मंगलवार, 24 मार्च 2020

पांच दिन पहले बजट सत्र समाप्त, बिना चर्चा के ऊर्जा, भू-राजस्व सहित कई विभागों के 86370 करोड़ का बजट पारित


रांची. कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप को रोकने के उद्देश्य से झारखंड विधानसभा का बजट सत्र पांच दिन पूर्व ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पंचम विधानसभा का बजट सत्र 28 मार्च को समाप्त होना था। इससे पूर्व सरकार ने सोमवार को भोजनावकाश के बाद गिलोटीन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2020-21 का 86370 करोड़ रुपए का आम बजट सदन से पारित करा लिया। गिलोटीन के माध्यम से बजट को पारित कराये जाने का भाजपा ने भी विरोध नहीं किया।

यहां मालूम हो कि 29 फरवरी से शुरू हुए झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में अब तक कई विभागों की अनुदान मांगों को सदन से स्वीकृति मिल चुकी थी। फिर भी ऊर्जा, खान व भूतत्व, भू-राजस्व सहित कई विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा और बजट पर सदन की स्वीकृति लेनी बाकी थी। जिसे एक साथ (गिलोटीन) सदन से सोमवार को पारित करा लिया गया। इससे पूर्व दिन के 11.14 बजे प्रश्नकाल शुरू होते ही स्पीकर ने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर आज पूरे देश में संकट की स्थिति है। कोरोना वायरस के संक्रमण पर अंकुश लगाने को लेकर सरकार की ओर से लॉकडाउन की घोषणा की गई है। इस खतरे से निपटने को लेकर सभी चिंतित हैं। फिर पहली पाली की कार्यवाही दाेपहर दाे बजे तक स्थगित कर दी।

कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में हुआ स्थगन का फैसला

बजट सत्र को समय पूर्व समाप्त करने का फैसला कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में लिया गया। स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने सदन को बताया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में शेष विभागों की अनुदान मांगों को गिलोटीन के माध्यम से पारित कर बजट सत्र की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने पर सहमति बनी। उन्होंने इस सहमति पर सदन की भी ध्वनि मत से स्वीकृति हासिल की। कार्य मंत्रणा समिति की बैठक मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन के अलावा संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम, मंत्री सत्यानंद भाेक्ता, सरयू राय समेत अन्य सदस्य शामिल हुए।

माले विधायक ने उठाया महानगरों में फंसे मजदूरों का मामला

प्रश्नकाल शुरू होते ही माले विधायक विनोद सिंह ने कोरोना का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कोरोना को लेकर पूरे देश में विकट स्थिति है। यहां के जो मजदूर महानगरों में हैं वह या तो वहीं फंस गए हैं या रास्ते में कहीं फंसे हुए हैं। कुछ आ भी गए हैं तो उन्हें घर जाने में दिक्कत हो रही है। उनके सामने खाने-पीने की भी समस्या आ गई है। सरकार को यदि पैसे की दिक्कत है तो हम सभी विधायकों का सारा विधायक कोष ले लिया जाए, लेकिन तत्काल गरीब मजदूरों को राहत पहुंचाई जाए। राज्य सरकार, प्रधानमंत्री से इस संदर्भ में बात करे।

जिन प्रश्नाें के जवाब नहीं आसके हैं उन्हें विभागाें काे भेजा जाएगा

स्पीकर ने सदन काे स्थगित करने के पहले बताया कि करीब 70 फीसदी सवालाें के जवाब विभागाें से आए। कुल 881 सवाल स्वीकृत किए गए और कुल 604 सवालाें के जवाब मिले हैं। उन्हाेंने कहा कि जिन प्रश्नाें या ध्यानाकर्षण के जवाब नहीं आसकें हैं उन्हें विभागाें काे भेज दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।



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