- विभाग दाे साल से केंद्र सरकार से प्रोजेक्ट ऐलिफेंट मंजूर करने की मांग कर रहा है,
- बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व को जंगली हाथियों ने कॉरिडोर बनाया
प्रदेश में जंगली हाथियों के हमले से मौतें बढ़ने के बावजूद वन विभाग के पास कोई ठोस योजना नहीं है। फॉरेस्ट गार्ड मोटर साइकिल पर हाथियों के दल की निगरानी करने के अलावा ग्रामीणों और फसलों को बचाने के लिए कुछ नहीं कर पाते है। तीन साल से छत्तीसगढ़ और झारखंड के जंगली हाथियों ने मध्यप्रदेश में डेरा डाल रखा है। बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व को जंगली हाथियों ने कॉरिडोर बना लिया है। अभी तक शहडोल, अनूपपुर और उमरिया में 12 लोगों को हाथियों ने कुचल दिया है। इन हाथियों को हटाने के लिए प्रोजेक्ट ऐलिफेंट मंजूर नहीं हो पाया है। विभाग दाे साल से केंद्र सरकार से इसकी मांग कर रहा है।
तीन साल पहले हाथियों की घुसपैठ
बांधवगढ़ के नजदीक 150 साल में कभी हाथियों ने एक जगह स्थायी डेरा नहीं डाला। वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ से 30 हाथियों का एक झुंड घुसा था। अब संख्या 54 के ऊपर है। ग्रामीणों की मौत के साथ ही फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे है।
दूसरे प्रदेशों में पुख्ता तैयारी : पश्चिम बंगाल और उड़ीसा जैसे राज्यों में ऐलिफेंट प्रोजेक्ट के तहत हाथियों को विशेष क्षेत्र में ही विचरण के लिए बड़ी गहराई वाली नालियां बना दी गई। निगरानी के लिए खास वैन व प्रशिक्षित वनकर्मी रहते है।
हाथियों के हमले से बड़े हादसे
- अनूपपुर के मझौली पुरगा गांव में 2 अप्रैल 2020 को खेत में काम करते तीन मजदूरों को छत्तीसगढ़ से घुसे जंगली हाथियों ने कुचलकर मार दिया था।
- अनूपपुर के सुई डांड में 2 सितंबर 2020 को हाथियों का झुंड छत्तीसगढ़ से घुस आया था। खेत में सो रहे रामचंद्र पाव को चट्टान पर फेंक दिया था।
- सीधी के संजय दुबरी पार्क के पास हैंकी गांव में 23 फरवरी को दादा के साथ ही दो पोतों को घर के बाहर कुचल दिया।
प्रदेश को एलिफेंट पर कोई फंड नहीं मिला है। हाथियों की समस्या तीन साल से आई है। वन विभाग ग्रामीणों को भी हमले से बचने की ट्रेनिंग देगा।
जेएस चौहान, सीनियर वाइल्ड लाइफ वार्डन

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