कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच रविवार को हुए लॉकडाउन में सुखद एहसास हुआ। लोग घरों में रहे और सुबह से शाम तक सड़कों पर सिर्फ वही लोग या वाहन दिखे, जिन्हें प्रशासन ने अनुमति दी थी। हालांकि वाहनों और खाने-पीने का इंतजाम नहीं होने से एमपीपीएससी की परीक्षा के लिए भोपाल पहुंचे परीक्षार्थी परेशान होते रहे। नए शहर में रोक-टोक कम थी, लेकिन पुराने शहर में सख्ती रही, क्योंकि यहीं संक्रमण के नए केस ज्यादा हैं और पिछली बार लॉकडाउन उल्लंघन के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए थे।
- 1260 लोगों का दो दिन में चालान कटा मास्क नहीं लगाने पर।
- 1.32 लाख रुपए इनसे जुर्माना वसूला गया।
- 200 चैकिंग प्वाइंट्स पर करीब 3000 पुलिसकर्मी तैनात थे।
सिटी बसों के इंतजार में घंटों खड़े रहे परीक्षार्थी
लॉकडाउन को लेकर प्रशासन ने कहा था कि परीक्षा के लिए आए बच्चों को लाने ले जाने के लिए बीसीएलएल की सिटी बसें चलेंगी, लेकिन बच्चे सेंटर के बाहर घंटों बसों का इंतजार करते रहे। दरअसल, प्रशासन ने पर्याप्त बसें नहीं चलाईं। कुछ एक रूट पर ही बसें चलीं।
दूध के लिए दिनभर परेशान होते रहे लोग
32 घंटे का लॉकडाउन शनिवार रात से ही शुरू हो गया था। तब प्रशासन ने कहा था कि रविवार सुबह छह बजे से 10 बजे तक दूध का वितरण होगा। मिल्क पार्लर बंद रहेंगे। लेकिन, न दूध बंटा, न ही मिल्क पार्लर खुले। लोग दिनभर दूध के लिए परेशान हुए। (बंद रही दीनदयाल रसोई, अन्नपूर्णा ने भूख मिटाई)
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