जिला अस्पताल परिसर में निर्मित कोविड आइसीयू का इंतजार धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। वार्ड निर्मित होने के बाद अब यहां पर वेंटिलेटर, मल्टी पैरा मॉनिटर, हाई नोजल ऑक्सीजन सहित अन्य मशीनें वार्ड में फिट हो गई हैं। अन्य बची मशीनें एक-दो दिन में विभाग के इंजीनियर्स द्वारा फिट कर दी जाएंगी। इस वार्ड को शुरू करने के लिए अब इंतजार है तो सिर्फ डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ का।
जिला अस्पताल परिसर स्थित पुराने महिला वार्ड में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10 बिस्तर का कोविड आईसीयू बनाया गया। 12 दिन पहले हैंडओवर हुए इस वार्ड में स्वास्थ्य विभाग द्वारा तीन वेंटिलेटर स्थापित किए गए हैं। इसमें से दो वेंटिलेटर बेड पर फिक्स रहेंगे, जबकी एक वेंटिलेटर चलित रहेगा। इसे प्रबंधन मरीज की सुविधा अनुसार इस्तेमाल करेगा। साथ ही 5 बिस्तर पर मल्टी पैरा मॉनिटर मशीन लगाई गई है, जो मरीज के वीपी, पल्स और ईसीजी सहित ऑक्सीजन लेविल को कंट्रोल करेगा। चार चलित हाई नोजल ऑक्सीजन मशीन लगाई गई हैं, जो मरीज के फेपड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाएंगी।
मरीज के ऑक्सीजन लेवल को कंट्रोल करने के लिए सभी 10 बिस्तरों पर सक्सन मशीनें स्थापित की गई हैं। गंभीर कोरोना मरीज का बिस्तर पर ही एक्सरा हो सके इसके लिए एक चलित एक्सरे मशीन, फेपड़ों की पंपिग करने के लिए दो डी फिब्री लेटर मशीनें वार्ड में पहुंच गई हैं। बांकी की अन्या मशीनें एक-दो दिन में सीएमएचओ कार्यालय से वार्ड में पहुंच जाएंगी और फिट हो जाएंगी। अब इंतजार है तो सिर्फ इस वार्ड में ड्यूटी करने वाले स्टाफ की।
125 से अधिक मरीज हुए मेडिकल कॉलेज रैफर
जिला अस्पताल में कोविड आईसीयू निर्माण की स्वीकृति मिलने के 4 महीने से इस वार्ड का निर्माण स्वास्थ्य विभाग के सब इंजीनियर द्वारा कराया जा रहा था। इन दिनों जिले में सवा 1300 से अधिक लोग कोरोना संक्रमित पाए गए, जबकी जिले में 125 से अधिक कोरोना संक्रमितों की हालत गंभीर होने पर सागर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा। इसमें से जिले के 26 गंभीर मरीज अभी भी सागर मेडिकल कॉलेज, भोपाल के चिरायु और दिल्ली के गंगाराम सहित इंदौर अस्पताल में भर्ती हैं। यदि इस कोविड आईसीयू वार्ड में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ सहित अन्य कर्मचारी जल्द मिल जाते हैं तो जिले के मरीजों की परेशानी खत्म हो जाएगी।
सागर मेडिकल कॉलेज रैफर का डर होगा खत्म
जिले में अब तक सवा 1300 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज पाए गए। 125 से अधिक मरीज प्रशासन के निर्देशानुसार सागर मेडिकल कॉलेज रैफर किए गए। जिले के 29 कोरोना संक्रमितों की मौत हुई। इसमें से 21 मरीजों की मौत सिर्फ सागर मेडिकल कॉलेज में हुई।
इतने मरीजों की मौत के बाद जिले के लोगों में डर बैठ गया कि जो भी मरीज सागर मेडिकल कॉलेज इलाज कराने जाता है, वह वहां से जिंदा वापस नहीं आता। इस कारण जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कई मरीजों ने सागर जाने से इनकार कर दिया। जो लोग सक्षम हैं वे अपने कोरोना संक्रमित मरीज को भोपाल, दिल्ली, इंदौर, ग्वालियर और कानपुर ले गए, पर सागर मेडिकल कॉलेज नहीं। इस वार्ड के शुरू होने से मरीजों को सागर नहीं जाना पड़ेगा । और डर भी खत्म हो जाएगा।
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