सोमवार, 22 मार्च 2021

पेयजल संकट:प्रदेश में हर दिन 218 करोड़ लीटर सीवेज निकल रहा, इसका दो तिहाई हिस्सा नदी-तालाबों में मिल रहा, वजह- पानी साफ करने वाले सिर्फ 53 प्लांट


  • सीपीसीबी और एमपीपीसीबी की निगरानी रिपोर्ट में खुलासा, सिर्फ 25% पानी ट्रीट हो रहा

प्रदेश में करीब पौने चार सौ नगरीय निकायों से हर दिन 218.36 करोड़ लीटर सीवेज निकल रहा है। इसमें से करीब 165 करोड़ लीटर सीवेज सीधे नदी-तालाबों में मिल रहा है। इसका कारण प्रदेश में सिर्फ 27 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 26 फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) ही काम हर रहे हैं। जबकि 79 निर्माणाधीन या बनने हैं। यह खुलासा नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत केंद्रीय और राज्य प्रदूषण बोर्ड को मप्र के नगरीय विकास विभाग की ओर से दी गई जानकारी में हुआ।

इस जानकारी के आधार पर तैयार प्रोग्रेस रिपोर्ट को एनजीटी के समक्ष पेश किया जाएगा। बता दें कि प्रदेश के तीन महानगर इंदौर, भोपाल और ग्वालियर नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के दायरे में आते हैं। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन शहरों का वेस्ट वाटर उत्तर दिशा की ओर बहते हुए गंगा और यमुना की सहायक नदियों बेतवा, शिप्रा और चंबल में मिलता है। जबकि चौथा महानगर जबलपुर नर्मदा के किनारे पर ही बसा हुआ है।
किस नदी में कहां की गंदगी मिल रही

नदी शहर
नर्मदा जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, बुदनी (सीहोर), महेश्वर
बेतवा भोपाल, विदिशा।
शिप्रा इंदौर, उज्जैन
चंबल नागदा, शिप्रा के जरिए इंदौर,
उज्जैन की गंदगी

वर्तमान में चालू एसटीपी 26 अंडर ट्रॉयल 10 एफएसटीपी 26 निर्माणाधीन एसटीपी 66 प्रस्तावित एसटीपी 13 बंद पड़े 1

2023 तक 81 फीसदी ट्रीटमेंट क्षमता होगी

  • अभी कुल सीवेज का 25% ही ट्रीट हो पा रहा है, जबकि क्षमता 35% से अधिक की है। नगरीय प्रशासन विभाग ने जो जानकारी दी है, उसके हिसाब से दिसंबर 2023 तक 81% सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता विकसित हो जाएगी। - पीके त्रिवेदी, डायरेक्टर एनवायरनमेंट

कुल नगरीय निकाय
378 प्रतिदिन निकलने वाला सीवेज
2183.65 एमएलडी (218.36 करोड़ लीटर)

वर्तमान में ट्रीटमेंट क्षमता 805.96 एमएलडी (80.59 करोड़ लीटर)

ट्रीटमेंट हो पा रहा 525.96 एमएलडी (52.59 करोड़ लीटर)

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