शुक्रवार, 26 मार्च 2021

अवैध कॉलोनियों को लेकर सख्ती:वैध ले-आउट से छेड़छाड़ करने वाले कॉलोनाइजर पर भी होगी एफआईआर


  • नगर पालिका विधि बिल में कॉलोनीवासियों के हितों से जुड़े दो प्रावधान

मप्र नगरपालिका विधि संशोधन विधेयक 2021 में अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को रोकने के साथ वैध कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों के अधिकारों को भी सुरक्षा दे दी गई है। वैध कॉलोनियों को लेकर इसमें दो प्रावधान किए गए हैं।

पहला- यदि कॉलोनाइजर ने कॉलोनी में किसी तरह का विकास कार्य या सड़क अधूरी छोड़ी तो उस कॉलोनी में पड़े कॉलोनाइजर के खाली प्लॉट को मॉर्टगेज करके मिलने वाली राशि से वह कार्य पूरा होगा या राजस्व नियमों के तहत राशि की वसूली होगी। दूसरा- कॉलोनाइजर ने मंजूर ले-आउट का यदि उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। सात साल तक सजा और दस लाख रुपए जुर्माना होगा।
फिर बदलेगी कट ऑफ डेट
राज्य सरकार ने वर्ष 1998 में मप्र कॉलोनाइजर नियम 1998 में नियम-15(क) बनाया था। इससे 30 जून 1998 तक की अवैध कॉलोनियों को वैध किया गया। इसके बाद 30 जून 2002 तक, 30 जून 2007 तक, 21 दिसंबर 2012 तक और आखिरी बार दिसंबर 2016 तक कट चुकी अवैध कॉलोनियों को वैध करने के फैसले लिए गए।

इसी दौरान सरकार ने अवैध कॉलोनियों को वैध करने का फैसला लिया था। सावर्जनिक सूचना जारी हुई। नगरीय निकायों ने आपत्तियां सुनी। इसके बाद 1788 कॉलोनियों के ले-आइट, विकास शुल्क तय किए गए। इन कॉलोनियों से विकास शुल्क लेकर और राशि जमा कराने के बाद नियमितीकरण शुरू किया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद 3 जून 2019 को राज्य शासन की धारा 15 (क) को रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट ने नगर पालिक अधिनियम 1956 की धारा 292-ई के प्रावधान के पालन में धारा 15(ए) को अवैध करार दिया। इसके साथ ही अवैध कॉलोनियों के विरूद्ध कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए। पूरी प्रक्रिया ठप पड़ गई। अब बताया जा रहा है कि नए रूल बनते समय कट ऑफ डेट को नवंबर 2028 किया जा सकता है।

खुली जगह का इस्तेमाल किसी और काम के लिए किया तो भी कार्रवाई होगी
विधेयक में ले-आउट के बारे में स्पष्ट किया गया है कि यदि कॉलोनी में कहीं खुली जगह, ओपन एरिया, सड़क, हॉल या कुछ और दर्शित जगह हो, जिसका कॉलोनाइजर ने दूसरा इस्तेमाल कर लिया है तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी स्थिति में अवैध कॉलोनी के कॉलोनाइजर पर जो कार्रवाई होगी, वही वैध कॉलोनी के कॉलोनाइजर पर की जाएगी। नए बिल में इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। साफ है कि आने वाले समय में एक्ट बनने के बाद लोगों के हित सुरक्षित हो जाएंगे। बता दें कि एक दिन पहले ही कैबिनेट ने इस बिल को मंजूरी दी है।

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