आचार्य अशोक सागर सूरि आदि संतों व साध्वीवृंद का बुधवार को मंगल प्रवेश हुआ। आगे गहुली बनाने के साथ बैंड बाजों द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जा रही थी। आचार्य व संतों के साथ गुरुभक्त व पीछे विशेष परिधान में महिलाएं सिर पर गुलाब के फूलों की टोकरियां लिए चल रही थीं। साध्वीवृद्ध व महिलाएं पीछे व लाभार्थी परिवार बग्घी के साथ चल रहे थे। आचार्य अशोक सागर सूरि आदि संतों व साध्वीवृंद का खेरादीवास स्थित माणक-मिश्री निवास पर आगमन हुआ। मंगल प्रवेश दौलतगंज, डालूमोदी बाजार, न्यू क्लाथ मार्केट, रंगेरेज रोड, नौलाईपुरा, घासबाजार होते हुए गुजराती उपाश्रय पहुंचा। गुरुभक्तों में रास्ते भर डोली को कंधा देने की होड़ मची थी।
धन-संपत्ति का मोह रखने वालों को आगामी भव में कुत्ता-बिल्ली बना देगा- उपाश्रय में धर्मसभा को संबोधित करते हुए जीवन के 60, 70, 80 साल पूर्ण करने पर भी मात्र व्यापार व्यवसाय के पीछे दौड़ने वाले से कोई लाभ नहीं है। जीवाचार, दंडक शिवाचार, नवग्रह के अध्ययन कर धर्म करों। थोड़ा समय मंदिर, पूजा-पाठ, सामायिक कर अपना भव सुधारों। धन-संपत्ति, बंगला, गाड़ी का मोह आगामी भव में कुत्ता-बिल्ली बना देगा। प्रभु महावीर ने गौतम वस्त्र व श्रमणीवृंद के लिए चंदन बाला वस्त्र दिए।
साधु-संतों की श्रावक-श्राविकाओं ने कमली ओढ़ा कर की अगवानी
शत्रुंजय तीर्थ धाम संस्थापक अशोक सागर सूरि को कामली ओढाई। समाजजन ने श्री शत्रुंजय तीर्थ धाम करमदी की ध्वजा महोत्सव निमित्त कामली ओढाकर पूज्य गुरु भगवंत की अगवानी की। मणिलाल जैन, सुनील मूणत, शैलेंद्र मांडोत, जयवंत कोठारी, अशोक चौटाला, नरेंद्र छाजेड़, हेमंत मांडोत, संजय मूणत, मुकेश गेलड़ा, विमल गेलड़ा,राजेश बरमेचा, अभय भरगट, सुभाष गुगलिया, शुभम तलेरा, हेमंत कोठारी, अंशुल मूणत मौजूद रहे।
आज होगी सत्तर भेदी पूजा
गुरुवार को करमदी तीर्थ शत्रुंजय तीर्थ धाम में सुबह 8.30 बजे से सत्तर भेदी पूजन, प्रवचन व सुबह 11 बजे ध्वजा रोहण महोत्सव होगा। आचार्यश्री व वृंद पूर्णयशा श्रीजी आदि भगवंत की निश्रा में ध्वजादंड, कलश पूजन होगा। महोत्सव के लकर आचार्यश्री बुधवार शाम को करमदी तीर्थ पहुंच गए थे। श्री संघ के पारसमल भंडारी ने बताया गुरुवार सुबह यहां वर्षगांठ पर धार्मिक कार्यक्रम होंगे।

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