शहर में संपत्ति कर के 4.50 लाख खाते हैं, लेकिन इनमें से आधे भी संपत्ति कर जमा नहीं करते हैं। इसकी बड़ी वजह संपत्ति कर की गणना में गड़बड़ी को लेकर की गई आपत्तियों का निराकरण नहीं होना भी है। लोग 2-2 साल तक वार्ड और जोन कार्यालय से लेकर मुख्यालय तक चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन अफसर सुनवाई भी नहीं करते।
संपत्ति कर वसूली की गड़बड़ियों को रोकने के नाम पर 5 साल पहले 4.75 करोड़ रुपए से जीआईएस सर्वे के लिए नागपुर की एक एजेंसी को काम दिया था। अभी तक नगर निगम लगभग डेढ़ करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका है। शहर के कुल 85 वार्डों में से 75 वार्डों का सर्वे हुआ है, लेकिन सर्वे में ही इतनी गड़बड़ियां निकल आईं कि जो लोग टैक्स जमा करते थे, उन्होंने भी टैक्स जमा करना रोक दिया। जीआईएस सर्वे के समय दावा किया गया था कि मकान का एक्यूरेट मेजरमेंट दर्ज होगा, जिससे टैक्स की सही-सही गणना हो सकेगी।
मैंने आपत्तियों का निराकरण किया, अभी और सुधार करेंगे
^पिछले सप्ताह मैंने खुद सौ आपत्तियों का निराकरण किया है। हमने जोन से अपर आयुक्त तक एक सिस्टम बनाने की कोशिश की है। अभी और सुधार करेंगे।
वीएस चौधरी कोलसानी, कमिश्नर नगर निगम
आप भी जानिए कैसी-कैसी गड़बड़ी
- फ्लैट का एरिया बढ़ा दिया।
- सिंगल मकान को डुप्लेक्स बता दिया।
- पूरे प्लॉट एरिया पर कंस्ट्रक्शन दिखा दिया।
- खुद के मान को किराएदार लिख दिया।
फिर भी नहीं किया सुधार
ई-7 अरेरा कॉलोनी निवासी शिवहर्ष सुहाल्का ने बताया कि उनके फ्लैट का एरिया 418 स्क्वायर फीट है और 2 साल पहले तक वे 1200 रुपए प्रॉपर्टी टैक्स जमा करते थे। पिछले साल उन्हें निगम ने डबल एरिया करके लगभग 2900 रुपए का बिल पकड़ा दिया। उन्होंने आपत्ति की, लेकिन निगम ने सुधार नहीं किया।
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