प्रशासन-ननि को इसकी खबर नहीं, एक भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा
रविवार सुबह 11.15 बजे। शहर का नागझिरी क्षेत्र। छुट्टी के दिन लोग घरों पर बैठे आराम कर रहे थे। अचानक जोरदार आवाज के साथ ऐतिहासिक परकोटे का बढ़ा हिस्सा ढह गया। परकोटे के साथ इससे लगे छह मकानों के पिछले हिस्से की दीवारें भी ढह गईं। तेज आवाज सुन लोग डर गए और परिवार सहित बाहर की ओर भागे। दहशत के कारण आधे घंटे तक लोग घर में नहीं गए। नागझिरी क्षेत्र में परकोटे का करीब 60 फीट लंबा हिस्सा रविवार सुबह ढह गया।
परकोटे की यहां चौड़ाई करीब 10 फीट और ऊंचाई 40 फीट से ज्यादा है। परकोटे के साथ छह मकानों की पिछली दीवार और मकान का कुछ हिस्सा भी गिर गया। तीन शताब्दी पुराना परकोटा जर्जर होकर खतरनाक हो चुका है। इसके ढहने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। परकोटा ढहने के बाद आसपास बने मकानों के निचले हिस्से में मिट्टी नजर आ रही है। ऐसे में मकान कभी भी ढह सकते हैं। हैरत यह रही कि रविवार सुबह परकोटे का बड़ा हिस्सा ढहने के बाद भी प्रशासन और नगर निगम को शाम तक इसकी भनक नहीं लगी। अफसरों से पूछने पर उन्होंने कहा जानकारी नहीं है, हम पता करते हैं ऐसा कोई हादसा हुआ है या नहीं।
दो दिन पहले ही परकोटा सरकने लगा था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया
हादसा अचानक नहीं हुआ। परकोटे का हिस्सा दो दिन पहले ही मकानों से अलग होने लगा था। परकोटे से लगकर यहां सैकड़ों मकान बने हुए हैं। अधिकांश मकानों का पिछला हिस्सा परकोटे से सटा हुआ है और यहां शौचालय बने हुए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया दो दिन पहले परकोटे की दीवार मकान से अलग होती दिख रही थी। लेकिन किसी को इसके ढहने का अंदेशा नहीं था। हादसे के बाद से सभी लोग दहशत में हैं।
जानकारी नहीं है, जांच करवाएंगे
^ परकोटे की दीवार गिरने की किसी तरह की जानकारी नहीं मिली है। कहीं हादसा हुआ है तो इसकी जांच कराएंगे। -काशीराम बड़ोले, एसडीएम बुरहानपुर
आधे घंटे गिरता रहा मलबा, दूसरे मकानों को भी खतरा
पहले बड़ा हिस्सा ढहने के बाद परकोटे का काफी हिस्सा आधे घंटे तक धीरे-धीरे गिरता रहा। इस कारण लोग इसके पास जाने से डरते रहे। हादसे के बाद अब आसपास के मकानों को भी खतरा हो गया है। चार मकानों के नीचे मिट्टी नजर आ रही है। इससे इनके धंसने का डर है। परकोटे से लगे नितिन भावसार, राजू भावसार, रमण भावसार, सूरज भावसार, श्याम वाकड़े और प्रभाकर भावसार के मकान को क्षति हुई है। नागझिरी के इस हिस्से में दो साल पहले भी परकोटे का बड़ा हिस्सा ढह गया था।
परकोटा है ऐतिहासिक धरोहर, रखरखाव नहीं
तीन शताब्दी पहले शहर की सुरक्षा के लिए बने परकोटे पर अतिक्रमण कर हजारों मकान बना लिए गए हैं। परकोटा पुराना होने और मरम्मत नहीं होने के कारण यह जर्जर होकर गिरने लगा है। परकोटा ऐतिहासिक धरोहर है, लेकिन इसके रखरखाव और मरम्मत की ओर किसी भी जिम्मेदार का ध्यान नहीं है।की करीब आठ किमी लंबे परकोटे के कुछ हिस्से पर ही रंगाई-पुताई कराई गई है।

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