रविवार, 28 मार्च 2021

आईआरएडी प्रोजेक्ट:रोड एक्सीडेंट होने पर अब पुलिस एफआईआर में यह भी लिखेगी कि सड़क की हालत कैसी थी, हादसे वाले वाहन के पहिए कैसे थे


  • सड़क हादसे रोकने के लिए अब पुलिस दुर्घटना स्थल पर बारीकी से करेगी निरीक्षण, आईआरएडी एप पर दर्ज करेगी पूरी जानकारी

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए पुलिस अब प्रत्येक घटनास्थल का बारीकी से अध्ययन करेंगी। अपनी रिपोर्ट में भी हर प्रकार के कारण को दर्ज करेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं भूतल मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे आईआरएडी (इंट्रीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस) प्रोजेक्ट के तहत जिले के सभी थाना प्रभारियों और विवेचना अधिकारियों को पुलिस कंट्रोल रूम में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। दो दिन के इस प्रशिक्षण में जिले के सभी थाना प्रभारियों सहित करीब 150 विवेचना अधिकारी शामिल हुए। यह प्रशिक्षण एनआईसी के डीआईओ राहुल मीणा और जिला रॉल आउट मैनेजर राहिल खान ने दिया।

यहां बता दें कि अब पुलिस किसी भी प्रकार की सड़क दुर्घटना के मामले में वाहन चालक द्वारा लापरवाही से वाहन चलाने का कारण लिखती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बल्कि हर हादसे की पीछे क्या क्या वजह रही है। इन सभी का अध्ययन कर उसे अपनी रिपोर्ट में दर्ज करना होगा। कलेक्टर सतीष कुमार एस व एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आईआरएडी के दूसरे चरण में भिंड जिले को भी शामिल किया गया है।

इसकी तहत जिले के सभी थाना प्रभारियों और विवेचना अधिकारियों को सड़क दुर्घटनाओं में किस तरह से जांच करना है यह प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी एएसपी संजीव कंचन को बनाया गया है। मालनपुर टीआई विनोद सिंह कुशवाह ने मुताबिक सरकार ने आईआरएडी का मोबाइल एप भी बनाया है। जो कि सीसीटीएनएस से सीधे लिंक है। ऐसे में किसी भी सड़क दुर्घटना के मामले में मौके पर पहुंचे जांच अधिकारी को सभी जानकारी तत्काल उस एप में भरना होगी।

इसलिए शुरू किया गया प्राेजेक्ट
वर्ष 2020 तक पूरे विश्व में सड़क दुर्घटनाओं में 50 फीसदी की कमी लाना थी लेकिन इसमें भारत काफी पीछे है। पूरे विश्व की तुलना में भारत में वाहनों का घनत्व एक प्रतिशत है जबकि विश्व की तुलना में 10 फीसदी सड़क दुर्घटना भारत में हो रही हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत हादसों का कारण स्पष्ट हो सकेगा, इसके बाद हादसों को रोकने के लिए जरूरी कवायद की जाएगी।

अभी पुलिस 12 से प्रकार से करती है विश्लेषण

  • वर्ष के किस माह में सबसे ज्यादा और सबसे कम दुर्घटनाएं होती है।
  • क्षेत्र और किस समय में दुर्घटनाएं होती है।
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में अलग अलग दुर्घटनाओं की तुलना की जाती है।
  • मौसम के हिसाब से भी दुर्घटनाओं का विश्लेषण किया जाता है।
  • एक्सप्रेस-वे, हाईवे और सामान्य सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं का अलग अलग विश्लेषण किया जाता है।
  • आवासीय, औद्योगिक, व्यवसायिक आदि क्षेत्र के अनुसार।
  • दुर्घटना वाली सड़क सिंगल, डबल, मोड़, पुल, पुलिया आदि के अनुसार।
  • तिराहा, चौराहा आदि पर।
  • दुर्घटना कारित करने वाला वाहन किस प्रकार का था।
  • दुर्घटना में घायल अथवा मृत वाहन चालक की उम्र क्या रही।
  • दुर्घटना में वाहन ने टक्कर किस प्रकार से मारी।

क्या होगा फायदा
भिंड जिले में एक साल में करीब 700 सड़क हादसे होते हैं, जिसमें से 150 से ज्यादा लोगों की जान जाती है। वहीं 700 से ज्यादा लोग घायल होते हैं। ऐसे में हर सड़क हादसे के पीछे के कारण सामने आने के बाद उसका विश्लेषण हो सकेगा कि अधिकांश दुर्घटनाएं किस वजह से होती है। हालांकि अभी भी पुलिस सड़क हादसों का विश्लेषण करती है, लेकिन उसमें सड़क और वाहन की स्थिति का उल्लेख नहीं होता है।

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