राजबाड़ा की चार मंजिल की लकड़ियों की जांच के लिए जल्द ही चेन्नई के आईआईटी प्रोफेसर आएंगे। निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने बताया स्मार्ट सिटी के तहत राजबाड़ा का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसमें सबसे बड़ी समस्या थी कि लकड़ियों के जॉइंट कई जगह से सड़ गए थे। चूंकि राजबाड़ा की डिजाइन मुगल, मराठा और फ्रेंच तकनीक से बनी है, इसके लिए हर फ्लोर की जांच बारीकी से करना होती है। इसके लिए हर मंजिल पर गहराई तक खुदाई करने के बाद ही उसकी लकड़ी की जांच की जाती है।
पहले देहरादून की एक्सपर्ट संगीता गुप्ता ने जांच की थी। आठ महीने से चेन्नई आईआईटी के प्रोफेसर अरुण मेनन से संपर्क था। मार्च में लॉकडाउन के बाद से वे ऑनलाइन ही अपनी राय दे रहे थे। अनलॉक होने के बाद से लगातार उन्हें इंदौर आने के लिए कहा जा रहा था। जल्द ही वे इंदौर आ रहे हैं और उनके द्वारा ड्राइंग और डिजाइन देखने के बाद राजबाड़ा का फ्रंट एलिवेशन का काम शुरू हो सकेगा।
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