रविवार, 17 मई 2020

गाजीपुर और सीमापुरी अप्सरा बॉर्डर पर पहुंचे मजदूर बोले- ‘छह महीने तक नहीं लौटेंगे, किसी तरह घर भिजवा दो’

गाजीपुर और सीमापुरी अप्सरा बॉर्डर पर पहुंचे मजदूर बोले- ‘छह महीने तक नहीं लौटेंगे, किसी तरह घर भिजवा दो’
केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने शुक्रवार को सभी मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा कि प्रवासी मजदूर पैदल गृह राज्यों के लिए निकल पड़े हैं। श्रमिक स्पेशल ट्रेन में भेजने का पत्र 11 मई को भेजा था। फिर भी अभी ऐसे हालात हैं। जहां कहीं पैदल रोड या रेलवे ट्रैक पर जाते मजदूर मिलें, उन्हें रोकें। समझा बुझाकर शेल्टर होम में ले जाएं। खाना पानी दें और उनके गृहराज्य भेजने की व्यवस्था करें। लेकिन ये क्या गृह सचिव दिल्ली-यूपी बॉर्डर सीमापुरी और गाजीपुर पर लगातार तीसरे दिन हजारों लोग जमा हो गए।
शुक्रवार तक बॉर्डर से पुलिस इन्हें खुद ही खाली ट्रक-टेम्पो में बैठाकर आगे भेज रही थी लेकिन अब औरेया हादसे के बाद यूपी पुलिस ने पैदल बॉर्डर पार करने से रोका। लेकिन वाहन में नहीं बैठाया। बता दें कि मजदूर घर वापसी करना चाहते हैं, इनके लिए बस या ट्रेन सर्विस उनके राज्यों से ही व्यवस्था जल्दी करनी होगी। दिल्ली पुलिस के जवान बॉर्डर पर प्रवासियों से कह रहे थे-जहां से आए हो वापस चले जाओ, शेल्टर होम भी भर गए हैं। यूपी पुलिस के सब इंस्पेक्टर भी मजदूरों को वापस भेज रहे थे कि यूपी में तीन शेल्टर हैं लेकिन भर गए हैं। भास्कर ने दिल्ली यमुना स्पोर्ट्स काम्प्लैक्स शेल्टर होम जाकर देखा तो वहां अभी जगह खाली थी।
समयपुर बादली का एक परिवार तो बात करते-करते आपस में लिपटकर रोने लगा
दिल्ली से अब परिवार के साथ रहने वाले प्रवासी मजदूरों का पलायन तेज हो गया है। शुक्रवार के मुकाबले शनिवार को यूपी के सभी बॉर्डर और हरियाणा के बॉर्डर पर मजदूरों की भीड़ जमा हुई। भास्कर ने इन मजदूर परिवार से बात की तो बोले- अब जा रहे हैं तो कम से कम 6 महीने या एकसाल नहीं लौटेंगे। कुछ ही ऐसे थे जो बोले- लॉकडाउन खुलने पर आ जाएंगे। समयपुर बादली का एक परिवार तो बात करते-करते आपस में लिपटकर रोने लगा। वो बोले- किसी तरह हमें अपने घर भिजवा दो। यहां खाने को पैसा नहीं और स्कूलों में पूरे परिवार लायक भरपेट खाना नहीं मिलता। हमें अब बॉर्डर से पीछे दिल्ली के शेल्टर होम में नहीं जाना, यूपी की तरफ भिजवाओ।
समस्या: खाना भी दो दिन से बंद हो गया
नरेला से एक परिवार पैदल की यूपी के फैजानपुर के लिए निकला है। छोटे बच्चों को साथ लेकर निकले इस परिवार के एक सदस्य ने कहा- किसी तरह यहां पहुंच गए। अब बॉर्डर पार हो जाए तो आगे भी पहुंच जाएंगे। उन्होंने बताया कि अब स्कूल में मिलने वाला खाना भी दो दिन से बंद हो गया है। इसी तरह गजेंद्र बवाना से करीब 50 महिला-पुरुष और बच्चों के परिजनों के साथ अप्सरा बॉर्डर पर थे।
‘मजदूरों को लेकर केंद्र के आदेश का करें पालन’
मजदूरों को लेकर केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने दिल्ली के स्टेट नोडल अधिकारी और सभी जिला अधिकारी एवं समकक्ष पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए। इसमें प्रवासी मजदूरों को सड़क या रेल पटरी पर न चलना सुनिश्चित करने को कहा है।
प्रवासी मजदूरों के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए
पूरे देश में मजदूरों की जो स्थिति है उसका असर दिल्ली के मजदूरों पर भी दिख रहा है। काफी लोगों को शेल्टर होम में रखकर उनके गृहराज्य भेजा है। केंद्र सरकार की गाइडलाइंस में अस्पष्टता है। सभी राज्यों से बात करके प्रवासी मजदूरों के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। जब दिल्ली खर्च वहन कर सकती है तो केंद्र हजारों करोड़ का पैकेज देने की बजाय सभी मजदूरों का किराया वहन क्यों नहीं करती?-गोपाल राय, श्रममंत्री दिल्ली



गाजीपुर बॉर्डर पर शनिवार को बैठेे प्रवासी मजदूर।

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