- मुस्लिम मैरिज एक्ट को आधार मानकर शादी शून्य की, पंजाब में भी आया था ऐसा केस
एक महिला द्वारा पहले पति से तलाक लिए बिना ही दूसरे व्यक्ति से शादी करने, वास्तविक उम्र एवं नसबंदी की बात छिपाने की बात को आधार मानते हुए फैमिली कोर्ट ने विवाह शून्य घोषित कर दिया। यह फैसला मुस्लिम कानून अनुसार सुनाया गया।
यह प्रदेश का पहला मामला है। इसके पहले पंजाब में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था एडवोकेट मोहम्मद जुबेर ने बताया कि जहांगीराबाद निवासी युवक(34) की ओर से फैमिली कोर्ट में निकाह शून्य कराने आवेदन दिया था। 21 हजार मेहर की रकम के साथ उसका निकाह 27 सितंबर 2018 को हुआ था।
युवक जिद करके पत्नी को डॉक्टर के पास ले गया, तब पता चला कि नसबंदी हो चुकी है
युवक ने कोर्ट को बताया कि उसे नहीं मालूम था कि उसकी पत्नी पहले से शादी शुदा है। युवक ने कोर्ट को बताया कि शादी के लंबे समय बाद भी पत्नी जब गर्भ धारण नहीं कर पाई तो पति ने उसे डॉक्टर के पास चलने की बात की। वह आनाकानी करती रही। जब पति ने जिद की तब पत्नी डॉक्टर के पास गई। तब पता चला कि महिला की नसबंदी हुई है।
युवक ने कोर्ट के सामने साक्ष्य पेश करते हुए जानकारी दी कि उसकी पत्नी की पहले शादी हो चुकी है। उसने पहले पति को तलाक दिए बिना ही उससे शादी की है। उसकी पहली पत्नी और दो बच्चे उसके साथ ही रहते हैं। उसने पहली पत्नी से इजाजत लेने के बाद दूसरी शादी की थी। कुछ दिनों बाद ही दूसरी पत्नी का व्यवहार क्रूरतापूर्ण हो गया।
उम्र और पहले पति का ऐसे खुलासा- दूसरे पति ने बताया कि उसकी पत्नी के झूठ का खुलासा 29 जनवरी 2019 को राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के दौरान हुआ। उसने अपनी उम्र 33 वर्ष बताई थी। जब वह आधार कार्ड बनवाने ले गया तो उसके फिंगर प्रिंट लिए गए। तब पता चला कि पत्नी का पहले से आधार कार्ड बना हुआ है। जब प्रिंट लिया तो पता चला कि उसकी उम्र 46 साल है। आधार में उसके पहले पति का नाम था।
प्रताड़ना का आरोप लगाया- महिला ने महिला थाने में दहेज प्रताड़ना का मामला भी दर्ज कराया था। महिला का कहना था कि उसकी कॉस्मेटिक की दुकान पर युवक से परिचय हुआ था। उसके कहने पर उसने पहले पति से तलाक लिया था। वह भरण-पोषण देने से बचने के लिए प्रपंच रच रहा है। हालांकि वह अपने पहले पति से तलाक सहित अन्य बातों के संबंध में कोई साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं कर सकी।
क्या कहता है एक्ट
पहले पति के जिंदा रहते दूसरा विवाह करती है तो वह शून्य है
कोर्ट ने मुस्लिम मैरिज एक्ट को आधार मानते हुए फैसला दिया कि यदि कोई महिला पहले पति से तलाक लिए बिना उसके जिंदा रहते हुए दूसरा विवाह करती है तो ऐसा विवाह शून्य होता है।
- मुस्लिम मैरिज एक्ट के मुताबिक फैसला सुनाया है। जिसमें विवाह शून्य करने का आदेश दिया है। यह प्रदेश पहला ऐसा मामला है। - आरएन चंद, प्रधान न्यायधीश, कुटुंब न्यायालय

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