गर्मी से राहत पाने के लिए पानी में उतरी भैंसाें की पीठ पर आराम की मुद्रा में बैठे संरक्षित प्रजाति के कछुओं के झुंड का यह नजारा जिला म़ुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर ग्राम साेईंकलां और मेवाड़ा के बीच सीप नदी में दिखाई दिया। इस तस्वीर को वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट सीताराम टैगोर ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। दरअसल भैंसाें की काले रंग की त्वचा सूरज की तपिश से झुलसने लगती है। सीप नदी में ग्राम मैवाड़ा के पास आधा दर्जन भैंसाें का एक झुंड पानी में पड़ा हुआ था, तभी पानी की सतह पर तैरते हुए आए 5 कछुए इन भैंसाें की पीठ पर चढ़ गए। मूलरूप से ग्राम साेईंकलां के निवासी वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट सीताराम टैगोर ने बताया कि भारतीय फ्लैपशेल नामक प्रजाति के ये कछुए चंबल, सीप एवं पार्वती नदी के अलावा बड़े तालाबों में बहुतायत में पाए जाते हैं।
पानी में गईं भैंसाेंं पर कछुओं ने की सवारी
गर्मी से राहत पाने के लिए पानी में उतरी भैंसाें की पीठ पर आराम की मुद्रा में बैठे संरक्षित प्रजाति के कछुओं के झुंड का यह नजारा जिला म़ुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर ग्राम साेईंकलां और मेवाड़ा के बीच सीप नदी में दिखाई दिया। इस तस्वीर को वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट सीताराम टैगोर ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। दरअसल भैंसाें की काले रंग की त्वचा सूरज की तपिश से झुलसने लगती है। सीप नदी में ग्राम मैवाड़ा के पास आधा दर्जन भैंसाें का एक झुंड पानी में पड़ा हुआ था, तभी पानी की सतह पर तैरते हुए आए 5 कछुए इन भैंसाें की पीठ पर चढ़ गए। मूलरूप से ग्राम साेईंकलां के निवासी वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट सीताराम टैगोर ने बताया कि भारतीय फ्लैपशेल नामक प्रजाति के ये कछुए चंबल, सीप एवं पार्वती नदी के अलावा बड़े तालाबों में बहुतायत में पाए जाते हैं।
0 coment rios:
Hi friends