सरकार एवं अभिभावक कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई के लिए चिंतित है और नेटवर्क एवं कई माध्यमों से बच्चों को शिक्षा देने के लिए सरकार के द्वारा कई कार्यक्रम किए जा रहे हैं। लेकिन रामपुर कला क्षेत्र में प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में शिक्षा की स्थिति का बुरा हाल है, क्योंकि शासन के द्वारा बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए छात्र एवं छात्राओं को जुलाई माह के पहले सप्ताह में ही किताबें वितरण करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 3 माह के लगभग समय हो गया है। बावजूद इसके 2000 छात्र-छात्राओं को जरूरी विषयों की किताबें वितरित नहीं की गई हैं। इस हाल में न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। मालूम हो कि प्राइमरी एवं मिडिल स्कूलों में अध्यनरत छात्रों को सरकार की ओर से नि:शुल्क किताबों का वितरण करने का प्रावधान है, यह किताबें मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन वितरण प्रक्रिया में खामी होने के कारण रामपुर कला क्षेत्र के 50 प्राइमरी एवं 17 मिडिल स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को संपूर्ण किताबें नहीं बांटी गई हैं तथा कुछ विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें बच्चों को अभी तक एक भी किताब नहीं मिली है।
वहीं सरकार के द्वारा बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए कई अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन रामपुर कला क्षेत्र में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को कोर्स की किताबें नि:शुल्क देने का मात्र ढिंढोरा पीटा जा रहा है, क्योंकि रामपुर कला क्षेत्र के प्राइमरी स्कूलों में पूरा कोर्स नहीं दिया गया है, कुछ विद्यालयों में तो एक भी किताब नहीं दी गई है। ऐसे में अभिभावकों को ज्यादातर किताबें बाजार से खरीदना पड़ रही हैं।
वहीं विकासखंड स्तर पर तैनात बीईओ, बीआरसी, सीएसी का दायित्व है कि विद्यालयों की स्थिति पर नजर रखने के लिए वे न केवल लगातार क्षेत्र का भ्रमण करें, बल्कि अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा कर समस्या का तत्काल समाधान कराएं। लेकिन बीईओ, बीआरसी व बीएसी द्वारा मॉनिटरिंग कार्य के नाम पर महज औपचारिकता की जा रही है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के स्तर में सुधार होने की वजह और बिगड़ती जा रही है।
इन विद्यालयों में नहीं पहुंची किताबें
संकुल केंद्र रामपुर कला के शासकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय में 130 छात्राएं दर्ज हैं, लेकिन 3 माह बीत जाने के बाद भी इन छात्राओं को अभी तक कोर्स उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसी प्रकार शासकीय प्राथमिक विद्यालय गेतनपुरा में छात्र-छात्राओं की संख्या 132 है, लेकिन यहां पर अध्ययनरत बच्चों को कोर्स की एक भी किताब नहीं दी गई है। इसी प्रकार शासकीय माध्यमिक विद्यालय सिंगारदे में कक्षा आठ का गणित, शासकीय प्राथमिक विद्यालय बहेरी में बच्चों की संख्या 47 है लेकिन यहां कक्षा 5 का गणित एवं कक्षा दो की अंग्रेजी की प्राथमिक विद्यालय में भी कक्षा 5 व 2 की गणित-अंग्रेजी की किताबों का वितरण नहीं हुआ है।
बाजार से खरीदनी पड़ रही किताबें
^हमारे द्वारा कई बार हेड मास्टर से इस संबंध में बात की तो उनका कहना है कि हमें ऊपर से ही किताब नहीं दी गई हैं, ऐसे में हम आप लोगों को किताबें कहां से दें। 3 माह का समय बीत गया है अभी तक किताबें नहीं मिलीं, इस कारण हमें बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं।
दीपचंद मुद्गल, अभिभावक निवासी रामपुर कला
हमें ही नहीं मिली किताबें
^शासकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय रामपुर कला में 130 छात्र-छात्राएं के नाम विद्यालय में लिखे हुए हैं, हमारे वहां बच्चे एवं अभिभावक रोज विद्यालय के चक्कर काटते हैं, ऐसे में हमें शासन स्तर से जो नि:शुल्क किताबें बच्चों को वितरण के लिए दी जाती है, वह नहीं दी गई है, ऐसे में अध्ययनरत बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
धनराज गुप्ता, हेड मास्टर शासकीय प्राथमिक विद्यालय रामपुर कला
2 दिन में करा देंगे वितरण
^पूर्व में शासन स्तर से कम किताबें आई थी, अब पूरी किताबें आ गई हैं। विलंब होने का कारण यह रहा कि विद्यालय क्षेत्र में सीएसई की नियुक्ति होनी थी, वह नियुक्ति कर दी गई है अब हम 2 दिन के अंदर जिन विद्यालयों में किताब नहीं पहुंची हैं, उन विद्यालयों में किताबों का वितरण करवा देंगे।
अनिल त्रिवेदी, बीआरसी सबलगढ़
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