सोमवार, 22 मार्च 2021

जल में मल:भोपाल का 86 फीसदी गंदा पानी रोज मिल रहा है नदी-नालों और तालाबों में


  • राजधानी में हर रोज 360 मिलियन लीटर निकलता है सीवेज,
  • जब झीलों के शहर का ये हाल तो दूसरे शहरों की स्थिति क्या होगी

ताल-तलैया और झीलों के शहर के रूप में विख्यात भोपाल शहर का 86 फीसदी से अधिक सीवेज बिना शोधन (ट्रीटमेंट) के सीधे नदी, नालों और तालाबों में समा रहा है। राजधानी में यह स्थिति तब है जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के शहरों से निकले वाले सीवेज को नदी-तालाबो में मिलने से पहले सौ फीसदी शोधन अनिवार्यता के आदेश को डेढ़ साल बीत चुके हैं।

प्रदेश में शुद्ध पेयजल और मलजल-शोधन से जुड़ी हजारों करोड रुपए की नगरीय विकास विभाग की अमृत परियोजना पिछले कई सालों से चल रही है। अमृत योजना के तहत राजधानी में पिछले चार साल से 9 एसटीपी का स्वीकृत है, इसमें से सर्फ एक ही अब तक बनकर चालू हो पाया है। तीन का निर्माण 90 फीसदी से अधिक पूरा हो गया है, बाकी का काम भगवान भरोसे है।
नगरीय विकास विभाग की ओर से इसी माह केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी सीवेज ट्रीटमेंट की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में हर दिन 360 मिलियन लीटर सीवेज पैदा होता है। जबकि 105.09 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता वाले 9 एसटीपी हैं, इनसे भी वर्तमान में सिर्फ 49 एमएलडी सीवेज ही ट्रीट हो पा रहा है। बाकी करीब 311 एमएलडी सीवेज नालों के जरिए बहकर बड़े तालाब, छोटा ताल, हलाली डैम और कलियासोत नदी के जरिए बेतवा नदी में जाकर मिल रहा है।
बड़ी झील... छोटी झील, हलाली डैम, कलियासोत और बेतवा हो रही दूषित

सीवेज की सर्वाधिक मार रामसर साइट बड़े तालाब पर पड़ रही है। बैरागढ, हलालपुरा, बोरवन, बेहटा, खानूगांव से लेकर कर्बला तक एक दर्जन से अधिक छोटे-बडे नाले सीधे तालाब में सीवेज और गंदगी लेकर आते हैं। सबसे खराब स्थिति बैरागढ़ में ही है। कर्बला और शिरीन नाले के पास गंदगी का आलम वीआईपी रोड से ही साफ नजर आता है।

चार साल में सिर्फ 1 ट्रीटमेंट प्लांट बन सका, आठ बनना है बाकी
शहर में पिछले चार साल से 9 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण का कम चल रहा हैं, जिनकी कुल क्षमता 86.5 एमलएलडी है। इनमें सिर्फ कोहेफिजा स्थित शिरीन नाले पर मौजूद एसटीपी बनकर चालू हो गया है। छह एसटीपी के निर्माण की मियाद जून 2021 तक और दो के निर्माण के मियाद दिसंबर 2021 तक है।

इन सभी के बन जाने पर भी भोपाल की कुल सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 186.5 एमएलडी हो पाएगी। यानी इसके बाद राजधानी का आधे से अधिक सीवेज नदी-तालाबों में मिलता रहेगा। प्रोफेसर कॉलोनी और यादगारे शाहजहानी को दिसंबर 2021 तक और बाकी सभी को इसी साल जून 2021 तक पूरा करना है।

- Dainik Bhaskar
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