जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने शुक्रवार को कलेक्टर दिनेश जैन ट्रामा सेंटर पहुंचे। यहां उन्होंने आधे घंटे से ज्यादा समय तक निरीक्षण किया। इस दाैरान खास बात यह सामने आई कि एक दिन पहले जिस प्रसूता वार्ड में एक पलंग पर दो महिलाएं भर्ती थी, वहां आधे पलंग खाली मिले।
इधर, पुराने भवन का परिसर पूरी तरह अनुपयोगी हो गया। इसके चलते इस क्षेत्र को शराबियों ने अपना अड्डा बना लिया। यहां शराब की बोतलें भी पड़ी दिखी, लेकिन प्रबंधन के अधिकारियों ने कलेक्टर के निरीक्षण का ही रास्ता ही बदल दिया।
पुराना जर्जर भवन में सरकारी अस्पताल के संचालन के दौरान स्वास्थ्य विभाग यही दावा कर रहा था कि ट्रामा सेंटर बन जाने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार कर दिया जाएगा। लेकिन ट्रामा सेंटर बनने के बाद भी अस्पताल में वार्ड और पलंगों की कमी बनी हुई है।
दरअसल 300 बिस्तर वाले इस अस्पताल में अब भी दो साल पहले जैसी स्थिति बनी हुई है। परिसर में गंदगी, मवेशियों का विचरण और मरीजों के साथ आने वाले अटेंडरों की समस्या जस की तस है। हाल ही के दिनों में डॉक्टर से मारपीट की घटना के बाद कलेक्टर ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को निरीक्षण किया था।
प्रसूताओं को तीसरी मंजिल पर शिफ्ट किया
कलेक्टर जैन के निरीक्षण की खबर लगते ही खामियों को छुपाने में माहिर अस्पताल प्रबंधन ने अपनी ओर से सारी व्यवस्थाएं चाक चौबंद कर दी। प्रसूता वार्ड में गुरुवार तक एक ही पलंग पर दो महिलाएं भर्ती थी, उसको तीसरी मंजिल पर शिफ्ट कर दिया। गार्ड को भी निर्देश दे दिए कि मरीजों के साथ आए अटेंडरों को भी बाहर कर दें। इस दौरान शुजालपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों के परिजनों ने विरोध भी जताया, लेकिन यहां आए अधिकारियों ने किसी की भी नहीं सुनी।
मरीजों से चर्चा करते तो हकीकत सामने आती
अस्पताल के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर जैन के साथ एसडीएम एसएल सोलंकी, सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे लेकिन सिविल सर्जन और जिला स्वास्थ्य अधिकारी से ही अस्पताल के सबंध में जानकारी लेते रहे। इस दौरान यहां मौजूद अयोध्या बाई और रफीउद्दीन कुरैशी निवासी शुजालपुर ने बताया कि निरीक्षण करने आए अधिकारी यदि हमसे बात करते तो अस्पताल की हकीकत हम बताते।
अनुपयोगी जगह को उपयोगी बनाने की प्लानिंग करें
निरीक्षण करने आए कलेक्टर ने प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. शुभम गुप्ता व जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजू निदारिया को अस्पताल की लिफ्ट और अनुपयोगी स्थानों का उपयोग कर बेहतर व्यवस्था जुटाने के निर्देश दिए। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों को शहरी स्वास्थ्य केंद्र के लिए जगह तलाशने के निर्देश भी दिए।
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