रविवार, 1 नवंबर 2020

हार्ट डिसीज, कैंसर और मोटापे से बचना है तो वीगन डाइट लें लेकिन इसे 3 महीने से ज्यादा लेते हैं तो ये बातें ध्यान रखें

हार्ट डिसीज, कैंसर और मोटापे से बचना है तो वीगन डाइट लें लेकिन इसे 3 महीने से ज्यादा लेते हैं तो ये बातें ध्यान रखें

वजन घटाना चाहते हैं और हार्ट को हेल्दी रखना चाहते हैं तो वीगन डाइट को अपना सकते हैं। फल, सब्जी और अनाज से मिलने वाले न्यूट्रिएंट्स पेट को दुरस्त रखने के साथ कैंसर का खतरा घटाते हैं। लेकिन कई महीनों तक इस डाइट के सहारे रहना खतरनाक है। क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सुरभि पारीक कहती हैं, जब भी इस डाइट की शुरुआत करें तो इसके साथ कुछ और सप्लिमेंट्स लें वरना कुछ पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।

आज वर्ल्ड वीगन डे के मौके पर जानिए वीगन डाइट को अपनाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है...

वीगन डाइट कैंसर का खतरा घटाती है, रिसर्च में साबित हुआ
अमेरिका में हुई एक स्टडी बताती है वीगन डाइट वजन घटाने में कारगर है। इसमें फैट बेहद कम मात्रा में होने के कारण ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और हृदय रोगों का खतरा घटता है। फल और सब्जियों के जरिए शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रखते हैं और इम्युनिटी को बढ़ाते हैं।

मेयो क्लीनिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वीगन डाइट में नॉन-वेज नहीं शामिल होता, इसलिए ये कोलोन और ब्रेस्ट कैंसर से भी बचाते हैं। इसमें फायबर होने के कारण पेट से जुड़ी दिक्कतें जैसे कब्ज नहीं होता।

वीगन डाइट लें तो इन 6 बातों का ध्यान रखें

  • क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सुरभि पारीक बताती हैं कि वीगन डाइट 3 महीने से अधिक समय तक न लें। लगातार प्लांट बेस्ड डाइट लेने से शरीर में आयरन, कैल्शियम, विटामिन-डी और बी-12 की कमी हो जाती है।
  • कई बार लोग दूध के ऑप्शन के तौर पर सोया मिल्क, सोया पनीर लेते हैं। डाइट में सोया की मात्रा अधिक होने पर हार्मोनल इम्बैलेंस होने का खतरा रहता है। नतीजा, हेयरफॉल और स्किन स्पॉट्स के रूप में दिख सकता है। इसलिए वीगन डाइट लेते समय एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।
  • अगर लम्बे समय के लिए यह डाइट लेते हैं तो एक्सपर्ट कुछ सप्लिमेंट्स प्रिस्क्राइब करते हैं जो कैल्शियम, विटामिन-डी, बी-12 और आयरन की कमी पूरी करते हैं। सिर्फ प्लांट बेस्ड डाइट लेते हैं कई जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
  • विटामिन-डी की कमी को पूरा करने के लिए सुबह 9 बजे से पहले कुछ समय धूप में बैठें। इससे विटामिन-डी की कमी पूरी होगी और हडि्डयां भी मजबूत होंगी।
  • विटामिन बी-12 की कमी होने पर थकान और कमजोरी महसूस होती है इसलिए डाइट में सोया ड्रिंक्स, अनाज जरूर लें। सिर्फ सब्जियों और फलों पर डिपेंड न रहें।
  • डॉ. सुरभि के मुताबिक, हरी सब्जियां लेने के बावजूद लोगों में आयरन की कमी हो सकती है क्योंकि ये लो-हीम फूड हैं। इनसे उतना आयरन नहीं मिल पाता जितना चाहिए। इसके लिए मटर, टोफू और ड्रायफ्रूट्स जरूर लें।

वीगन डाइट किसे नहीं लेनी चाहिए

ऐसे लोग जो पहले से अंडरवेट हैं। आयरन और कैल्शियम की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें वीगन डाइट लेने से बचना चाहिए। जैसे- एनीमिक महिलाएं। ऐसे लोग जिन्हें नट्स, सोया और ग्लूटेन से एलर्जी है उन्हें भी वीगन डाइट नहीं लेनी चाहिए।

वेजिटेरियन और वीगन डाइट के फर्क को भी समझ लें
वीगन और वेजिटेरियन डाइट में एक सबसे बड़ा अंतर है। वेगन डाइट में ज्यादातर ऐसे फूड शामिल हैं जो पेड़े-पौधों से सीधे तौर पर मिलते हैं। वीगन डाइट में एक बात का खासतौर पर ध्यान दिया जाता है कि जो भी फूड ले रहे हैं वो केमिकल से तैयार न हुए हों। यानी ऑर्गेनिक फार्मिंग से तैयार होने वाले फूड होने चाहिए।

कैसे शुरू हुआ वर्ल्ड वीगन डे
जानवरों के अधिकारों की वकालत करने वाले ब्रिटेन के डोनाल्ड वॉटसन ने 1 नवम्बर 1944 को 5 लोगों की एक मीटिंग बुलाई। इस बैठक में नॉन-डेयरी प्रोडक्ट पर चर्चा हुई। यहीं से पड़ी वर्ल्ड वीगन डे की नींव। इस दिन का लक्ष्य जानवर और पर्यावरण को बचाने के साथ लोगों को वेजिटेरियन फूड खाने के लिए जागरूक करना है।




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