मौसम में ठंडक बढ़ने लगी है। नर्मदा किनारे इसका असर और अधिक रहता है। इन सर्द रातों में साधु, संत, परिक्रमावासी व जरुरतमंदों को नर्मदा किनारे मंदिर व छतरियों की शरण लेना पड़ रही है। 8 साल पहले घोषणा व 3 साल पहले भूमिपूजन के बाद भी यहां धर्मशाला का निर्माण नहीं हुआ है। इस कारण बारिश में भी घाट किनारे लोग परेशान होते रहते हैं। नप उपयंत्री का कहना है जमीन आवंटन को लेकर कार्रवाई चल रही है। फिलहाल परिक्रमावासियों व अन्य को रुकवाने की व्यवस्था कर रहे हैं। 2012 के उपचुनाव के बाद आभार कार्यक्रम में आए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने साधु, संत, परिक्रमावासी व बेसहारा लोगों के लिए 60 लाख रुपए से धर्मशाला निर्माण की घोषणा की थी। तीन साल पहले तत्कालीन नगर परिषद ने 40 लाख रुपए लागत से बनने वाली धर्मशाला के लिए पंढरीनाथ मार्ग पर शिलालेख लगवाकर भूमिपूजन करवाया था। लेकिन भूमिपूजन के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया।
दीनदयाल रसोई का भी लाभ नहीं
नर्मदा मार्ग स्थित रैनबसेरा में दीनदयाल रसोई योजना भी प्रस्तावित है। 15 नवंबर से शुरूआत होना थी। 10 रु. में साधु, संत व परिक्रमावासियों के साथ जरूरतमंदों को भोजन मिलना शुरू हो जाता। लेकिन काम अटका पड़ा है। नप के अनुसार योजना को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। लेकिन शासन स्तर से शुभारंभ की तारीख तय नहीं हुई। तारीख के बाद शासन की निर्धारित दर पर लोगों को भोजन मिलना शुरू हो जाएगा।
दो साल से उपयंत्री नहीं होने से अटका काम
वर्तमान नगर परिषद को 3 साल का समय हो चुका है। लेकिन 2 साल तक उपयंत्री की स्थायी नियुक्ति नहीं होने से धर्मशाला सहित कई निर्माण कार्य पेंडिंग पड़े रहे। लोगों को उम्मीद है कि नगर में सीवरेज लाइन का काम पूरा होने के बाद नगर में विकास कार्यों के लिए निर्माण कार्य शुरू होंगे। इसके साथ धर्मशाला भी बनेगी ताकि लोगों को घाट पर रात न बिताना पड़े। सब इंजीनियर हिमांशु सिंह ने बताया नर्मदा नदी से 300 मीटर के अंदर निर्माण को लेकर रोक बताई गई है। अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। साथ ही धर्मशाला निर्माण के लिए भूमि आवंटन की मांग की है।
व्यवस्था कर रहे हैं : धर्मशाला निर्माण को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल कालीदास मैदान स्थित भवन में साधु, संत व परिक्रमावासियों के ठहरने के लिए व्यवस्था कर रहे है।
- राजेंद्र मिश्रा, सीएमओ
ठंड में ठिठुरते रहे परिक्रमावासी
नर्मदा पंचकोशी यात्रियों का एक जत्था शुक्रवार शाम को यहां पहुंचा। दल सदस्य रामखेलावन महाराज ने बताया कड़कड़ाती ठंड में परिक्रमावासियों ने घाट, आसपास बने मंदिरों व क्षत्रियों की शरण ली। रात में महिला परिक्रमावासियों ने भी मंदिर परिसर में ही रात गुजारी। उन्होंने कहा कई यात्री आए हुए है। लेकिन कोई उचित प्रबंध नहीं होने से ठंड में ठिठुरते हुए घाट पर रुकना पड़ा। उन्होंने कहा हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक यहां आते हैं। साधु, संत व परिक्रमावासियों के लिए नर्मदा घाट किनारे सुव्यवस्थित धर्मशाला का निर्माण होना चाहिए। बारिश व गर्मी में भी रुकने के लिए नर्मदा घाट पर उचित प्रबंध नहीं है। मजबूरी में मंदिरों, क्षत्रियों व आश्रमों में रुकना पड़ता है। नगर से 4 से 5 लघु पंचक्रोशी व 1 विशाल नर्मदा पंचकोशी यात्रा भी निकलती है। उस दौरान भी श्रद्धालु नर्मदा तट पर ही ठहरते हैं।
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