राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र ने कोरोना से बचाव के लिए नीलभस्मी मशीन तैयार की है। ये मशीन अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के आधार पर काम करने वाली चलित मशीन है। एक मीटर की दूरी से ही सतह और हवा को इसकी सहायता से स्टरलाइज किया जा सकता है। टॉवर नुमा इस मशीन की तीन भुजाओं में आठ लैंप लगे हैं, जो यूवी रेडिएशन उत्सर्जित करते हैं। ये मशीन एक मीटर के दायरे में आने वाली किसी सतह को पांच मिनट में स्टरलाइज कर देती है।
दस वर्गमीटर के कमरे को स्टरलाइज करने के लिए 45 मिनट का समय लेती है। कैट के अनुसार यूवी-सी लाइट के जरिए मर्स कोव और सार्स-कोव-1 जैसे कोरोना वायरस का खत्म होना साबित हो चुका है। हालांकि ये लाइट, कोविड-19 बीमारी के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 वायरस को भी खत्म करती है, यह अभी तक प्रमाणित नहीं हुआ है। मशीन तैयार करने वाले वैज्ञानिक एसके मजूमदार ने बताया इस मशीन का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया जा चुका है। इसकी तकनीक के आधार पर बाजार में इस तरह की मशीनें तैयार की जा रही हैं।
एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग, तीस दिन तक रहता है असर, होटल-रेस्त्रां में कारगर
- कोरोना वायरस के कारण शहर में एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग की मांग भी बढ़ी है। होटल, रेस्त्रां और बार में इसका उपयोग ज्यादा हो रहा है। डिसइन्फेक्शन एक्सपर्ट आलोक खोरे के अनुसार एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग बहुत पहले से उपयोग में आ रही तकनीक है।
- अस्पतालों में इसका उपयोग ज्यादा होता था। कोविड के बाद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इसका उपयोग बढ़ गया है। अल्कोहल, केटेशोल, पॉलिसिलॉक्जेन, सिल्वर नेनौ पार्टिकल और क्वाटरनरी अमोनियम सॉल्ट जैसे अलग-अलग रसायनों के साथ ये कोटिंग की जाती है। एक सप्ताह से तीस दिनों तक के लिए ये कारगर होती है। ये इस बात पर निर्भर करता है कि उस जगह पर लोगों की आवाजाही कितनी होती है।
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