सोमवार, 1 मार्च 2021

दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन:18 साल की मेहरून्निशा के लिवर में थी 12 सेमी लंबी डेढ़ किलो वजनी गठान, डाॅक्टरों ने बिना चीर-फाड़ के निकाली

दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन:18 साल की मेहरून्निशा के लिवर में थी 12 सेमी लंबी डेढ़ किलो वजनी गठान, डाॅक्टरों ने बिना चीर-फाड़ के निकाली

  •  आयुष्मान याेजना के कारण मरीज के परिजन काे एक रुपए भी नहीं देना पड़ा

मुरैना निवासी 18 साल की मेहरून्निशा... सीने में दर्द से परेशान थी। जांच में पता चला कि उसके लिवर में करीब 12 सेमी लंबी और 9 सेमी चौड़ी डेढ़ किलो वजनी हाइडेटिड सिस्ट की गठान है। आमताैर पर इस गठान को ओपन सर्जरी कर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया से गठान निकालने पर मरीज काे 20 टांके लगते और उसे तीन से चार सप्ताह अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। इस तरह से ऑपरेशन में यदि गठान का पानी लिवर में ही निकल जाता तो मरीज काे संक्रमण फैल जाता है और इससे उसकी जान खतरे में पड़ सकती है।

इस कारण जेएएच में सर्जरी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एमएम मुदगल ने दूरबीन पद्धति से मेहरून्निशा का ऑपरेशन किया। महज दो घंटे चले इस ऑपरेशन में न सिर्फ गठान को बाहर निकाल दिया बल्कि मरीज को तीसरे दिन डिस्चार्ज भी कर दिया। इस ऑपरेशन में मेहरून्निशा को महज तीन टांके लगाने पड़े। डॉ. मुदगल का दावा है कि ग्वालियर-चंबल संभाग में यह अपने तरह का पहला ऑपरेशन है। ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क किया गया।

क्या है हाइडेटिड सिस्ट की गठान
यह कीड़े की बीमारी है। इसका संक्रमण भेड़ या कुत्ते के संपर्क में आने से मनुष्य को हो जाता है। इस तरह की सिस्ट लिवर में हाेने पर सीने में बार-बार दर्द हाेता है और घबराहट महसूस हाेती है।

ओपन सर्जरी में खून बहता, संक्रमण फैलने का था खतरा
ओपन सर्जरी कर सिस्ट निकालने पर मरीज काे 20 टांके आते और काफी खून बहता और संक्रमण का खतरा था। इस कारण विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने मेरे नेतृत्व में डॉ. राकेश दरबार, डॉ. हरनी, डॉ. भार्गव परमार और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. सीमा शिंदे की टीम बनाई। हमने दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। इसमें तीन टांके लगाकर मरीज की सिस्ट लिवर से सावधानी पूर्वक बाहर निकाल ली।

यह ऑपरेशन इसलिए जोखिम भरा था कि सिस्ट से अगर पानी निकल जाता तो लिवर के साथ पूरे शरीर में इंफेक्शन फैल जाता, इससे मरीज की जान को खतरा हो सकता था। इस कारण सिस्ट का पानी पहले मशीनों की मदद से बाहर निकाला गया। इसके बाद सिस्ट को बाहर निकाला। मरीज अब पूरी तरह से ठीक है। ग्वालियर-चंबल संभाग में इस तरह का यह पहला ऑपरेशन जेएएच में हुआ है।
- जैसा जीआरएमसी में सर्जरी के एसोसिएट प्रो. डॉ. एमएम मुदगल ने बताया।

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