इन दिनों गल्ला मंडी में सरसों बेचने के लिए बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर ट्राॅली लेकर पहुंच रहे हैं। लेकिन गल्ला मंडी परिसर में किसानों की सुविधा के लिए कोई इंतजाम नहीं है, जिससे वे खाना पानी साथ लाकर ट्राॅली के नीचे बैठने को मजबूर हैं। किसानों की मानें तो वे सुबह 8 बजे आ जाते हैं। 11 बजे बोली लगना चाहिए। लेकिन दोपहर 1 बजे के बाद बोली लगने की वजह से उन्हें कड़ी धूप में तपना पड़ता है। गजना निवासी रमेश तिवारी अपनी नातिन के साथ ट्राली के नीचे बैठकर खाना खाते हुए बताते हैं कि पहले फसल उगाने के लिए पहले खेत में तपोे और उसके बाद बेचने के लिए मंडी में।
कृषि:मंडी में सुबह 11 बजे लगने वाली बोली दोपहर 1 बजे लग रही, किसान बोले- फसल उगाने के लिए खेत में तपो, फिर यहां
इन दिनों गल्ला मंडी में सरसों बेचने के लिए बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर ट्राॅली लेकर पहुंच रहे हैं। लेकिन गल्ला मंडी परिसर में किसानों की सुविधा के लिए कोई इंतजाम नहीं है, जिससे वे खाना पानी साथ लाकर ट्राॅली के नीचे बैठने को मजबूर हैं। किसानों की मानें तो वे सुबह 8 बजे आ जाते हैं। 11 बजे बोली लगना चाहिए। लेकिन दोपहर 1 बजे के बाद बोली लगने की वजह से उन्हें कड़ी धूप में तपना पड़ता है। गजना निवासी रमेश तिवारी अपनी नातिन के साथ ट्राली के नीचे बैठकर खाना खाते हुए बताते हैं कि पहले फसल उगाने के लिए पहले खेत में तपोे और उसके बाद बेचने के लिए मंडी में।

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