यमुनानगर-उत्तरप्रदेश बॉर्डर पर हंगामा होने के बाद बॉर्डर से पंचकूला रविवार को प्रवासियाें से भरी हुई 17 बसें वापस आ गई। ऐसे में जिला प्रशासन को अब उन बसों से लौटने वाले लोगों के रहने का इंतजाम करना पड़ेगा, ताकि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो। जिला प्रशासन की ओर से कालका से शनिवार को 17 बसें सहारनपुर के लिए भेजी गई थी। हरेक बस में उचित दूरी को ध्यान में रखते हुए 30 से 32 लोगों को बैठाया गया था। करीब 500 से ज्यादा लोगों को सहारनपुर भेजने की प्लानिंग थी और सहारनपुर से यूपी सरकार की बसें उनके गंतव्य स्थान तक उन लोगों को पहुंचाती।
हंगामे की वजह से एक भी बस से नीचे नहीं उतरा
दरअसल बस चालकों की ओर से बस में सवार लोगों को पैदल बॉर्डर के पार जाने की बात लोगों से कही गई। हालांकि मौके का हालात देखकर लोग काफी डर चुके थे और एक भी व्यक्ति बस से नीचे नहीं उतरा। कई घंटे इंतजार करने के बाद भी माहौल शांत नहीं होने पर पंचकूला जिला प्रशासन की ओर से सभी बसों को वापस बुला लिया गया।
18 घंटे इंतजार करने के बाद लौटी बसें
शनिवार को कालका से सहारनपुर के लिए रवाना बसों का पास पंचकूला डीसी ऑफिस में दोपहर के समय बनाया गया था। उसके बाद वे यूपी के लिए रवाना हुई। शाम के समय यमुनानगर बॉर्डर पर हंगामा होने की वजह से करीब 18 घंटे तक सभी बसें बॉर्डर के खुलने का इंतजार करती रही।
लद्दाख व उत्तराखंड के लोगों को भेजा जा चुका है
अब तक जिला प्रशासन की ओर से लद्दाख व उत्तराखंड के लोगों को वापिस भेजा चुका है। हालांकि इन दोनों जगहों से वहां की सरकार की ओर से बसें भेजी गई थी। इसके अलावा पंजाब व राजस्थान के लोगों को भी उनके गंतव्य स्थान तक भेज चुके हैं। जिले में प्रवासी मजदूरों की संख्या 25 हजार के करीब है।
सभी शेल्टर होम्स में रखे जाएंगे
बसों से लौटे सभी करीब 520 लोगों को अब जिला प्रशासन की ओर से शेल्टर होम में रखा जाएगा। जिन-जिन एरिये में शेल्टर होम्स खोले गए थे उन एरिया के इंसिडेंट कमांडर को लोगों के ठहरने की व्यवस्था और उनके लिए खाना तैयार करवाने को कहा गया है। अब जिला प्रशासन की ओर से अगले हफ्ते इन लोगों को भेजे जाने की प्लानिंग की जा सकती हैं।
सबके दिल टूटे, अपने गांव न पहुंचने का दर्द छलका, कइयों की भर आईं आंखें

रविवार को कालका बस स्टैंड से 7 बसें उत्तर प्रदेश के प्रवासियों को लेकर रवाना हुई थी। लेकिन शाम होते-होते में सभी बसें प्रवासियों को वापिस लेकर पहुंच गई।इन बसों में महिलाएं, बच्चे, युवा, बुजुर्ग समेत हर वर्ग के लोग अपने-अपने घरों के लिए कालका से बसों में सवार होकर निकले थे। लेकिन दोपहर बाद जैसे ही बसें वाया यमुनानगर होते हुए सहारनपुर के बॉर्डर पर पहुंची तो उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा उन्हें वावस जाने के लिए कह दिया गया जिसके बाद यह सभी बसें रविवार देर शाम कालका पहुंच गई। चंद्रशेखर यादव, सुरेंद्र यादव, राजू यादव आदि ने बताया कि उन्हें उत्तर प्रदेश में घुसने नहीं दिया गया और वापस भेज दिया गया। अपने गांव न पहुंचने पर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
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