- जिस दिन सबसे ज्यादा जरूरत थी तब बंद रही निगम की दीनदयाल रसोई, अन्नपूर्णा ने भूख मिटाई
रविवार को पूरा शहर लॉक था...क्योंकि कोरोना का संक्रमण फिर से रफ्तार पकड़ने लगा है। लेकिन इस लॉकडाउन से पहले हर स्तर पर व्यवस्थाएं अधूरी थीं। प्रशासन ने शुक्रवार को कहा था कि मिल्क पार्लर नहीं खुलेंगे। शनिवार को कहा कि रविवार सुबह 6 से 10 बजे तक दूध वितरण के लिए छूट रहेगी।
ऐसे में गफलत की स्थिति बन गई और रविवार काे मिल्क पार्लर नहीं खुले और न ही दूध घरों तक पहुंचा। हालात यह रहे कि जिन लोगों के छोटे बच्चे थे, उनके लिए पड़ोसियों से दूध लेना पड़ा। इधर, लॉकडाउन में यात्रियों को छूट दी गई थी, लेकिन ऑटो वालों की मनमानी के चलते लोगों को 5 गुना तक ज्यादा किराया देना पड़ा।
नेवी, एसएसबी, पीएससी और मॉडल स्कूल के एंट्रेंस एक्जाम देने आए परीक्षार्थियों को भी इसी समस्या से जूझना पड़ा। इसके अलावा इन्हें खाने की समस्या भी हुई, क्योंकि सभी होटल- रेस्तरां बंद थे। इधर, यात्रियों को जगह-जगह पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण पैदल ही भोपाल स्टेशन जाना पड़ा।
3 सबसे बड़ी परेशानियां
1 दो आदेश से गफलत, नहीं खुले शहर के 520 मिल्क पार्लर-बूथ
सफाई... शनिवार को ही खप गया दोगुना दूध
दुग्ध संघ के सीईओ डाॅ. केके सक्सेना का कहना है कि शनिवार दाेपहर काे 1.20 लाख लीटर के बजाय 2.60 लाख लीटर दूध की डिमांड रही, यह दूध पार्लराें से खप गया। रविवार काे पार्लर अाैर बूथ बंद रहने की यह वजह रही।
2 ऑटो चालक ठूंस-ठूंस कर ले गए और 5 गुना तक किराया वसूला
डिस्टेंसिंग भूले, इन्हें मनमाना किराया चाहिए
शहर में कई प्रतियोगी परीक्षाएं थी। इसका पूरा फायदा ऑटो चालकाें ने उठाया। यात्रियों की भी अपनी मजबूरी थी, क्योंकि शहर लॉक था। लोगों को इस तरह ठूंस-ठूंस कर बैठाकर ले गए और 5 किमी तक के 600 रुपए तक वसूल डाले।
3 बाहर से आए परीक्षार्थियों को खाने के लिए होना पड़ा परेशान
कमला नेहरू स्कूल
एंट्री के वक्त डिस्टेंसिंग थी बाहर निकलते ही ये तस्वीर
एक्सीलेंस-मॉडल स्कूलों में प्रवेश के लिए रविवार को कमला नेहरू स्कूल में परीक्षा हुई। इसका रिजल्ट अप्रैल में आएगा। एंट्री के वक्त तो डिस्टेंसिंग का पालन हुआ, लेेकिन बाहर आते ही लापरवाही शुरू।
50 का खाने का पैकेट 300 रुपए में
लॉकडाउन के कारण होटल-रेस्तरां बंद होने और खाने का कोई इंतजाम न होने का फायदा भोपाल रेलवे स्टेशन पर कुछ रेस्तरां संचालकों नेे उठाया। परीक्षार्थियों से 50 रुपए के खाने के पैकेट के 300 रुपए तक वसूल डाले।
चुनिंदा 15 पेट्राेल पंप ही खुले रहे
पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि प्रशासन ने शहर के 80 में से 15 पंपों को खोलने की अनुमति दी थी। सबसे ज्यादा दिक्कत हाईवे के पंपों पर हुई। क्योंकि गांवों में फसल कटाई काम शुरू हो गया है। इसके चलते डीजल नहीं मिल पाया।
घर में रहने का होता रहा अनाउंसमेंट
पूरे शहर में सुबह से ही पुलिस ने घर में रहने अनाउंसमेंट कराया। कई इलाकों में बैरिकेडिंग कर रास्ते सील किए गए। नए शहर के बजाय पुराने शहर के कई इलाकों में गलियां तक सील थीं। क्योंकि यहां अब कोरोना के ज्यादा मरीज मिल रहे हैं।
निगम भूल गया जिम्मेदारी
रविवार को लॉकडाउन के कारण होटल-रेस्तरां बंद थे। ऐसे में बाहर से परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों और अस्पतालों में भर्ती परिजनों को खाने के लिए परेशान होना पड़ा। निगम ने भी शहर की छह दीनदयाल रसोइयां बंद कर दीं, जबकि ऐसे में समय में इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, क्योंकि यहां पर रोजाना तीन हजार से ज्यादा लोग खाना खाने पहुंचते हैं। जबकि वसूली के लिए निगम के वार्ड और जोन कार्यालय खुले हुए थे। हालांकि बाद में सामाजिक संस्थाओं की अन्नपूर्णा ने लोगों की भूख मिटाई।





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