इंदौर की शान सराफा चौपाटी को 56 की तर्ज पर विकसित करने का प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया है। व्यापारियों से पटरी नहीं बैठ पाने के कारण स्मार्ट सिटी ने कदम पीछे खींच लिए हैं। सीईओ का कहना है हमने तो सड़क बनाने का ही प्रोजेक्ट लिया था, वह पूरा हो गया। बस पाइप लाइन का काम बाकी रह गया।
निगमायुक्त प्रतिभा पाल और पूर्व स्मार्ट सिटी सीईओ संदीप सोनी ने 56 दुकान की तरह सराफा चौपाटी को विकसित करने के लिए लंबा-चौड़ा प्लान बनाया था। इसे नया स्वरूप देने के लिए थ्रीडी डिजाइन और रात में लगने वाली चौपाटी की एक-सी दुकानों को लेकर डिजाइन तैयार किया था। इस काम की शुरुआत लॉकडाउन के दौरान यह बताकर की गई थी कि सराफा बाजार की व्यस्तता के चलते लॉकडाउन का समय इस काम के लिए सबसे अच्छा है। 9 मीटर चौड़ी सड़क बनने के बाद भी व्यापारियों और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के बीच लगातार बैठकों का दौर चला। निगमायुक्त द्वारा लगातार दावा किया गया कि स्मार्ट सिटी द्वारा सराफा की दुकानों के फसाड को भव्य स्वरूप में ही विकसित किया जाएगा।
सड़क बनने के बाद पीछे हटे व्यापारी
सड़क बन जाने के बाद सराफा व्यापारियों ने चौपाटी का विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने लगातार चौपाटी से होने वाली समस्याओं को गिनाया। इस कारण पूरे फसाड डेवलपमेंट का ही प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया। इस प्रोजेक्ट में व्यापारियों को 24 करोड़ रुपए देने थे। अब व्यापारी इसके लिए तैयार ही नहीं हो रहे हैं।
अदिति गर्ग, स्मार्ट सिटी सीईओ
हमारा काम सड़क बनाना था, फसाड तो व्यापारियों के लिए था
सराफा फसाड को लेकर क्या प्रोग्रेस है?
व्यापारियों ने लॉकडाउन में काम नहीं चलने के कारण इसमें सहयोग करने से इनकार कर दिया।
तो क्या सराफा 56 की तरह नहीं बन सकेगा?
स्मार्ट सिटी का काम तो सड़क बनाना था, जो हमने बना दी। वहां बस पानी की लाइन का काम अंतिम चरण में है।
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