भक्त और भगवान एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। भक्त पर जब मुसीबत आती है तो कोई साथ नहीं देता लेकिन भगवान हमेशा साथ देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने बाललीलाओं के माध्यम से एक-दूसरे की मदद करने का संदेश दिया है।
यह बात पं. जगदीश पंड्या ने रविवार को गांव झुटावद के श्रीराम-जानकी मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन कही। पं. पंड्या ने गजग्रह के मोक्ष के वृत्तांत में कहा कि मुसीबत में भगवान साथ देते हैं जबकि इंसान मोहमाया और परिवार के लगाव में फंसकर प्रभु को भूल जाता है। उन्होंने कहा श्रीकृष्ण के जन्म का कारण बताते हुए कहा कि कंस इतना अत्याचारी था कि उसने अपने पिता अग्रसेन को भी कारागार में डाल दिया था। जब गोकुलवासियों पर संकट आया तो श्रीकृष्ण ने उन्हें भी तार दिया। जब भगवान जन्मे तो बंदीगृह के ताले खुल गए। वसुदेव की बेड़ियां भी खुल गईं। कारागार में जन्म होने के बाद वे गोकुल पहुंच गए। जहां श्रीकृष्ण ने अपनी बाललीलाओं से गोकुल को धाम बना दिया। कथा के दौरान गोकुल में आनंद भयो जय हो कन्हैयालाल की.. भजन पर श्रद्धालु थिरके। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव नाच-गाकर मनाया और माखन-मिश्री का प्रसाद बांटा। पं. पंड्या ने नन्हे बालकृष्ण काे दुलार करते हुए अपनी गोद में लिया। पंडाल में श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजते रहे। कथा दौरान के बड़ी तादाद में श्रद्धालु मौजूद थे।
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