बारिश का दौर थमने के साथ ही शहर में कोरोना यानी कोविड-19 के साथ मौसमी बुखार बस्तियों में बेहताशा लोगों को बीमार कर रहा है। आमतौर पर बरसात थमने के बाद होने वाला वायरल बुखार और कोरोना दोनों के बीच में अंतर समझ पाना आम आदमी के लिए मुश्किल हो रहा है। कोरोना लक्षणों के साथ आता नहीं और मौसमी बुखार भी भीगने, सर्दी-जुकाम के साथ हर वही लक्षण प्रदर्शित करता है जो कोरोना में भी होता है। इन हालातों में लोगों के लिए इलाज मानसिक परेशानी में डालने वाला साबित हो रहा है। आम आदमी समझे तो कैसे कि उसे आखिर काेरोना ही हुआ है या फिर हमेशा की तरह सितंबर में होने वाला बुखार है जो परेशान कर रहा है।
इन जटिल हालातों के बीच चिकित्सकों ने आगाह करते हुये कहा है कि अपनी डाॅक्टरी खुद करने के बजाय विशेषज्ञ को निर्धारित करने दें कि आपको कोरोना हुआ या फिर मौसमी वायरल बुखार हलाकान किये हुये है। थोड़ी सी लापरवाही कुछ मामलों में एकदम भारी भी पड़ रही है। मामले यहाँ तक सामने आये कि सर्दी-जुकाम हुआ, संक्रमण बढ़ा, साँस लेने में दिक्कत हुई और अगले कुछ घण्टों में पीड़ित की मौत हो गई। मेडिकल पल्मोनरी मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. जितेन्द्र भार्गव, मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. अजय तिवारी कहते हैं िक अभी के दौर में सर्दी, खाँसी, बुखार के साथ जो मर्ज सामने आता है उसका सही आकलन चिकित्सक को ही करने दें। इसमें बारीक सा फर्क है इसलिए विशेष सावधानी में ही बचाव हो सकता है। इसमें नोटिस करने लायक बात यही है कि डरें नहीं सामना करें, क्योंकि समय पर इलाज से पीड़ित बिल्कुल स्वस्थ हो सकता है। इसमें पैनिक कुछ भी नहीं है।
मौसमी बुखार जल्द निमोनिया में नहीं बदलता
सबसे अहम तथ्य जो मौसमी बुखार और कोरोना के बीच नोटिस किया जा सकता है वह यह है कि साधारण या मौसमी बुखार सामान्य रूप से निमोनिया में नहीं बदलता है। यह कुछ दिन तक सामान्य प्रति जैविक, एण्टी एलर्जिक और ताप घटाने वाली दवाओं को खाने के बाद प्रतिरोधक क्षमता विकसित होते ही ठीक हो जाता है। इसके बाद हालाँकि कमजोरी महसूस होती है, लेकिन छाती तक कफ बिल्कुल आकर जमा नहीं होता है। मौसमी बुखार से अलग कोरोना में संभव है कि संक्रमण के 3 से 4 दिन में ही छाती में संक्रमण हो जाए, कफ के साथ िनमोनिया के लक्षण सामने आने लगे। यह वायरस कई तरह से ऑर्गन में इफेक्ट कर सकता है।
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