भूमाफिया बॉबी छाबड़ा व उसके मैनेजर संदीप रमानी के खिलाफ 20 संस्थाओं में जमीन की धाेखाधड़ी के मामले में क्लीनचिट दिए जाने को लेकर सहकारिता विभाग के अफसरों ने अब चुप्पी साध ली है। मामला उजागर होने के तीन दिन बाद भी कोई यह बताने की स्थिति में नहीं है कि आखिर किसके आदेश से और किन आधारों पर बाॅबी व संदीप के खिलाफ केस खत्म किया गया।
कलेक्टर मनीष सिंह ने जरूर कहा है कि यदि बॉबी के खिलाफ केस खत्म करने में किसी अधिकारी की मिलीभगत पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी एफआईआर की जाएगी। पुलिस और सहकारिता अफसरों के बीच इस मामले में अभी भी विरोधाभास की स्थिति बनी हुई है।
अंकेक्षक ने ही बॉबी और संदीप की संलिप्तता से इनकार किया था
सहकारिता विभाग द्वारा जो एफआईआर दर्ज करवाई गई थी वह सारहीन थी। इसमें कोई आपराधिक तथ्य नहीं थे। सहकारिता विभाग ने जांच उपरांत थाना प्रभारी जो प्रतिवेदन दिया है। उसमें स्पष्ट लिखा है कि बॉबी छाबड़ा और संदीप रमानी की कोई संलिप्तता नहीं है। जिस कारण से थाना प्रभारी द्वारा उपरोक्त तथ्यों के आधार पर खात्मे की कार्रवाई की गई थी। इसमें पुलिस के पास सभी डाक्यूमेंट भी मौजूद हैं। - महेशचंद जैन, एसपी (पश्चिम)
इन सवालों के अब तक जवाब नहीं
- बॉबी और संदीप के खिलाफ दर्ज केस किस आधार पर खत्म किया गया।
- सहकारिता अफसरों ने वास्तव में कोई रिपोर्ट दी भी या नहीं।
- यदि सिर्फ बॉबी के वकील को सवालाें के जवाब दिए थे तो वे पुलिस तक कैसे पहुंचे और पुलिस ने उन्हें कैसे केस खत्म करने के लिए पर्याप्त आधार मान लिया।
- क्या पुलिस ओरिजिनल कॉपी और फोटोकॉपी में अंतर भी नहीं कर पाई। जैसा उसके अफसर दावा कर रहे हैं कि सहकारिता अफसरों ने पहले जिन्हें मूल दस्तावेज कहा था बाद में उन्हें ही फोटोकॉपी बता दिया।
- भूमाफियाओं के खिलाफ ऐसे और कितने मामले हैं, जिनमें दबे-छुपे खात्मा लगा दिया गया है।
भूमाफिया मद्दा की संपत्तियां ढूंढी, करेंगे कुर्क
इधर, जमीन धोखाधड़ी में फरार दीपक जैन उर्फ मद्दा, कमलेश जैन, दीपेश वोरा की संपत्तियों की जानकारी प्रशासन ने जुटा ली है। सभी फरार आरोपियों की संपत्ति कुर्क की जाएगी। कलेक्टर के अनुसार जो अवैध निर्माण मिलेंगे उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मद्दा के बारे में अन्य संस्थाओं में भी शिकायतें मिली हैैं।
(सीधी बात- मनीष सिंह, कलेक्टर )
बॉबी पर दर्ज केस किस आधार पर खत्म किया गया?
-यह कानूनी मामला है। डीआईजी ही बेहतर स्थिति बता सकेंगे।
बिना स्पष्ट जानकारी के केस खत्म करने में किसी की मिलीभगत का अंदेशा नहीं है?
-जमीन धोखाधड़ी के मामले खत्म कराने में सहकारिता अधिकारी की मिलीभगत या उनकी वजह से किसी आरोपी को मदद मिली तो उन्हें भी आरोपी मानकर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

0 coment rios:
Hi friends