- कहा- जब मास्टर प्लान 2031 का ड्राफ्ट लागू ही नहीं हुआ तो फिर उसे देखकर कीमतें कैसे बढ़ाई जा सकती हैं,
- ऐसे में सीएम-पीएम आवास का सपना कैसे पूरा होगा
नए वित्त वर्ष के लिए जमीनों के दाम तय करने बनाई गई कलेक्टर गाइडलाइन में प्रस्तावित की गई कीमतों पर बुधवार तक 27 दावे-आपत्ति पंजीयन दफ्तर पहुंची हैं। इसमें भाजपा के दो विधायक और जबकि कांग्रेस के एक विधायक शामिल हैं। दावे-आपत्ति देने वाले ज्यादातर लोगों ने प्रॉपर्टी के दाम नहीं बढ़ाए जाने की बात अपनी आपत्ति में लिखी है।
वहीं प्रस्तावित गाइडलाइन में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। पंजीयन विभाग के अफसरों ने उसमें प्रस्तावित कीमतों का आधार 2005 और 2031 के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को बनाया है। जब ये ड्राफ्ट लागू ही नहीं हुआ तो फिर उसे देखकर कीमतें कैसे बढ़ाई जा सकती हैं।
यह आरोप बुधवार को पूर्व प्रोटेम स्पीकर और हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने मीडिया से चर्चा के दौरान लगाया। उन्होंने कहा कि सिर्फ बाजार मूल्य के आधार पर जमीनों के आवासीय एवं व्यवसायिक दामों में वृद्धि नहीं की जा सकती है। कलेक्टर गाइडलाइन में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने से सीएम और पीएम आवास योजना के घर कोई कैसे खरीद पाएगा।
उन्होंने कहा कि देश में सबसे ज्यादा स्टांप ड्यूटी 12.5 फीसदी मध्यप्रदेश में ली जा रही है। इसमें 2 फीसदी की छूट दी जाना चाहिए। उन्होंने प्रॉपर्टी कीमतें तीन साल में एक बार तय करने के लिए एक बोर्ड बनाने की मांग की है। गोविंदपुरा से विधायक कृष्णा गौर ने प्रॉपर्टी की कीमतें कोरोना काल में नहीं बढ़ाने और स्टांप ड्यूटी 2 फीसदी घटाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री समेत कलेक्टर अविनाश लवानिया को पत्र लिखा है।
- 12.5 % स्टांप ड्यूटी ली जा रही है मप्र में, सबसे ज्यादा
- 2 फीसदी स्टांप ड्यूटी घटाने की मांग रखी सभी ने
- 05-31 के मास्टर प्लान को बनाया आधाार
वैसे ही स्थिति खराब है, रेट बढ़े तो मुश्किल होगी
- फंदाकला में आकृति हाईलैंड और आकृति एक्जोटिका के रेट बढ़ाए जाना प्रस्तावित किया है। इनकी तरफ से आपत्ति में बताया गया है कि इनके प्रोजेक्ट के रेट न बढ़ाए जाएं। क्योंकि यहां पहले से ही काफी रेट हैं। जबकि इनके प्रोजेक्ट से लगी कॉलोनी में रेट कम हैं। गांधी नगर में आर्चेड मैजिस्टी कॉलोनी का नाम कलेक्टर गाइडलाइन में शामिल करने के लिए अरेरा कॉलोनी स्थित मंत्रा द्वारा दावा पेश किया है। ये दावा नमन अग्रवाल की तरफ से पेश किया है। यहां रेट 30000 से 35000 हैं।
- एक अन्य व्यक्ति नीरज ने आपत्ति पेश करते हुए बताया है कि वर्तमान में रेट न बढ़ाए जाएं, कोरोना में रोजगार कम हो गया है। रेट बढ़ाए तो स्थिति और खराब होगी।
पीसी शर्मा ने कहा-
हमारी सरकार ने 20% दाम घटाए थे, फिर क्यों बढ़ा रहे हैं
दक्षिण-पश्चिम से कांग्रेस के विधायक पीसी शर्मा ने आपत्ति दर्ज कराई है। इसमें उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में रियल स्टेट की हालत खराब है। ऐसे में जिला मूल्यांकन समिति की तरफ से पास किए गए प्रस्ताव से आम आदमी और कारोबारी दोनों पर असर पड़ेगा। न तो आम आदमी महंगी रजिस्ट्री करा सकेगा, न बिल्डरों के प्रोजेक्ट बिकेंगे।
हमारी सरकार ने 20 फीसदी प्रॉपर्टी के दाम इसलिए घटाए थे कि आम आदमी आसानी से प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त कर सके। लेकिन यदि अब प्रॉपर्टी के दाम बढ़ते हैं तो ये आम लोगों के साथ धोखा है। स्टांप डूयूटी में दो फीसदी कम किया जाना चाहिए।
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