सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

रिसीवरों ने डुबोई संस्थाएं:न चुनाव कराए न ही वरीयता सूची बनाई, भूमाफियाओं को सौंपी जमीनें


  • मद्दा और बॉबी की संस्थाओं में भी इन्हीं का राज,
  • जिले की 65 संस्थाओं में अभी भी रिसीवर बैठे हैं, चार साल बाद भी नहीं हटे

गृह निर्माण संस्थाओं की धांधलियों पर अंकुश लगाने के लिए बैठाए गए सहकारिता के विभाग के रिसीवरों ने ही संस्थाओं को डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भास्कर पड़ताल में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिले की 65 संस्थाओं में अभी भी रिसीवर बैठे हैं।

इनमें से ज्यादातर ने न तो चुनाव कराने में दिलचस्पी ली और न ही वरीयता सूची बनाने में तत्परता दिखाई। संस्थाओं का सख्ती से ऑडिट तक नहीं कराया। सदस्य रसीद लेकर भटकते रहे और इन्होंने जमीनें भूमाफियाओं के हवाले कर दीं। इतना ही नहीं, इनकी नियुक्ति 6 से 12 महीने के लिए हुई थी, लेकिन ये 3-4 साल बाद भी रिसीवर बने रहे। मजदूर पंचायत, देवी अहिल्या, नवभारत, कविता, आकाश, श्रीराम, जागृति भी उनमें शामिल है, जहां रिसीवर बैठाए गए। उधर, सहकारिता आयुक्त नरेश पाल का कहना है ऑडिट नहीं कराने, आपत्ति दर्ज नहीं करने की मुख्य समस्या है। पोर्टल बना रहे हैं। उस पर ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करना होगी। सभी संस्थाओं का रिकॉर्ड अपडेट करवाया जाएगा।

मद्दा के दखल वाली हिना पैलेस पर चला बुलडोजर
मद्दा के दखल वाली हिना पैलेस पर रविवार को बुलडोजर चला। कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि हिना पैलेस की जमीन में कई सोसायटी की जमीन मिली है। श्रीराम संस्था में काफी जमीनों की खरीदी बिक्री हुई है, इसलिए उसकी और जांच हो रही है। इसमें पाया गया है कि किसी प्रेम गोयल और मोमेंटम कंपनी द्वारा भी श्रीराम संस्था की जमीन खरीदी गई है। इन सभी को जांच में लिया गया है।

12-12 साल से चुनाव नहीं हुए इस दौरान 8 उपायुक्त बदले
आकाश, श्रीराम, जागृति, नवभारत, मजदूर पंचायत में 12-12 साल से चुनाव नहीं हुए। इन 12 साल में आठ उपायुक्त आकर चले गए, लेकिन किसी ने भी रिसीवर से कामकाज का हिसाब-किताब नहीं लिया। विधायकों ने विधानसभा में भी सवाल उठाए, लेकिन कुछ नहीं बदला। किसी संस्था या संचालक पर कार्रवाई नहीं हुई।

जिनमें रिसीवर, उन संस्थाओं में ज्यादा गड़बड़ियां की गईं
जिले की 65 संस्थाओं पर रिसीवर नियुक्त हैं। इनमें भू माफिया दीपक मद्दा, बॉबी छाबड़ा के दखल वाली करीब-करीब सभी संस्थाएं शामिल हैं। बताते हैं कि उन्हीं संस्थाओं में ज्यादा गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिनमें विभाग ने रिसीवर नियुक्त किए थे। कभी विभाग ने इन्हें हटाना भी चाहा तो ये फिर से नियुक्ति आदेश ले आए।

अयोध्यापुरी में दो, पुष्पविहार में 15 साल में चार रिसीवर रहे
सूत्रों के मुताबिक अयोध्यापुरी में सत्येंद्र सिंह और मनीष श्रीवास्तव के पास ज्यादातर समय रिसीवर का चार्ज रहा। इस दौरान करीब 40 रजिस्ट्रियां भूमाफियाओं के पक्ष में हुईं। पुष्प विहार में 15 साल में चार रिसीवर रहेे। इन चारों ने ऑडिट, संचालक मंडल की कार्रवाई, वरीयता सूची पर कोई काम नहीं किया। कार्यकाल में जमीनों की बंदरबांट हुई।


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