- सुदामा नगर, सुखलिया, विजय नगर नए हॉट स्पॉट, 24 घंटे में 21 मरीज वेंटिलेटर पर
कोरोना संक्रमण एक बार फिर फैल रहा है। सात दिन पहले अस्पतालों में हर दिन औसतन 20 से 25 मरीज भर्ती हो रहे थे, जो अब हर दिन सौ मरीज सामने आने के बाद बढ़कर 49 हो गए हैं। गंभीर मरीज भी बढ़ रहे हैं। 24 घंटे में 21 मरीज वेंटिलेटर पर पहुंचे हैं और कुल 49 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं।
संक्रमण बढ़ने के साथ ही एक्टिव मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं। 11 फरवरी को एक्टिव मरीजों की संख्या जहां 300 से नीचे हो गई थी, वहीं अब फिर 600 के पार हो गई है। सात दिन में एक्टिव मरीज दोगुने हो चुके हैं। कोरोना संक्रमण की दर 7.17 फीसदी पर पहुंच गई है। शनिवार तक कुल 58 हजार 756 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। कुल 8 लाख 20 हजार 215 सैंपल्स की जांच हो चुकी है। वायरस के नए स्ट्रेन की आशंका व्यक्त की जा रही है।
इसकी जांच के लिए भी दिल्ली सैंपल भेजे जा रहे हैं, जिससे पता चल सके कि वायरस का नया स्ट्रेन तो इंदौर में सक्रिय नहीं हो गया है। इसके पहले ब्रिटेन में पाए गए वायरस के नए स्ट्रेन के मरीज भी इंदौर में मिले थे। कमिश्नर डॉ. पवन शर्मा ने कहा कि फिर से मरीज बढ़ रहे हैं और इसके लिए मॉनिटरिंग तेज कर दी है। स्ट्रेन की जांच भी करा रहे हैं।
- 375 मरीज भर्ती
- हैं अस्पतालों में
- 2455 बेड सामान्य ऑक्सीजन वाले
- 1097 एचडीयू के बेड्स
- 608 आईसीयू बेड्स
- 4160 बेड उपलब्ध
(सरकारी अस्पतालों में एमआरटीबी, चेस्ट सेंटर, एमटीएच में कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है, वहीं अरबिंदो में भी कुछ बेड हैं।)
और इधर, डॉक्टरों ने माना- शहर में री-इन्फेक्शन का एक भी केस नहीं
एक ओर जहां एक्टिव केस बढ़ रहे हैं, वहीं डॉक्टरों का मानना है कि शहर में री-इन्फेक्शन का एक भी मामला अभी सामने नहीं आया है। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च व सरकार की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी व्यक्ति की दो पॉजिटिव रिपोर्ट में कम से कम सौ दिन का अंतर होना चाहिए। यानी दोबारा संक्रमण होना तब माना जाएगा, जब उसकी दूसरी रिपोर्ट सौ दिन बाद पॉजिटिव आई हो और दोनों बार उनमें बीमारी के कोई लक्षण सामने आए हों।
स्वास्थ्य विभाग ने 11 माह में सात केस चिह्नित किए, जिन्हें दोबारा संक्रमण हुआ। इनकी जांच का जिम्मा एमजीएम मेडिकल कॉलेज की टीम को दिया गया। जब इनका रिव्यू किया गया तो इनमें से एक भी केस ऐसा नहीं था, जिसकी कोविड-19 की दूसरी जांच रिपोर्ट सौ दिन बाद फिर से पॉजिटिव मिली हो। इनमें से किसी व्यक्ति को 40 दिन तो किसी को 60 दिन में दाेबारा संक्रमण हुआ था। इस कारण इन्हें री-इन्फेक्शन का केस नहीं माना जा रहा। इंदौर में कुछ मरीजों की दो से तीन महीने के अंदर जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसलिए माना जा रहा है कि यह री-इन्फेक्शन की बजाय वायरस का री-एक्टिवेशन हो सकता है।


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