मुरैना की कुटी लाल मिर्च का पावडर फ्रांस के बाद अब इटली भी जाएगा। इसके लिए पहले दौर में एक लाख रुपए का ऑर्डर प्रेरणा स्व-सहायता समूह को मिला है। इटली से पहले फ्रांस ने भी डेढ़ लाख रुपए का तीखा लाल मिर्च पावडर मुरैना से मंगाया है। यह निर्यात और बढ़े, इसके लिए प्रशासन व नाबार्ड ने मिलकर जिले में आलू, बाजरा, शहद, तिल के व्यापार के लिए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। गुरुवार को कलेक्टर प्रियंका दास व नाबार्ड के जिला प्रबंधक अमित चौहान ने कृषक उत्पादक संगठनों के गठन को लेकर अंतिम रूप दिया।
कृषक उत्पादक संगठन तैयार करने के काम में कृषि व किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की मदद ली जा रही है। 30-30 किसानों के समूहों को आलू, बाजरा, शहद, तिल सहित उद्यानिकी फसलों के बंपर उत्पादन से लेकर उनकी ब्राॅडिंग व मार्केटिंग करने के टिप्स सिखाए जाएंगे। इसके लिए 17 सितंबर को मुरैना में नाबार्ड ने ट्रेनिंग रखी है। एफपीओ के गठन में 2 से 3 पदाधिकारियों के स्नातक होने की अनिवार्यता रहेगी ताकि वे अपने उत्पाद को बेचने के संबंध में ठीक से काम कर सकें।
किस क्षेत्र में किस उत्पाद पर बढ़ाया जाएगा व्यापार
पोरसा क्षेत्र के किसान आलू की खेती को बड़े क्षेत्रफल में करते हैं। आलू उत्पादक किसानों को उनकी फसल के वाजिब दाम मिलें इसके लिए प्रशासन किसानों के कृषक उत्पादक संगठन तैयार करा रहा है। बाजरा का उत्पादन भी मुरैना जिले के किसान बड़ी तादाद में कर रहे हैं। बाजरा के लिए भी कृषक उत्पादक संगठन तैयार कराया जा रहा है। जिले में सरसों की बंपर पैदावार के कारण शहद उत्पादक संगठन काम कर रहे हैं। शहद का उत्पादन अभी भी कृषि विज्ञान केंद्र के अलावा महात्मा गांधी सेवा आश्रम व मुरैना में एक-दो स्थानों पर किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि शहद के उत्पादन के लिए भी एफपीओ की संख्या बढ़ाई जाए।
सरसों के तेल का उत्पादन केंद्र होने के कारण मुरैना जिले के किसानों को सरसों के रेट बेहतर मिलें, इसलिए सरसों की पैदावार करने वाले किसानों का संगठन भी तैयार किया जाएगा। जौरा ब्लॉक के गांवों में अमरूद की खेती की जा रही है। जौरा के अमरूदों की मिठास अच्छी होने के कारण नाबार्ड उन्हें विदेशों में बिकवाने की तैयारी कर रहा है तक मिर्च की तरह अमरूद के ऑर्डर भी विदेशों से मिलें। पशुओं के गोबर को देवरी गोशाला में खरीदने की व्यवस्थाएं भी शुरू कराने की योजना है ताकि पशु पालकों की आय बढ़े।
यूनिट लगाने के लिए नाबार्ड देगा 25 लाख रुपए का ऋण
आलू, शहद, बाजरा, मिर्च, सरसों, तिल व अमरूद के उत्पादन की यूनिट स्थापित करने के लिए कृषक उत्पादक संगठनों को नाबार्ड 25-25 लाख रुपए तक के लोन दिलवाएगा। इसके लिए हर साल पांच-पांच लाख रुपए का वित्तीय प्रबंधन नाबार्ड का रहेगा। नाबार्ड के जिला प्रबंधक अमित चौहान का कहना है कि जो युवा किसान एफपीओ पर काम करने के इच्छुक हैं, उन्हें आगे बढ़ाया जाएगा।
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