शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर घने जंगल में बसा गुंजारा गांव सड़क मार्ग से सीधे महू से जुड़ गया है। यह संभव हुआ है 50 ग्रामीणों की कड़ी मेहनत से। उन्होंने पसीना बहाकर एक किमी पहाड़ काटकर यह रास्ता बनाया। इसके बनने से गुंजारा की महू से दूरी मात्र 15 किलोमीटर रह गई। इसका फायदा गुंजारा से सटे सात गांवों को भी मिल रहा है। उनके पास ट्रेन के अलावा विकल्प के रूप में यह मार्ग है।
यहां की आबादी महज 300 है। 15 साल पहले ग्रामीणों को महू जाने के लिए या तो ट्रेन का इंतजार करना पड़ता था या फिर 30 किलोमीटर घूमकर चोरल, सिमरोल होकर जाना पड़ता था। गांव की तत्कालीन सरपंच चंपा मावी ने इस पीड़ा को समझा और समाधान निकाला।
उन्होंने उप सरपंच हीरालाल यादव, 12 पंच में रामभरोसे, समुंदर सिंह कोहली, शिव दुबे, सुशीला बाई सहित 50 ग्रामीणों को एकत्रित किया, लेकिन रास्ते में आ रहे पेड़ों को लेकर वन विभाग ने आपत्ति ले ली। रास्ता बनाने के साथ पेड़ों को बचाना भी जरूरी था, इसलिए सड़क को थोड़ा घुमाकर बनाया। एक माह तक कड़ी मेहनत से पहाड़ काटकर कच्चा रास्ता तैयार किया।
- 50 किमी दूर घने जंगल में बसा गुंजारा सड़क मार्ग से सीधे महू से जुड़ गया। अब जाने में सुविधा रहती।
- 15 साल पहले लोगों को महू जाने ट्रेन का इंतजार करना पड़ता था या 30 किमी घूमकर सिमरोल होते हुए जाना पड़ता था।
महामारी में काम आया मार्ग.. लॉकडाउन में ट्रेनें बंद हुईं तो इसी रास्ते से बढ़ गया आवागमन
कालाकुंड, बरखेड़ा, गुंजारा आदि गांवों के लोग हर जरूरी सामान के लिए महू जाते हैं। लॉकडाउन में जब ट्रेनें बंद हुईं तो गांव वालों का इसी कच्चे रास्ते से महू आना-जाना बढ़ गया। अब पहाड़ों के बीच चोरल नदी किनारे बसे इन गांवों में ट्रैकिंग के लिए पहुंचने वाले सैकड़ों सैलानी भी इसी कच्चे रास्ते का उपयोग करते हैं।

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