- भिंड के भाजपा नेता की हत्या के 14 घंटे बाद डबरा में गोलीबारी,
- डबरा और भितरवार में 6 महीने में ऐसी 19 घटनाएं
ग्वालियर-चंबल अंचल में रेत के विवाद में फायरिंग और हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पुलिस-प्रशासन के तमाम दावों के बाद भी न तो अवैध खनन पर रोक लग पाई और न ही हमलों में कमी आई। भिंड में रेत के विवाद में भाजपा नेता रॉकी गुर्जर की हत्या के 14 घंटे बाद ही डबरा में ठेका कंपनी के कर्मचारियों पर रेत माफिया ने शुक्रवार की देर रात आधे घंटे तक फायरिंग की। पुलिस ने इस मामले में दो रेत माफिया पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया है। छह माह में इस तरह 19 घटनाएं अकेले डबरा- भितरवार में सामने आ चुकी हैं।
डबरा के बेलगाढ़ा मोड़ पर शुक्रवार की रात रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर जा रहे डबरा निवासी पूरन पचौरी और छोटा रावत को जब ठेका कंपनी के कर्मचारी विनय गुर्जर व अन्य ने रोका आैर ट्रैक्टर चालक से रायल्टी के बारे में पूछा तो उसके पास रसीद नहीं मिली। इस पर ठेका कर्मचारी रायल्टी कटवाने के लिए कहने लगे। इसी बात पर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। पूरन और छोटा रावत ने फायरिंग कर दी। गोली कंपनी के कर्मचारियों की कार में जाकर लगी। पुलिस ने विनय गुर्जर की शिकायत पर पूरन व छोटा के खिलाफ जान से मारने के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है।
गृहमंत्री जी! 11 माह में पुलिस पर जितने हमले, उससे दोगुने माफिया और कंपनी के बीच
गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पांच मार्च को पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अप्रैल 2020 से फरवरी 2021 तक पुलिस पर ग्वालियर-चंबल अंचल में कुल 24 हमले हुए हैं। जबकि इससे दोगुने हमले तो कंपनी और रेत माफिया के बीच हो चुके हैं।
इस तरह की घटनाएं तब से ज्यादा बढ़ गई हैं, जब से सिंध नदी पर वैध खदानें शुरू की गईं। चूंकि अब तक स्थानीय लोगों के पास खदानों का ठेका होता था तो रेत माफिया पुलिस की मिलीभगत से बगैर रॉयल्टी के ट्रैक्टर-ट्रॉली निकलवा लेते थे लेकिन अब कंपनी ने नाके बनाकर रॉयल्टी की जांच करवाई जा रही है। इससे रेत के विवाद में हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं।
रेत के विवाद में ये दो मुख्य कारण...
1. पहली बार ठेका तो लोग रायल्टी न देने पर अड़ते हैं, इससे विवाद की नौबत
डबरा-भितरवार, दतिया, भिंड में सिंध नदी पर पहली बार कंपनियों को ठेका दिया है। कंपनी 4 घनमीटर रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली से 3200- 5200 रुपए और डंपर से 8200 रुपए रायल्टी वसूलते हैं। ठेके से पहले यह रकम दबंगाें की जेब में जाती है। इसी को लेकर उनका कंपनी से विवाद होता है।
2. नेताओं को रॉयल्टी में छूट इसलिए सस्ते में बेचने पर भी विवाद
कुछ जगह दबंग और नेताओं को कंपनी ने रायल्टी में छूट दी है। इन प्रभावशाली लोगों के वाहन बगैर रायल्टी निकलते हैं। ऐसे में ये लोग बाजार में कम रेट में रेत उपलब्ध करा देते हैं। इससे रायल्टी चुकाने वालों को नुकसान होता है। इस कारण भी विवाद भी स्थिति बनती है।

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