रविवार, 7 मार्च 2021

गलती तहसील की, भुगत रहा गरीब:डेढ़ लाख का लोन लिया, 24 साल में बन गया 5.17 करोड़ रु., नोटिस मिला तो आत्महत्या करने चला बुनकर, अधिकारी बोले - शून्य ज्यादा लग गया था


  • नोटिस देखते ही सुसाइड करने नेत्र अस्पताल की छत पर चढ़ा; पुलिस ने उतारा,

  • सहकारी बैंक ने डेढ़ लाख की ऋण वसूली के लिए तहसील के जरिए भिजवाया था नोटिस

गलती किसी और की और भुगत रहा एक साधारण व्यक्ति। ये मामला सरकारी मशीनरी की लापरवाही की नजीर है। एक व्यक्ति ने 24 साल पहले महज डेढ़ लाख रुपए लोन लिया। 24 साल तक नहीं चुकाने पर तहसील कार्यालय के माध्यम से बैंक ने करीब 5 करोड़ 11 लाख 71 हजार रुपए बकाया का नोटिस भेजा। घबराकर शख्स शनिवार को सरकारी नेत्र अस्पताल की छत पर आत्महत्या के उद्देश्य से चढ़ गया। काफी मशक्कत के बाद पुलिसकर्मियों ने उसे उतारा। अब प्रशासन अपनी गलती मान रहा है।

मामला कुछ यूं है कि वर्ष 1997 में लोहारमंडी के मोहम्मद इकबाल पिता खालिद ने कारोबार के लिए जिला सहकारी बैंक से डेढ़ लाख रुपए का लोन लिया था। पिछले 24 साल में उन्होंने बकाया नहीं चुकाया। ऐसे में बैंक ने लोन पर 13.5% ब्याज जोड़ना शुरू किया। डिफाॅल्टर की श्रेणी में अतिरिक्त 3% ब्याज भी शुरू किया। इस तरह 24 साल में उन पर कुल 51 लाख 17 हजार बकाया हो गया। एक साल पहले संपत्ति कुर्की के लिए प्रकरण तहसील कार्यालय में पहुंचा। तहसील कार्यालय से उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए सूचना पत्र भेजा गया।

इस साल दिए नोटिस ने उड़ा दिए होश

इस साल फिर 12 फरवरी को तहसील कार्यालय से पत्र भेजा गया। इसमें उन पर 5 करोड़ 11 लाख 71 हजार 23 रुपए बकाया बताया गया। पत्र देखकर इकबाल के होश उड़ गए। लोन चुकाने को लेकर परिवार में विवाद शुरू हो गए। इससे तनाव में आकर इकबाल घर छोड़ निकल आए।

हंगामे के बाद पुलिस ने इकबाल को उतार लिया। - Dainik Bhaskar
हंगामे के बाद पुलिस ने इकबाल को उतार लिया।

नेत्र अस्पताल में हंगामा

दोपहर करीब 3 बजे लालबाग रोड स्थित नेत्र अस्पताल की छत चढ़ गए। छत की बाउंड्रीवाॅल के बाहर एक पैर बाहर निकलाकर बैठ गए। यह देख आसपास के लोगों ने पूछा- क्या कर रहे हो, तो इकबाल ने कहा- मैं आत्महत्या करने आया हूं। सूझ-बूझ दिखाकर लोगों ने तुरंत लालबाग थाना पुलिस से संपर्क किया। मौके पर थाना प्रभारी एपी सिंह मौके पर पहुंचे। जवानों की मदद से इकबाल को उतारा।

हर साल बकाया जुड़ेगा

मामले में जिला सहकारी बैंक के मैनेजर यशवंत जोशी का कहना है कि 13.5% मूल ब्याज है। डिफाॅल्टर होने पर अतिरिक्त 3% ब्याज का प्रावधान है। जब तक रकम नहीं भरेंगे, यह हर साल जुड़ता जाएगा। यदि बकायादार ने बकाया राशि जमा नहीं की, तो उन पर बकाया हुआ होगा।

गलती से एक शून्य ज्यादा लग गया

मामले में तहसीलदार मुकेश काशिव का कहना है कि सूचना पत्र में गलती से एक शून्य ज्यादा लगा है। जिस वजह से रकम 5 करोड़ रुपए दिख रही है। वास्तविकता में उन पर सिर्फ 51.17 लाख रुपए बकाया है। एक साल से हम उन्हें पत्र भेज रहे हैं। यदि वह जवाब दे या आपत्ति ले, तो आगे कार्रवाई करेंगे।

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