गुरुवार, 8 अक्टूबर 2020

महात्मा गांधी के नारी विषयक विचार विषय पर परिचर्चा हुई, गांधीजी नारी को सशक्त मानते थे, अबला कहने के सख्त खिलाफ थे : ऊषा मिश्रा

महात्मा गांधी के नारी विषयक विचार विषय पर परिचर्चा हुई, गांधीजी नारी को सशक्त मानते थे, अबला कहने के सख्त खिलाफ थे : ऊषा मिश्रा

भारतीय शिक्षण मंडल महिला प्रकल्प महाकौशल की साप्ताहिक डिजिटल परिचर्चा महात्मा गांधी नारी विषयक विचार विषय पर हुई। परिचर्चा का संचालन आराधना रावत ने किया।
परिचर्चा का शुभारंभ डॉक्टर क्लीम राय द्वारा संगठन मंत्र के वाचन, दीक्षित द्वारा सरस्वती वंदना और राजश्री दवे द्वारा संगठन गीत के गायन से हुआ। डॉक्टर सरोज गुप्ता ने कहा गांधीजी कहा करते थे कि नारी एक ऐसा चिराग है जो एक नहीं बल्कि दो-दो कुलों को रौशन करती है। देश तरक्की के शिखर पर तभी पहुंच सकता है। जब देश की नारियां शिक्षित होंगी।

यहा तक कि यदि कस्तूरबा गांधी का सहयोग न होता तो गांधी जी आज महात्मा न होते। डॉक्टर ऊषा मिश्रा ने कहा कि महात्मा गांधी नारी को पुरुषों की तुलना में अधिक सुदृढ़, सहृदय, धैर्यशील और मानसिक रुप से सशक्त मानते थे। यही कारण है कि वो नारी को अबला कहने के सख्त खिलाफ थे। पुष्पलता पांडे ने कहा कि गांधीजी ने कांग्रेस में महिलाओं को नेतृत्व का अवसर दिया।

कुछ विदेशी महिलाओं को अपने व्यवहार और स्नेह से इतना प्रभावित किया कि वह अपना देश छोड़कर भारत में बस गईं। शोभा सराफ ने कहा कि गांधी जी का जीवन पूरी दुनिया के लिए अमर सन्देश है। उन्होंने सत्य को जीवन में उतारने के लिए अनेक प्रयास किए। पूनम मेवाती ने कहा कि नारी को अबला कहना उनकी आतंरिक शक्ति को दुत्कारना है। नारी पर कोई कानूनी प्रतिबन्ध नहीं लगाना चाहिए।

नारी संकल्प शक्ति से देश बदल सकती है
कार्यक्रम में डॉक्टर गौरी खोटे ने कहा कि नारी अपनी संकल्प शक्ति और आध्यात्मिक अनुभूति के बल से देश का रूप बदलने की ताकत रखती है। रूपा राज ने कहा गांधी जी अपनी मां और पत्नी का भी बहुत आदर करते थे। सरिता त्रिवेदी ने कहा गांधीजी कहा करते थे कि आप मेरे शरीर को ज़ंजीरो से जकड़ सकते हैं ,यातना दे सकते हैं लेकिन मेरे विचारों को कैद नहीं कर सकते। प्रीति शर्मा ने कहा कि गांधी जी स्त्री और पुरुष को एक दूसरे का पूरक मानते थे। डॉक्टर कृष्णा गुप्ता ने कहा गांधीजी की सोच अपने समय से बहुत आगे थी। आराधना रावत ने कहा गांधी जी का जीवन पूरी दुनिया के लिए सन्देश है। अहिंसा परम वीर की पहचान है और नारी अहिंसा की पहचान है।



Mahatma Gandhi's discussion on the topic of women was discussed, Gandhiji considered the woman strong, was strongly against calling Abla: Usha Mishra




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