मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के तीन भवनों का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी संस्थान ने साहेब इंफ्रास्ट्रेक्चर प्राइवेट लिमिटेड के बिलों का पूर्ण भुगतान नहीं किया। कोर्ट भी साहेब इंफ्रास्ट्रेक्चर के पक्ष में फैसला सुना चुकी है। संस्थान को 31 मार्च तक लगभग 11.25 करोड़ का भुगतान कंपनी को करना है।
कंपनी ने 2013 में मैनिट के 3 भवन बनाने का ठेका लिया था। शुरुआत में कंपनी को बिल का भुगतान बराबर होता रहा। कंपनी ने 2016 में दो भवन पूरे करके संस्थान के सुपुर्द कर दिए थे। इसके बाद संस्थान में डायरेक्टर बदल गए। इस बीच तीसरे भवन का भी काम चलता रहा। नए डायरेक्टर ने अकारण ही स्वीकृत बिलों का भुगतान करना बंद कर दिया।
उनके द्वारा दो साल तक कंपनी से कोई पत्राचार भी नहीं किया गया। इस संबंध में कंपनी ने कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट ने आर्बिट्रेटर नियुक्त कर दिया। आर्बिट्रेटर ने भी अपना अवॉर्ड घोषित किया कि कंपनी के बकाया 7.62 करोड़ रुपए का भुगतान मय ब्याज के संस्थान को करना चाहिए। इसी बीच संस्थान ने बीएसएनएल को बुलाकर काम का एकतरफा सर्वे कराया।
संस्थान का कहना था कंपनी ने काम और रेट दोनों ही बढ़ा दिए हैं, लेकिन आर्बिट्रेटर ने इस रिपोर्ट को कॉन्ट्रैक्ट सम्मत नहीं माना और नकार दिया। ज्ञात हुआ है कि संस्थान ने पूर्व में चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी, चीफ इंजीनियर सीपीडब्ल्यूडी और आईआईटी दिल्ली से भी काम का वैल्युएशन कराया था, पर सभी रिपोर्ट कंपनी के पक्ष में आई।
कंपनी के डायरेक्टर हर्ष मलहोत्रा का कहना है कि संस्थान ने अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए ही कंपनी के काम को गलत साबित करने का असफल प्रयास किया। इस प्रयोग में करदाताओं के 3 से 4 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं। इन रुपयों को बर्बाद करने की जांच होनी चाहिए।
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