- 2020 में 3600 मरीजों का 4.5 करोड़ रुपए बना था बिल,
- शासन ने मामले में लैब के भुगतान रोक कर जांच कराने के आदेश दिए थे
गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) से संबद्ध हमीदिया अस्पताल में अब कोरोना मरीजों की निजी लैब से मनमानी पैथोलॉजी की जांच रिपोर्ट नहीं चलेगी। अब अस्पताल में उपलब्ध सुविधा से ही जांच कराना होगी। वहीं, आवश्यकता होने पर डीन की अनुमति के बाद नियमानुसार चयनित निजी लैब से जांच कराई जा सकेगी।
इस संबंध में कमिश्नर कवीन्द्र कियावत ने निर्देश दिए हैं। बता दें, पिछले बार हमीदिया में कोरोना मरीजों की मनमानी जांच के चलते 3600 मरीजों का साढ़े चार करोड़ रुपए का बिल मना था। इसमें मरीजों के ठीक होने के बाद भी निजी लैब से 26 प्रकार की खून की जांच करने वाली जांचें कराई गई थीं। मामले में शासन ने जांच के आदेश दिए थे।
कमिश्नर ने साफ किया है कि आयुष्मान योजना के तहत यदि बाहर से जांच के लिए किसी संस्था को अधिकृत किया गया है, तो सुनिश्चित किया जाए कि जांच हमीदिया अस्पताल में उपलब्ध है। उसे बाहर से न करवाया जाए। साथ ही, यदि निविदाएं आयुष्मान के अंतर्गत प्राप्त की गई, तो उसे अन्य किसी गतिविधि के ऊपर लागू न किया जाए।
इसलिए लिया गया निर्णय
हमीदिया में मई 2020 से जनवरी 2021 तक करीब 3600 मरीज भर्ती हुए। इनकी बीमारी की स्थिति जानने के लिए कई बार जांचें की गईं। एक मरीज की 26 प्रकार की जांच कई बार की गईं। हद तो यह है, मरीज के ठीक होने के बाद भी उसकी कई जांचें की गईं। इसके चलते अस्पताल में भर्ती इन मरीजों की जांच का दो निजी लैब का बिल करीब साढ़े चार करोड़ रुपए तक पहुंच गया। मामले में शासन ने दोनों लैब का भुगतान रोक कर जांच भी बैठा दी।
इसलिए भी उठे सवाल
आयुष्मान योजना में मरीजों को नि:शुल्क इलाज और जांच उपलब्ध कराने के लिए हमीदिया में अक्टूबर-नवंबर 2019 में पैथोलॉजी जांच के लिए टेंडर बुलाए गए। इसमें करीब 300 जांच के लिए रेट मांगे गए। इसमें दो निजी लैब समाधान और रैनबेक्सी पैथोलॉजी के अलग-अलग जांच के रेट न्यूनतम आए, जिनको अस्पताल ने जनवरी 2020 में वर्क ऑर्डर दे दिया।
साप्ताहिक रोस्टर से किया दोनों लैब ने काम
आयुष्मान योजना में जांच के लिए चयनित दोनों ही लैब को मार्च 2020 में बिना टेंडर के कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच का भी काम सौंप दिया। इसके तहत दोनों ही लैब को 7 नई जांच का काम भी दे दिया गया। इसमें आईएल-6 और सीरम लैक्टेड समेत अन्य जांच शामिल हैं। आईएल-6 जांच का ही रेट 1900 रुपए प्रति जांच दिया गया। खास है, दोनों ही लैब को साप्ताहिक रोस्टर बना कर जांच कराई गई। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के लिए तत्कालीन डीन की तरफ से आदेश जारी करने की बात की जा रही है। हालांकि जिम्मेदारों का कहना है कि दोनों फर्मों को सीजीएचएस के तय रेट से कम रेट देने पर काम दिया गया था।
इस तरह बार-बार की जांचें
हमीदिया आने वाले मरीजों के रैपिड टेस्ट पॉजिटिव आने या रिपोर्ट निगेटिव होने के बावजूद लक्षण होने पर उनके ब्लड टेस्ट से संबंधित 26 प्रकार की जांच करना तय किया गया। इसके अलावा सीटी स्कैन, एक्सरे अलग से। वहीं, हल्के लक्षण के बाद मरीजों को डिस्चार्ज करते समय दोबारा उनकी खून की 26 प्रकार की जांच को दोबारा किया गया। इस तरह यह जांचें कई भर्ती गंभीर मरीजों की 11 से 12 बार की गईं।

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