कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच स्वास्थ्य सेवाएँ सुचारु रखने बड़े निजी अस्पतालों को भी संक्रमितों को भर्ती करने कहा गया है। इसके लिए अस्पताल की बिस्तर क्षमता के अनुसार कोरोना मरीजों के लिए कुछ बेड आरक्षित किए गए। शहर के 3 अस्पतालों ने कागजों पर बेड बताए, लेकिन वे मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं, कुछ में तो उनका स्टाफ ही आइसोलेट रखा गया है जिन्हें आम मरीज बताया जा रहा है। जाँच के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. रत्नेश कुररिया ने इन अस्पतालों को जल्द मरीज भर्ती करने का नोटिस दिया है, ऐसा न करने पर सख्त कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।
47 मरीजों को मिल सकेगा इलाज | जिन अस्पतालों द्वारा कोरोना मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है उनमें आशीष हॉस्पिटल, महाकौशल अस्पताल तथा मार्बल सिटी हॉस्पिटल हैं। इन अस्पतालों ने प्रशासन को क्रमश: 20, 6 और 21 बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित करने की जानकारी दी लेकिन मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के पास संक्रमितों की कई शिकायतें पहुँचीं, जिसके बाद वहाँ का भौतिक सत्यापन कराया गया तो यह बात सामने आई कि वे मरीज नहीं ले रहे हैं।
घर में मौत, रात में रिपोर्ट पॉजिटिव आई
खटीक मोहल्ला निवासी 60 वर्षीय महिला कुछ दिनों से बीमार थीं, बीते शनिवार को उनकी कोविड जाँच हुई। तबियत िबगड़ने पर सोमवार की शाम उनकी मौत हुई। इस दौरान रिश्तेदार आदि एकत्र हुए तो रात में रिपोर्ट पाॅजिटिव होने की सूचना मिली। मातम के माहौल में अचानक ही हड़कंप मच गया। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से परामर्श किया तथा उनके निर्देश पर मोक्ष संस्था द्वारा अंतिम संस्कार चौहानी मुक्तिधाम में कराया गया।
डीएचओ-2 भी संक्रमित
मंगलवार को आई सैंपल रिपोर्ट में जिला स्वास्थ्य अधिकारी-2 डॉ. मोहंती भी कोरोना संक्रमित पाई गईं हैं। वे कोरोना संकट में शुरूआत से ही सैंपलिंग, क्वारंटीन सेंटर के साथ ही अन्य काम देख रही थीं। उपचार के लिए उनके निजी अस्पताल में भर्ती होने की सूचना है।
सस्पेक्ट वार्ड में बाँटे ऑक्सीमीटर
मोक्ष मानव सेवा समिति के अाशीष ठाकुर व सदस्यों ने मंगलवार को मेडिकल प्रबंधन की अनुमति से अस्पताल के सस्पेक्ट वार्ड में भर्ती मरीजों की सुविधा के लिए स्टाफ को आॅक्सीमीटर उपलब्ध कराए, साथ ही भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका मनोबल बढ़ाया।
अधीक्षक की जाँच मेडिकल में, मरीजों की बाहर से
मेडिकल कालेज में कोविड मरीजों के लिए आवश्यक जाँचें सुविधा होने के बाद भी सेंट्रल लैब से न कराकर निजी लैब से कराई जा रही हैं, जिसके बिल का भुगतान कालेज प्रबंधन कर रहा है। वहीं संक्रमित होने के बाद होम आइसोलेट हुए अस्पताल अधीक्षक की जाँचें पिछल दिनों सेंट्रल लैब में हुईं। इस दो तरह के कामकाज को लेकर निजी लैब में जाँच संबंधी प्रबंधन के निर्णय को लेकर कई तरह की चर्चाएँ हैं।
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