बुधवार, 24 मार्च 2021

भाजपा का एक तीर, दो निशाने:पूर्व मंत्री मलैया की नाराजगी और ब्राह्मण वोट साधने के लिए अचानक मंत्री भार्गव को देना पड़ा दमोह उपचुनाव का जिम्मा



  • मंत्री भूपेंद्रसिंह पहले से प्रभारी बनाए हुए हैं, इसके बावजूद पार्टी को यह फैसला लेना पड़ा

दमोह विधानसभा उपचुनाव में जो मुश्किलें कांग्रेस विधायक के इस्तीफे के बाद झेलना पड़ी, अब वह भाजपा के लिए खड़ी होने लगी हैं। बुंदेलखंड के दिग्गज नेता और मंत्री गोपाल भार्गव को अचानक दमोह उपचुनाव के लिए प्रभारी बनाना यही बताता है कि राह मुश्किल होते जा रही है। दरअसल, पूर्व मंत्री जयंत मलैया टिकट की किटकिट के कारण नाराज चल रहे हैं। भाजपा यह जानती है कि ब्राह्मण वोटर्स को साधते हुए मलैया को भी मनाने का काम सिर्फ भार्गव कर सकते हैं।

मामला इसलिए सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि भाजपा इससे पहले मंत्री भूपेंद्रसिंह को उपचुनाव में प्रभार दे चुकी थी, लेकिन मलैया के रवैये पार्टी की मुश्किल बढ़ा दी। इसी के बाद हाईकमान ने आनन-फानन में भूपेंद्रसिंह के साथ ही भार्गव को वहां भेजने का फैसला किया है।

राजनीतिक एक्सपर्ट्स के अनुसार दमोह उपचुनाव में पूर्व मंत्री जयंत मलैया को टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं। उनके बेटे सिद्धार्थ मलैया भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं लेकिन कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए राहुल सिंह को प्रत्याशी बना दिया है। मुश्किल यह है कि दमोह सीट जीतने के लिए मलैया का राहुल सिंह को समर्थन जरूरी है।

कारण यह भी है कि कांग्रेस ने राहुल सिंह के सामने राजनीति का लंबा अनुभव रखने और दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके अजय टंडन को मैदान में उतार दिया है। यही कारण है कि भाजपा ने ब्राह्मण वोटों को साधने और मलैया परिवार को मनाने के लिए मंत्री भार्गव को दमोह उपचुुनाव की बतौर प्रभारी जिम्मेदारी सौंपी है।

भार्गव को इसलिए सौंपना पड़ी दमोह की जिम्मेदारी


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