बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

विधानसभा बजट सत्र:पीडब्ल्यूडी मंत्री ने दी जानकारी-मंत्री बंगलों की सजावट पर 10 महीने में खर्च हुई ‌4.58 करोड़ की राशि


मंत्रियों के बंगले सजाने में 10 महीने में 4.58 करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए हैं। सबसे ज्यादा एक करोड़ रुपए सीएम हाउस पर खर्च हुए हैं। इसके बाद सबसे अधिक 56 लाख रुपए पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव के बंगले की साज-सज्जा में लगे हैं। यह जानकारी विस में पांचीलाल मेड़ा के एक प्रश्न के उत्तर में सामने आई है।

पीडब्ल्यूडी मंत्री भार्गव ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों के बंगलों में 1 अप्रैल 2020 से 31 जनवरी 2021 तक साज-सज्जा में किए गए खर्च का ब्यौरा दिया। सीएम हाउस में बिजली के काम में 81 लाख से ज्यादा खर्च किए गए। वहां 18.52 लाख का सिविल वर्क हुआ है। मुख्यमंत्री के 74 बंगला स्थित एक अन्य बंगले बी-8 में 13.41 लाख का काम हुआ है।

केवल सिविल वर्क देखा जाए तो मुख्यमंत्री निवास से ज्यादा काम गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह, स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी, सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया और परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के बंगले पर हुआ है। इस दौरान सबसे कम मात्र 1495 रुपए का व्यय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया व पूर्व मंत्री इमरती देवी के बंगलों पर हुआ।

किस मंत्री के यहां किस मद में कितना खर्चा

सिविल वर्क पर सबसे ज्यादा खर्च

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बिजली के काम पर सबसे ज्यादा खर्च

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बैठक में लिया गया फैसला- भाजपा की ना के बाद उपाध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस उतारेगी उम्मीदवार
विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध होने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष के पद पर अपना दावा ठोकने जा रही है। हालाकि इस बारे में पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ पहले ही साफ कर चुके हैं कि परंपरा के हिसाब से तो उपाध्यक्ष का पद विपक्ष के लिए मिलना चाहिए।

उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव की स्थिति बनने पर कांग्रेस ने उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी कर ली है। मंगलवार को नाथ की मौजूदगी में इस मामले को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। इस दौरान तय किया गया कि उपाध्यक्ष पद कांग्रेस को मिलना चाहिए।

इधर संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि परंपरा तो कांग्रेस ने तोड़ी है। कांग्रेस जब सत्तारूढ़ थी तब उन्होंने भाजपा के लिए उपाध्यक्ष का पद नहीं दिया था। ऐसी स्थिति में उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को देने का सवाल ही पैदा नहीं होता।




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