शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

गबन के लिए भी बैंक:ऐसे बनी ठगों की चेन; किसानों से लेते थे एक्स्ट्रा चेक, इसी से निकालते थे राशि, जिसने भी गबन पकड़ा उसे भी बना लिया साथी


  • किसानों के साथ ठगी भास्कर का पैरेलल इन्वेस्टिगेशन
  • किसानों को धोखा देने में आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, कैशियर सहित 6 गिरफ्तार
  • डेढ़ साल से चल रहा था बैंक में किसानों के साथ में गबन
  • निजी बैंक में किसानों के खातों पर डाका डालने वाले बैंककर्मी ही निकले। खास बात यह है कि बैंक में मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, कैशियर सहित छह लोग इस गबन कांड में शामिल थे। जो किसानों के खातों से धीरे-धीरे रुपए निकाल कर हजम कर जाते थे।

    चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस गबन का मास्टर माइंड एक छोटा-सा कर्मचारी निकला, जिसने मैनेजर-डिप्टी मैनेजर तक को इस गबन में सहयोगी बनाते हुए 30 किसानों के खातों से 1.5 करोड़ रुपए से अधिक की राशि निकाली। पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन के रिमांड पर भेजा गया।

    निजी बैंक में किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खाते से पिछले डेढ़ वर्ष से रुपए गायब होने का मामला चल रहा था। धीरे-धीरे जब किसानों के साथ हो रही इस धोखाधड़ी की संख्या बढ़ी तो गबन उजागर हुआ। मंडी थाना पुलिस ने मामले में जांच शुरू की तो गबन में लिप्त लोगों की जानकारी सामने आने पर पुलिस अधिकारी भी चौंक गए। मास्टर माइंड बैंककर्मी दिलीप पिता प्रह्ललाद व्यास निवासी बनबना को बस स्टैंड से गिरफ्तार किया।


  • बैंक और पुलिस की राशि में लाखों का अंतर किसानों के खातों की जानकारी भी नहीं दी
    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सभी छह आरोपियों द्वारा अब तक 1.57 करोड़ रुपए का गबन किया गया है। जबकि बैंक की विजिलेंस ने अब तक केवल 1.31 करोड़ रुपए का गबन होने की जानकारी ही जुटाई है। यही वजह है कि पुलिस को अब तक शिकायतकर्ता किसानों के खातों की जानकारी बैंक द्वारा उपलब्ध नहीं करवाई गई है।

    एक कोरा चेक जानबूझकर लेते थे, 5 बजे बैंक बंद होने के बाद भी मिली भगत से निकाली राशि
    मास्टर माइंड दिलीप व्यास, फील्ड ऑफिसर यशपाल सोलंकी और कंज्यूमर सर्विस ऑफिसर अंकित कपूर किसानों को बातों में उलझाकर केसीसी खाते में पल्टा करने के नाम पर दो की जगह तीन कोरे चेक ले लेते थे। इसी कोरे चेक से वह कैशियर सुशील मीणा की मदद से रुपए निकाल लेते थे। बैंक शाम 5 बजे बंद हो जाता है लेकिन सुशील की मिलीभगत से अधिकांश 5 बजे बाद ही राशि निकाली गई। इसके बाद इसका हिस्सा मैनेजर और डिप्टी मैनेजर तक पहुंचा दिया जाता था।

    बैंक में जिसे गबन का पता लग जाता, उसे राशि में से हिस्सा देकर करा देते थे चुप
    मास्टर माइंड दिलीप ने पहले इस गबन की शुरुआत की। बैंक में जिसे भी उसके इस गबन की जानकारी लगती वह उसे गबन की राशि में हिस्सा देकर चुप कर देता था। धीरे-धीरे मामला मैनेजर और डिप्टी मैनेजर तक भी पहुंचा तो उन्हें भी दिलीप ने हिस्सा देकर चुप कर दिया। डेढ़ वर्ष से बैंक में गबन का यह खेल खेला जा रहा था।

    पूछताछ में नाम सामने आते ही गिरफ्तार होते गए बैंक के अधिकारी-कर्मचारी
    दिलीप ने जब पुलिस को अन्य साथियों के नाम बताए तो पुलिस अधिकारी भी अचरज में पड़ गए। जिसके बाद पुलिस ने बैंक शाखा मैनेजर वैभव पिता ओमप्रकाश बडेरा निवासी वेदनगर उज्जैन, डिप्टी बैंक मैनजर दिनेश पिता सिद्धनाथ राठौर निवासी खंजरपुर जिला राजगढ़, कैशियर सुशील कुमार पिता रामगोपाल मीणा निवासी शिवलोक खजूरी कला पिपलानी भोपाल, कंज्यूमर सर्विस ऑफिसर अंकित पिता रमेश कपूर निवासी कृष्णा परिसर नानाखेड़ा उज्जैन और फील्ड ऑफिसर यशपाल पिता ईश्वर सोलंकी निवासी राजपूत मोहल्ला नरवर जिला उज्जैन को गिरफ्तार कर लिया।

    अब आरोपी तीन दिन के रिमांड पर
    सीएसपी मनोज रत्नाकर एवं मंडी थाना प्रभारी श्यामचंद्र शर्मा ने बताया आरोपियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (गबन), 467, 468 व 471 (फर्जी तरीके से कूटरचित दस्तावेज तैयार करने) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है। शुक्रवार शाम आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया गया है। थाना प्रभारी शर्मा ने बताया आरोपियों से सख्ती के साथ पूछताछ कर गबन की राशि की जानकारी ली जाएगी।


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