आज जानिए, हमारे नेहरू स्टेडियम की हालत को। खिलाड़ियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने वाला यह मैदान बदहाल है। सुबह प्रैक्टिस शुरू करने से पहले खिलाड़ियों को मैदान से शराब की बाेतलें, पानी के गिलास और रात में छोड़ी जूठन उठाना पड़ती है। प्रैक्टिस के दौरान भी डर बना रहता है कि कोई जानवर या गाड़ी सीखने आया ड्राइवर मैदान में न चला आए। क्योंकि इसकी दीवारें तोड़ी जा चुकी हैं। रनिंग ट्रैक खत्म हो चुका है। जूड़ो, टेबल-टेनिस और कुश्ती के खिलाड़ी मैदान से दूर हो गए हैं। डेढ़ साल से स्पाेर्ट्स कॉम्प्लेक्स और दर्शक दीर्घा का काम अधूरा है। असामाजिक तत्व पार्टियां कर शराब की बोतलें छोड़ जाते हैं।
अब खिलाड़ी नहीं सैर करने वाले ही आते हैं नजर
- 1986 में सुनील गावस्कर मैत्री मैच के लिए आए थे।
- 1988 में टीम इंडिया के खिलाड़ी यहां खेले थे।
- 80 खिलाड़ी आशुतोष क्रिकेट क्लब से जुड़े।
- 60 खिलाड़ी फुटबॉल खेलते हैं।
- 70 खिलाड़ी एथलीट हैं।
- 800 लोग आते थे।
- 300 लोग ( सुबह-शाम घूमने वाले) आते हैं रोज
खिलाड़ियों को हक दिलाएंगे
महापौर शैलेंद्र डागा के कार्यकाल में स्टेडियम कर्ज मुक्त हुआ था। काम कांग्रेस कार्यकाल में बंद हुआ। कॉम्प्लेक्स के लिए आंदोलन करेंगे।
यतेंद्र भारद्वाज, भाजपा खेल प्रकोष्ठ
खिलाड़ी नजर आना बंद हुए
मैं रोज शाम को घूमने आता हूं। पहले खिलाड़ियों की भीड़ नजर अाती थी। अब तो यहां असामाजिक तत्व ज्यादा नजर अाने लगे हैं।
नितिन शुक्ला, जवाहर नगर
ट्रैक खराब, नहीं हो रही रनिंग
साथियों के साथ आर्मी की तैयारी कर रहे हैं। सुबह-शाम प्रैक्टिस के लिए आते हैं। ट्रैक खत्म हो चुका है। रनिंग नहीं कर पाते हैं।
युवराजसिंह भाटी, दो बत्ती
सिर्फ सीमेंट की पिच बनी
मैदान से 30 साल से जुड़े क्रिकेट कोच अनुज शर्मा ने बताया सिर्फ पिच बनी है। विधायक चेतन्य काश्यप से निवेदन किया था।

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