजार रुपए किलो वाला बीज बोया था। प्याज को डेढ़ से दो महीने हो गए थे। अब ये पूरी तरह से खत्म हो गई। ओले गिरने से तरबूज, प्याज, अरबी व प्याज की नर्सरी पूरी तरह से खत्म हाे गई।
ओलावृष्टि के दौरान इतनी ठंड हवा चल रही थी कि घर से बाहर निकलना भी खतरे से कम नहीं था। बोरगांव के अलावा जामठी, पिपरहट्टी, राजोरा, धनोरा, डोंगरगांव, खिराला, इस्मलापुर और हेमगीर में भी एक जैसे हालात थे। इधर कुमठी, बांदरला, माकरला, पांचबा, रूस्तमपुर में मामूली बारिश हुई है। अब लोगों को शनिवार सुबह का इंतजार है। फिलहाल आसपास के गांवों में कई मकानों के टीन उड़ने व पेड़ गिरने की जानकारी मिली है। बोरगांव में दंदू पिता मांगीलाल असलकर के टीन उड़ गए व मकान क्षतिग्रस्त हो गया।
और इधर, ओलावृष्टि से खड़ी फसलों को नुकसान, आंधी से गिरा मकान
कोहदड़ | ओलावृष्टि से खड़ी फसलाें काे नुकसान हुआ है। शुक्रवार शाम गांव सहित बिहार, इटवामाल, छनेरा, पाडल्या और आसपास के क्षेत्र में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि हुई। इससे अरबी, प्याज, तरबूज, पपीता, गेहूं और खरबूजे की फसल को नुकसान हुआ है। अरबी के पत्ते जमीन बिछ गए। प्याज की फसल जमीन में आड़ी हो गई। किसान मुकेश तंवर, रामा पटेल, सुरेश पटेल, सुनील मालाकार, पुरुषोत्तम दशोरे, राहुल जोशी, दिनेश बारेला ने बताया ओलावृष्टि ने फसलों की जान ले ली। अब क्या होगा कुछ समझ नहीं आ रहा है। इधर आदिवासी टांडा अंबाघाट में हवा-आंधी से मकान गिर गया। इससे मकान के अंदर छोटी बच्ची कविता पिता सरका फंस गई। शोर मचाने पर मोहल्ले वालों ने बच्ची को बाहर निकाला। कविता के परिजन महाराष्ट्र मजदूरी करने गए हुए हैं।

0 coment rios:
Hi friends