कोरोना काल में इंदौर में इलाज की खराब हालत, मौत के आंकड़े छुपाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने विस्तृत आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता व आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए याचिका दायर की। कोरोना काल में जिला प्रशासन ने बेहतर काम किया। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार के एक अधिकारी का पत्र पेश किया, जिसमें इंदौर की हालत चिंताजनक होना बताया गया। यह पत्र पूरी तरह फर्जी निकला।
इस फर्जी पत्र के आधार पर जनहित याचिका दायर कर लोकप्रिय होने की कोशिश की। कोरोना काल में दुबे ने यह जनहित याचिका दायर की थी। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक दलाल ने पैरवी की। शासन की ओर से बताया गया कि केंद्र के जिस अधिकारी का जिक्र पत्र के रूप में किया गया था, वह कभी इंदौर आए ही नहीं। उलटा केंद्र तो इंदौर की तैयारियों से बहुत संतुष्ट था।
इंदौर का माॅडल अन्य शहरों में भी लागू करने की सिफारिश की गई थी। हाई कोर्ट ने सभी को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा आरोप लगाते, उससे अच्छा होता कि कोरोना वाॅरियर्स की मदद करते। इस तरह फर्जी पत्र, तथ्य, दस्तावेज लगाकर याचिका दायर करना बहुत गंभीर मामला है। कोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी भी जाहिर की।
फर्जी दस्तावेज तैयार किए दुबे ने, सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी

कलेक्टर मनीष सिंह का कहना है कि अजय दुबे द्वारा भारत सरकार के अपर सचिव स्तर तक के अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर लेटर तैयार किया गया। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। इस काम में जितने भी दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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