- फरवरी में हर दिन औसतन 1900 की ही हुई जांच, पहले तीन से चार हजार की हो रही थी टेस्टिंग
कोरोना संक्रमण शहर में एक बार फिर बढ़ रहा है, लेकिन फरवरी माह में हर दिन औसतन केवल 1900 सैंपल की ही जांच हुई है। फीवर क्लिनिक जहां पर नि:शुल्क टेस्टिंग होती है, वहां कम संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और निजी लैब में महंगी दर 1200 रुपए होने के चलते लोग कम टेस्ट करा रहे हैं। मध्यप्रदेश में अक्टूबर 2020 में स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना टेस्ट की दरें कम कर 1200 रुपए तय की थीं।
रैपिड एंटीजन टेस्ट से कोविड-19 के संक्रमण की जांच दर 900 रुपए तय की है। यदि सैंपल मरीज के घर जाकर लिया जाता है तो इसमें 200 रुपए का अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है। अक्टूबर के बाद मध्यप्रदेश ने इन दरों को संशोधित नहीं किया है, जबकि कई राज्यों ने इसमें संशोधन कर दिया है।
इसकी एक वजह यह भी है कि सरकार खुद अब निजी लैब में सैंपल जांच के लिए नहीं भेज रही है, वह मेडिकल कॉलेजों में ही जांच करा रही है। इसके लिए सरकार को अलग से भुगतान नहीं करना है। पहले सरकार निजी लैब से जांच करा रही थी तो वह दर भी तय कर रही थी। अभी सबसे कम दर ओडिशा में है, जहां पर केवल 400 रुपए में कोरोना की जांच हो रही है।
कोरोना की आरटीपीसीआर जांच की दर
- दिल्ली- पहले 2400, अब 800 रुपए (घर से सैंपल लेने पर 1200)
- ओडिशा- पहले 1200 रुपए थी, अब 400 रुपए
- यूपी- 700 रुपए (घर से सैंपल लेने पर 900 रुपए)
- गुजरात- पहले 1500 थी, अब 800 हो गई (घर से सैंपल लेने पर 1100 रुपए)
- राजस्थान- 800 रुपए
- महाराष्ट्र- 980 रुपए (घर से सैंपल लेने पर 1800 रुपए)
- केरल- 2100 रुपए
- तेलंगाना में- 2200 रुपए
- पश्चिम बंगाल- 1500 रुपए।
- कर्नाटक- सरकार ने रैफर किया तो 800 और खुद जांच कराई तो 1200 (घर से सैंपल लेने पर 1600 रुपए)
- आंध्रप्रदेश- 750 रुपए
गाइडलाइन में हर जगह लग रही जांच रिपोर्ट
कोरोना संक्रमण एक बार फिर बढ़ने के बाद कई राज्यों ने अपने यहां आने वालों के पास 72 घंटे पुरानी कोरोना टेस्ट की आरटीपीसीआर रिपोर्ट होना जरूरी कर दिया है। ऐसे में जिनका बाहर जाना होता है, उन्हें तय समय की रिपोर्ट के लिए निजी लैब जाना होता है, जो उन्हें काफी महंगी पड़ती है।
अब फिर से शुरू कर रहे हैं कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग
संभागायुक्त डॉ. पवन शर्मा ने कम सैंपलिंग पर कहा फीवर क्लिनिक में लोग कम आ रहे हैं, लेकिन हमने फिर से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। किसी मरीज के पॉजिटिव आने पर उनके संपर्क में आने वालोें को फोन किए जा रहे हैं। सैंपल लिए जा रहे हैं, जिससे संक्रमण नहीं फैले। लोगों से अपील कर रहे हैं कि वह जांच में देरी नहीं करें। फीवर क्लिनिक पर जांच करा सकते हैं।

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